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दूसरा सत्र- पूर्व-वर्तमान विधायकों ने साझा किए विधायी संस्मरण

दूसरा सत्र- पूर्व-वर्तमान विधायकों ने साझा किए विधायी संस्मरण

जयपुर। राजस्थान विधानसभा के गौरवमयी 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित अमृत महोत्सव के अंतर्गत बुधवार को विधानसभा में द्वितीय सत्र का आयोजन किया गया। राजस्‍थान विधान सभा अध्‍यक्ष श्री वासुदेव देवनानी, पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे और राष्‍ट्रमण्‍डल संसदीय संघ के सचिव श्री संदीप शर्मा ने सत्र का संचालन किया। दूसरे सत्र में प्रदेश के वर्तमान और पूर्व विधायकों ने विगत साढ़े सात दशकों के दौरान पारित हुए राज्य के विशिष्ट एवं जन-हितैषी अधिनियमों पर गहन एवं रचनात्मक चर्चा की।
संसदीय शुचिता, मर्यादा और अध्ययन की परंपरा आवश्यक
पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे ने सदन की गौरवमयी लोकतांत्रिक विरासत को याद किया। उन्होंने कहा कि सदन की परंपरा वैचारिक मर्यादा और जन-कल्याणकारी सोच से समृद्ध रही है तथा नए सदस्यों को अध्ययनशील होना आवश्यक है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री श्री भैरोंसिंह शेखावत और श्री मोहनलाल सुखाड़िया के तार्किक वैभव की सराहना करते हुए कहा कि जब सदस्य गहन अध्ययन करके सदन में आते हैं तो पूरा वातावरण वैचारिक रूप से समृद्ध हो जाता है। उन्होंने पुस्तकालय के अधिकाधिक उपयोग और अध्ययनशीलता पर बल देते हुए सभी सदस्यों से आह्वान किया कि वे राजस्थान की उस गौरवशाली परंपरा को जीवित रखें जहाँ वैचारिक मतभेद तीखे रहे किंतु व्यक्तिगत संबंधों में मानवीयता सर्वोपरि रही।
विशिष्ट कानूनों पर वरिष्ठ सदस्यों का प्रबुद्ध उद्बोधन- सदन की कार्यसूची में शामिल
युगांतरकारी कानूनों पर वरिष्ठ वक्ताओं ने अपने महत्वपूर्ण संस्मरण एवं विचार साझा किए। पूर्व विधायक श्री राजेंद्र राठौड़ ने राजस्थान कोचिंग सेंटर (नियंत्रण और विनियमन) अधिनियम, 2025 पर कहा कि कोचिंग सेंटरों की जवाबदेही तय करने, भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाने और बुनियादी सुरक्षा व अग्नि सुरक्षा मानकों को अनिवार्य करने के उद्देश्य से लाया गया अधिनियम विद्यार्थियों को एक तनावमुक्त, सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक माहौल देने की दिशा में एक अभिनव एवं ऐतिहासिक प्रयास है। जयपुर ग्रामीण से सांसद श्री राव राजेन्द्र सिंह ने 'राजस्थान अभिधृति (टेनेंसी) अधिनियम, 1955' के ऐतिहासिक एवं सामाजिक संदर्भों पर अपना प्रबुद्ध वक्तव्य दिया। उन्होंने इस अधिनियम को भूतकाल और वर्तमान की निरंतरता का एक जीवंत उदाहरण बताते हुए कहा कि जमींदारी और जागीरदारी प्रथा की समाप्ति के उपरांत यह कानून राज्य के काश्तकारों को उनके अधिकारों के प्रति सशक्त करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हुआ है। श्री सिंह ने इसके मूल वैधानिक चरित्र को रेखांकित करते हुए कहा कि राष्ट्र और मानव जीवन का भूमि से गहरा संबंध है और इस अधिनियम के तहत विशेष रूप से अनुसूचित जाति व जनजाति की भूमियों को कड़ा वैधानिक संरक्षण (धारा 42) प्रदान कर शोषित तबके के हितों की रक्षा की गई है, जो इस लोक-कल्याणकारी सदन की प्रगतिशील सोच का अनुपम परिचायक है। पूर्व मंत्री श्री कालीचरण सराफ ने राजस्थान विधि विरुद्ध धर्म-संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2025 की मूल भावना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कानून समाज में आपसी सद्भाव, विश्वास और प्रत्येक नागरिक की धार्मिक स्वतंत्रता के वैधानिक अधिकारों की रक्षा करने का एक सशक्त माध्यम है। पूर्व विधान सभा अध्‍यक्ष श्री दीपेंद्र सिंह शेखावत ने राजस्थान प्लेटफॉर्म आधारित गिग कर्मकार (रजिस्ट्रीकरण और कल्याण) अधिनियम, 2023 की सराहना करते हुए कहा कि ओला, उबर, जोमैटो और स्विगी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से जुड़े लाखों असंगठित गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य बना। उन्होंने कहा कि इसके तहत गठित कल्याण बोर्ड एवं विशेष कोष इन कर्मकारों के जीवन में स्थायित्व लाएगा। पूर्व विधायक श्रीमती तारा भंडारी ने राजस्थान सती (निवारण) अधिनियम, 1987 का स्मरण करते हुए कहा कि सामाजिक कुप्रथाओं के विरुद्ध लाया गया यह युगांतरकारी कानून महिलाओं के मानवाधिकारों, गरिमा और जीवन की रक्षा के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण एवं सामाजिक प्रगतिशील चेतना का गौरवशाली प्रतीक है। पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला ने राजस्थान प्राथमिक शिक्षा अधिनियम, 1964 पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसके माध्यम से प्रदेश की एक बड़ी आबादी को अनिवार्य एवं प्राथमिक शिक्षा के दायरे में लाने का भगीरथ प्रयास प्रारंभ हुआ। उन्होंने स्कूलों में स्वावलंबन और व्यावहारिक शिक्षा (कताई, बुनाई आदि) को आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। पूर्व विधायक नाथू सिंह गुर्जर ने राजस्थान पंचायत समिति एवं जिला परिषद अधिनियम 1959, विधायक श्री राजेंद्र पारीक ने राजस्थान सहकारी समितियां अधिनियम, 1965, पूर्व विधायक श्री प्रद्युमन सिंह ने लैंड रिवेन्यू एक्ट, 1956 पर अपने विचार प्रकट किये।

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