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सत्संग से होती है आत्मा की शुद्धि-स्वामी विमर्शानन्दगिरि

सत्संग से होती है आत्मा की शुद्धि-स्वामी विमर्शानन्दगिरि

बीकानेर। उत्सव आजादी का, आजादी का अमृत महोत्सव शृंखला के अन्तर्गत श्रीमती शशिबाला मित्तल स्मृति चेरिटेबल ट्रस्ट, बीकानेर द्वारा विभिन्न स्कूलों में स्वतन्त्रता संग्राम के महानायकों के जीवन-वृत्त पर आधारित पोस्टर्स प्रदर्शनी और प्रश्नोत्तरी का आयोजन समय-समय पर किया जाता रहा है। संस्थापक ट्रस्टी विवेक मित्तल ने बताया कि इसी क्रम में केन्द्रीय कारागार, बीकानेर परिसर में जेल बन्दियों के साथ भी पोस्टर्स प्रदर्शनी और प्रश्नोत्तरी तथा श्रीलालेश्वर महादेव, शिवमठ, शिवबाड़ी के महन्त स्वामी विमर्शानन्दगिरिजी महाराज के व्याख्यान का आयोजन किया गया। प्रश्नों के सही उत्तर देने वाले प्रतिभागियों को सद्साहित्य प्रदान कर पुरस्कृत किया गया। जेल बन्दियों द्वारा ‘उत्सव आजादी का’ अभिव्यक्ति रंगों के माध्यम के अन्तर्गत पोस्टर्स भी बनाये जायेंगे। इसके लिए कारागार प्रशासन को 100 ड्राइंग शीट तथा रंग उपलब्ध करवाये गये हैं। इससे पूर्व स्वामी विमर्शानन्दगिरिजी ने अपने उद्बोधन में कहा कि सत्संग से होती है आत्मा की शुद्धि। इसके साथ ही यदि हम ईश्वर के बनाये गये नियम तन्त्र का पालन करते हुए जीवन निर्वहन करेंगे तो जब भी आप यहाँ से पुनः समाज में जायेंगे तो पहले से भी अधिक सुन्दर, चरित्रवान, श्रेष्ठ और सकारात्मक ऊर्जा से लबालब होकर जायेंगे। अतः हमें धैर्य को धारण करते हुए, अनुशासन के साथ-साथ स्वशासन में रहते हुए कर्म को करना है, अपने अन्तःकरण को निर्मल बनाते जाना है। ग्रन्थ, पन्थ और सन्त सब जग के बात बताएं तीन- सबसे पहले हमें राम हृदय बनाना होगा याति आसक्ति रहित जीवन यापन, सबके प्रति दया का भाव रखना होगा और तन को सेवा में लीन करना होगा तभी हमारा जीवन सरल, सरस और निर्मल बन पायेगा। जेल अधीक्षक आर. अनन्तेश्वरन ने कारागार में आयोजन हेतु ट्रस्ट तथा स्वामीजी का कारागृह परिवार एवं बन्दियों की तरफ से धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम के सुचारू संचालन हेतु कारापाल रामनिवास, राजेश योगी, उप कारापाल दिलावर खान व अन्य जेल स्टाफ के साथ संवित् साधक रमेश जोशी, रामचन्द्र मुलू, चन्द्रशेखर शर्मा एवं किशन आचार्य का सहयोग प्राप्त हुआ।

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