आयुष्मान भारत के अंतर्गत जिला कलक्टर की हुई स्क्रीनिंग, बनाई आभा आईडी
आभा आईडी से मिल सकेगी पूरी मेडिकल हिस्ट्री
सवाई माधोपुर । आयुष्मान भारत के अंतर्गत चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला कलक्टर सुरेश कुमार ओला की स्क्रीनिंग की गई। आयुष्मान के अंतर्गत सौ दिवसीय फिट हैल्थ कैम्पेन में सभी का आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा आईडी) बनाया जा रहा है।
शुक्रवार को चिकित्सा विभाग की टीम द्वारा जिला कलक्ट सुरेश कुमार ओला की शुगर, ब्लड प्रैशर की जांच कर हैल्थ स्क्रीनिंग की गई व उनकी आयुष्मान भारत हैल्थ अकाउंट (आभा आईडी) बनाई गई। इसके साथ ही जिला कलक्टर ने इस कार्यक्रम के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी ली और इससे होने वाले लाभों के बारे में चर्चा की। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ धर्मसिंह मीना ने बताया कि आयुष्मान भारत हैल्थ अकाउंट(आभा आईडी ) बनाने के दौरान बीएमआई(बाडी मैक्स इंडेक्स), ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर की जांच की जा रही है। ओरल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर व सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग की जा रही है। आभा आईडी में लाभार्थी की पूरी डिटेल होगी व आईडी कार्ड के माध्यम से कही भी उपचार लेने पर मरीज की पूरी हिस्ट्री चिकित्सक के पास रहेगी। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ धर्म सिंह मीना, डिस्ट्रिक्ट आईईसी कोर्डिनेटर प्रियंका दीक्षित, फायनेंस कम लॉजिस्टिक कंसल्टेंट प्राची जैन मौजूद रहे।
नियमित उपचार के अभाव में 60 प्रतिशत मृत्यु
जीवनशैली में बदलाव, शुद्व भोजन का अभाव, प्रदूषण एवं गैर संचारी रोगों के प्रारंभिक अवस्था में निदान एवं नियमित समुचित उपचार के अभाव के कारण 60 प्रतिशत से अधिक मृत्यु गैर संचारी रोग के कारण होते हैं जिसमें मुख्यत कार्डियोवस्कुलर डिजीज, सीओपीडी, क्राॅनिक किडनी डिजीज, डायबिटीज, लकवा एवं कैंसर है। पोस्ट कोविड काम्पिलिकेशन भी मुख्यत यही बीमारियां है। गैर संचारी रोगों की प्रारंभिक अवस्था में निदान एवं समुचित उपचार तथा बेहतर जीवनशैली अपनाने हेतु सौ दिवसीय फिट हैल्थ कैम्पैन का चरणबद्व आयोजन किया जा रहा है।
तीन चरणों में आयोजित हो रहा कैम्पैन
सौ दिवसीय फीट हैल्थ कैम्पेन तीन चरण में आयोजित हो रहा है। प्रथम व द्वितीय चरण पूर्ण हो चुके है वर्तमान में अभियान का तीसरा चरण संचालित है जिसके अंतर्गत जिले की 30 वर्ष से अधिक आयु की लक्षित जनसंख्या की स्क्रीनिंग की जा रही है। जिससे लोगों केा समय पर बीमारी का पता चल सके और बेहतर उपचार प्रदान कर मरीज की जान बचाई जा सके।