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सवाई माधोपुर: तत्काल पेंशन सत्यापन से वृद्धा जाफरान के चेहरे पर मुस्कान खिली

सवाई माधोपुर: तत्काल पेंशन सत्यापन से वृद्धा जाफरान के चेहरे पर मुस्कान खिली

अंत्योदय संबल शिविर में प्रभारी सचिव की उपस्थिति में मिला लाभ

सवाई माधोपुर। पण्डित दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय संबल पखवाड़ा के अंतर्गत ग्राम पंचायत पचीपल्या में आयोजित शिविर जरूरतमंदों के लिए वरदान साबित हो रहा है। पचीपल्या निवासी 61 वर्षीय जाफरान का ई-मित्र पर अंगूठा और फेस वेरिफिकेशन के माध्यम से वार्षिक सत्यापन नहीं हो पा रहा था, जिसके कारण उन्हें पेंशन मिलना बंद हो गई थी। इस कारण आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान रहने लगी जाफरान के चेहरे पर मंगलवार को मुस्कान खिली, जब शिविर में उनकी पेंशन का ऑनलाइन सत्यापन किया गया। इस दौरान जिला प्रभारी सचिव डॉ. देबाशीष पृष्टि मौजूद थे। डॉ. पृष्टि ने वृद्ध महिला को मौके पर ही पेंशन सत्यापन पत्र भेंट किया।गौरतलब है कि वृद्धा जाफरान पेंशन सत्यापन के लिए कई बार ई मित्र के चक्कर लगा चुकी थी। जब उन्हें पता लगा की पंचायत समिति पचीपल्या में अन्त्योदय शिविर का आयोजन किया जा रहा है, तो वह मंगलवार को अपनी समस्या लेकर शिविर पहुंची।

शिविर का अवलोकन कर रहे जिला प्रभारी सचिव डॉ. देबाशीष पृष्टी ने प्रार्थिया जाफरान से उनकी समस्या के बारे में जानकारी ली और तत्काल शिविर प्रभारी एवं सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की टीम को वृद्धा की समस्या का हल निकालने के निर्देश दिए। इस पर शिविर में संचालित ई-मित्र पर प्रार्थिया वृद्ध महिला जाफारान का राजएसएसपी पोर्टल पर ई-मित्र के माध्यम से अंगूठा और फेस वेरिफिकेशन दोनों से सत्यापन का प्रयास किया गया। परंतु तकनीकी कारणों से सत्यापन संभव नहीं हो सका। ऐसे में, शिविर प्रभारी और विकास अधिकारी पंचायत समिति की समन्वित पहल पर ओटीपी के माध्यम से सत्यापन कराया गया। यह समाधान त्वरित, संवेदनशील और जनकल्याणकारी प्रशासनिक कार्यशैली का प्रतीक बना।सत्यापन प्रक्रिया पूर्ण होते ही जाफरान के चेहरे पर संतोष और राहत की मुस्कान देखने लायक थी। उन्होंने शिविर प्रभारी दास मीना (सामाजिक न्याय विभाग), आवना शर्मा, कनिष्ठ लेखाकार तनु चावा और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का हृदय से आभार प्रकट किया। यह उदाहरण दर्शाता है कि राज्य सरकार की सेवा ही संकल्प भावना किस प्रकार धरातल पर आमजन की समस्याओं का समाधान कर रही है। यह शिविर केवल योजनाओं का मंच नहीं, बल्कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक शासन की संवेदना पहुंचाने का जीवंत प्रमाण बन चुका है।

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