संजय राउत का बड़ा दावा, जनवरी-फरवरी में बदलाव!
मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने देश के मौजूदा राजनीतिक माहौल को लेकर बड़ा दावा किया है। मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि विरोध की आवाज को लाठी, गोली या किसी तरह की ताकत के इस्तेमाल से दबाया नहीं जा सकता। राउत ने दावा किया कि जनवरी और फरवरी तक देश की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
राउत की यह टिप्पणी 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में हुए प्रदर्शन के बाद सामने आई है। इस प्रदर्शन में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके और उनके समर्थकों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई थी। प्रदर्शन में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी सवाल उठाए गए।
‘लाठी-गोली से नहीं रोक सकते’
संजय राउत ने कहा कि युवाओं को डराकर आंदोलन से पीछे नहीं हटाया जा सकता। उन्होंने जंतर-मंतर और मुंबई में हुए प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोग गिरफ्तारी देने और पुलिस का सामना करने के लिए तैयार हैं।
राउत ने अपने बयान में कहा कि चाहे लाठी हो, गोली हो या बंदूक, विरोध करने वाले लोगों को रोका नहीं जा सकता। उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार को आने वाले समय में जनता के विरोध का सामना करना पड़ेगा।
राउत ने आगे कहा कि जनवरी और फरवरी तक देश में बड़े बदलाव होंगे। यह उनके द्वारा किया गया राजनीतिक दावा है; उन्होंने इस बदलाव की कोई विस्तृत रूपरेखा या आधार सार्वजनिक तौर पर नहीं बताया।
शिवाजी पार्क प्रदर्शन से जुड़ा बयान
2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में CJP की ओर से प्रदर्शन आयोजित किया गया था। संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दे उठा रहा था। मुंबई पुलिस ने पहले प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंचे। बाद में प्रदर्शन हुआ और इसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई।
इस प्रदर्शन में मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए। हालांकि चुनाव आयोग की ओर से लगाए गए आरोपों पर उसका अपना पक्ष भी है। इसलिए प्रदर्शनकारियों के आरोपों और चुनाव आयोग की स्थिति को अलग-अलग देखना जरूरी है।
राउत ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
संजय राउत ने प्रदर्शन के संदर्भ में केंद्र सरकार पर कड़ा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि लोगों को अपने मुद्दे उठाने से रोका जाएगा तो इसका जवाब आंदोलन के जरिए दिया जाएगा।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर भी तीखी टिप्पणी की और कहा कि अब उन्हें जाना होगा। राउत की यह टिप्पणी उनके राजनीतिक रुख का हिस्सा है और इसे उनके बयान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
मुंबई में हुए प्रदर्शन के बाद विपक्षी दलों की ओर से भी चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन को लेकर गतिविधियां बढ़ी हैं। शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की ओर से भी चुनाव आयोग के मुद्दे पर संयुक्त प्रदर्शन की घोषणा की गई है।
कैप्टन स्मित मच्छार की राउत ने की तारीफ
इसी बातचीत के दौरान संजय राउत ने फ्लाईदुबई के भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि विमान में संकट की स्थिति के दौरान जिस तरह मच्छार ने परिस्थितियों का सामना किया, वह साहस का उदाहरण है।
30 सितंबर को फ्लाईदुबई की दुबई से तेल अवीव जा रही उड़ान FZ1073 में कॉकपिट के भीतर सह-पायलट ने कैप्टन मच्छार पर हमला किया था। घटना के दौरान विमान की ऊंचाई तेजी से कम हुई और बाद में विमान को सऊदी अरब के ताबुक में आपात लैंडिंग कराई गई। रिपोर्टों के मुताबिक यात्रियों और चालक दल के सदस्यों की मदद से स्थिति को नियंत्रित किया गया।
राउत ने मच्छार की तारीफ करते हुए कहा कि करीब 35,000 फीट की ऊंचाई पर इस तरह का फैसला लेना और विमान में मौजूद लोगों की सुरक्षा के लिए डटे रहना बड़ी बात है। उन्होंने कहा कि मच्छार को किसी एक राज्य से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि वह पूरे देश के लिए गर्व का विषय हैं।
राजनीतिक बयान से आगे क्या?
संजय राउत का जनवरी-फरवरी तक बड़े बदलाव का दावा अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनका इशारा किस तरह के बदलाव की ओर है। ऐसे में इस बयान का वास्तविक अर्थ आने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों से ही स्पष्ट होगा।
फिलहाल महाराष्ट्र में चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर विपक्षी दलों की सक्रियता बढ़ रही है। मुंबई और दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और बयानबाजी आगे भी जारी रहने के संकेत हैं।