साध्वी मणिप्रभा श्री का कोटा में चातुर्मासिक मंगल प्रवेश आज
कोटा। धार्मिक एवं शैक्षणिक नगरी कोटा की ऊर्जावान धरा पर श्री पार्श्व कुशलधाम, दानबाड़ी दादाबाड़ी में चातुर्मासिक का आयोजन होने जा रहा है। मरूधर ज्योति, प्रखर व्याख्यात्री तीर्थ प्रभाविका परम पूज्या श्री मणिप्रभा श्री जी ने वर्षाकाल 2023 में आराधना, साधना हेतु चातुर्मासिक स्थिरता के लिए कोटा का चयन किया है। श्री जैन श्वेतांबर पेढ़ी के अध्यक्ष लोकेंद्र डांगी एवं प्रचार प्रसार संयोजक प्रदीप छाजेड़ ने बताया कि वर्षाकाल हेतु परम पूज्या गुरूचर्या आदि ठाणा का मंगल प्रवेश 25 जून, रविवार को सुबह 9.30 बजे होगा । चातुर्मास के मंगल प्रवेश की शोभायात्रा (सामैया) अनिल कुमार छाजेड़ के विद्या मंदिर स्कूल के पीछे दादाबाड़ी स्थित निवास से सुबह 8.30 बजे आरंभ होगी। यहां पर ही नवकारसी की व्यवस्था सुबह 7.30 बजे से होगी। इसकी पूरी तैयारियां कर ली गई हैं । पत्रकार वार्ता में चातुर्मासिक मंगल प्रवेश के पोस्टर का विमोचन भी किया गया । इस अवसर पर पेढ़ी के आशीष सिंघवी, मुकेश जिन्दानी, डॉ. गजेंद्र तातेड, प्रदीप बरडीया, तुषार चोरड़िया, राजेंद्र दासोत व अन्य सदस्य उपस्थित थे ।
नित्य प्रवचन 1 जुलाई से
मंगल प्रवेश के बाद प्रवचन 1 जुलाई 2023 से दादाबाड़ी दानबाड़ी में होंगे। प्रवचन नियमित रूप से सुबह 9 से 10 बजे तक होंगे। साध्वी श्री मणिप्रभा श्री जी के साथ वर्तमान में 6 अन्य साध्वियां हैं। आपकी कुल 22 शिष्याएं हैं।
श्री मणिप्रभा श्री जी का जीवन परिचय
फाल्गुन की दशमी पर परम पूज्या श्री मणिप्रभा श्री जी का संयम जीवन 11 मार्च 1957 को हुआ । आपका शुभ नाम साध्वी मणिप्रभा श्री दिया गया। पूरे भारतवर्ष में जैन समाज में ऐसी विरल विभूति हैं, जिनका उत्कृष्ट संगम प्रवचन की शैली से जन-जन को नतमस्तक करने की भावना से जोड़ देती है। आपके जीवन में अनुशासन, आपकी वाणि में ओज, स्पष्ट वक्ता से आप लाखों अनुयायियों के हृदय में वास करते हैं। साध्वी जी का जन्म राजस्थान की राजधानी गुलाबी नगरी जयपुर में जौहरी बाजार में धर्मानुरागी परिवार अनंतमल, संतोष बाई छाजेड़ के घर में भादवा वदि ग्यारस संवत के दिन शुभलक्ष्णों में हुआ। जन्म के समय ही ज्योतिषि ने मस्तक पर तिलक का चिह्न देखकर कह दिया था कि किसी राजघराने में इनका जीवन सुशोभित होगा। माता-पिता द्वारा इस नन्ही बाला का नाम मन्ना कुमारी दिया गया। आपका जीवन 14 वर्ष के बाल जीवन में एक क्षण ऐसा आया कि नानी मां के कहने पर उनके साथ अजमेर जाने को तैयार हुए। वहां गुरुदेव की अष्टम शताब्दी के कार्यक्रम में अनेक साधु-साध्वी गुरू भगवंतों का पदार्पण हुआ। यहां कुमारी मन्ना ने भी दादाबाड़ी प्रवेश के साथ ही आध्यात्म योगिनी जैन कोकिला पूज्या श्री विचक्षण श्री जी मंसा को अपनी अंतरदृष्टि से निहारा और जब अंतरदृष्टि खुली तो वह क्षण मन्ना के जीवन में वैराग्य ले आया। कोई उपदेश नहीं, स्वयं से स्वयं को जागृत करती रही । जैन दर्शन के सामान्य नियमों से ही अनभिज्ञ यह कोमल बालिका महावीर के उत्कृष्ट पथ पर चलने को अग्रसर हो गई।