प्राइवेट अस्पतालों पर लगा आरटीएच कानून हटा
नवलगढ . राजस्थान के निजी चिकित्सकों की 17 दिन से चली आ रही हड़ताल आज राजस्थान सरकार व प्राइवेट चिकित्सा संघों की लंबी वार्ता के बाद निजी चिकित्सकों पर लगा काला कानून हटा लिया गया। यह डाक्टरों की आपसी एकता की वजह से सरकार को मानना पड़ा। अब यह कानून सिर्फ उन्ही संस्थाओ अस्पतालों में लागू रहेगा जो सरकारी या सरकार से सस्ती दरों में जमीन लेकर, पीपीडी मोड पर, ट्रस्टों द्वारा संचालित अस्पताल तथा कुछ और रियायतें भी दी गई है जो अव्यहारिक थी। आज जयपुर में महापड़ाव में लाखों चिकित्सको चिकित्साकर्मियों दवा विक्रेताओ परिवारजनों ने भाग लिया। डाक्टरों पर लगे केस भी हटा लिये गये है। डाॅ दयाषंकर जांगिड ने बताया कि आज नवलगढ से डाॅ मनीष डाॅ मीनाक्षी जांगिड डाॅ कपिल गुप्ता डाॅ हेमंत डाॅ आभा गुप्ता डाॅ राजेष सैनी, डाॅ कैलाष सैनी, डाॅ दीपक खंडेलवाल, डाॅ सत्येन्द्र, डाॅ ताराचंद आदि ने अपने सहयोगियों के साथ पड़ाव में भाग लिया। आज से प्राइवेट अस्पतालों ने कार्य करना शुरू कर दिया है। आपने कहा कि हम लोग पहले भी इमरजेंसी व गरीबो पर ध्यान देते थे। उनके लिये व्यवस्था करवाते थे और भविष्य में भी करते रहेंगे। 17 दिन आप लोगो ने पीड़ा भोगी है उसके लिये हमे खेद है लेकिन हमारी मजबूरी थी। यह कानून लग जाता तो आप व हमारे रिष्ते बिगड़ जाते। डाक्टर अपने अस्पताल नहीं बनाते। चिकित्सा सेवाओं मंे गुणवता समाप्त हो जाती। यह सर्वविदित है कि सरकार के पास वो साधन उपलब्ध नहीं है जो प्राइवेट अस्पतालों में है। पूरें झुंझुनू जिले सिर्फ झुंझुनू बीडीके अस्पताल व नवलगढ जिला अस्पताल में सोनोग्राफी की दो मषीने है वो भी कभी चालू रहती है कभी बंद रहती है। प्राइवेट अस्पतालों मे करीब 75 मषीनें उपलब्ध है जो दिनरात काम आती है। हमारी कोई सरकार से टक्कर नहीं है लेकिन सरकारी व प्राइवेट अस्पताल साथ मिलकर काम करंे तो जनता को ज्यादा फायदा होगा। मुख्यमंत्री को धन्यवाद है कि उन्होने आखिर हमारी बात मानकर जनता के हित में फैसला लिया है। इसमें न तो किसी की हार हुई है और न किसी की जीत।