दिल्ली की बाढ़ में बांटे सैनिटरी पैड्स
एक लेख ने प्राइवेट नौकरी छोड़ बना दिया कलेक्टर, ऑफिस में खुलवाया बेबी केयर सेंटर
नई दिल्ली . IAS सोनल गोयल बीते 15 सालों से प्रशासनिक सेवा में काम कर रही हैं। फिलहाल वो त्रिपुरा की रेजिडेंट कमिश्नर के रूप में दिल्ली में तैनात हैं। एक ऑफिसर के रूप में सोनल गोयल ने महिलाओं को लेकर कई काम किए हैं। सोशल मीडिया पर लाखों लोग उनको फॉलो करते हैं।
आज के ‘ये मैं हूं’ में जानिए IAS सोनल गोयल और उनके इस सफर की कहानी…
महिलाओं का दर्द समझने वाली IAS ऑफिसर
IAS बनने से पहले मैं प्राइवेट जॉब कर रही थी। इस दौरान हमेशा सोचती कि मैं दूसरों के काम कैसे आ सकती हूं? मेरे पिता भी नौकरीपेशा हैं। मैंने बचपन से अपनी मम्मी और पापा को जरूरतमंदों की मदद करते देखा। वो हमेशा दूसरों के बारे में सोचते थे।
ऐसे में मैं भी उन्हीं की तरह कुछ करना चाहती थी। IAS बनने के पीछे भी मेरा यही मकसद रहा। जहां भी मेरी पोस्टिंग हुई, वहां एक महिला होने के नाते मैंने दूसरी महिलाओं के दुख-दर्द को समझने और अपने पद की मदद से दूसरों के काम आने की भरपूर कोशिश की।
अभी कुछ दिन पहले दिल्ली में बाढ़ आई थी। यमुना खादर के इलाके में मैं दौरा करने गई। विस्थापितों के लिए प्रशासन ने काफी इंतजाम किए थे। सामाजिक संस्थाओं की मदद से उनके खाने और रहने का अस्थाई प्रबंध तो हो गया था।
लेकिन मैंने एक महिला के बतौर सोचा कि अगर इस स्थिति में किसी लड़की को पीरियड्स आते हैं तो वह किससे मदद मांगेगी। जिसका घर पानी में डूब गया है, जो सड़क पर बने तंबू में रह रही है, उसे सैनिटरी पैड लाकर कौन देगा?
ऐसी स्थिति में मैंने ये जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली और बाढ़ पीड़ित महिलाओं में सैनिटरी पैड्स बंटवाए। मैंने खुद कम उम्र की लड़कियों और महिलाओं से जाकर बात की। उनकी परेशानियां सुनीं। एक अफसर के रूप में जितनी मदद कर सकती थी, मैंने उन्हें वो मदद दी। साथ ही सामाजिक संगठनों के साथ जुड़कर मैं निजी रूप से भी आगे आई।
देशभर में 13वीं रैंक आई, पहले UPSC के बारे में पता नहीं था
मेरा परिवार मूल रूप से पानीपत का रहने वाला है। लेकिन मेरा जन्म और शुरुआती पढ़ाई-लिखाई दिल्ली में ही हुई। मैंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया।
बहुत दिनों तक मुझे सिविल सर्विस के बारे में कोई खास जानकारी नहीं थी। लेकिन एक मैगजीन में आर्टिकल पढ़कर मैंने भी इस परीक्षा में बैठने का मन बनाया। मैंने काफी मेहनत भी की। जल्दी ही मेरी मेहनत रंग लाई और UPSC में देशभर में मेरी 13वीं रैंक आई। इस तरह प्राइवेट नौकरी छोड़ने के बाद मैं IAS बन गई।