सज्जनों की निष्क्रियता से समाज का अहित - डा.आनंद भारती शर्मा
सीकर । कल्याण धाम में महंत विष्णु प्रसाद शर्मा की प्रेरणा से आयोजित नो दिवसीय रामकथा के तीसरे दिन राम जन्म की कथा सुनाते हुए कथा व्यास डा.आनंद भारती शर्मा ने कहा कि दुर्जनों की सक्रियता से समाज का उतना अहित नहीं होता जितना सज्जनों की निष्क्रियता से होता है। सज्जन लोग प्राय: कम और कभी कभी ही संगठित होते हैं यह स्थिति शुभकर नहीं है। अत: सज्जन शक्ति को समाज और धर्म के हित में सदैव सक्रिय और संगठित रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब जब धर्म की हानि होती है धरती पर अनाचार - दुराचार बढ़ता है तब तब प्रभु अलग अलग रूपों में धरती,विप्र, गौ,संत एवं सज्जनों की रक्षा के लिए अवतार लेते हैं। कथाव्यास ने शिव पार्वती विवाह का प्रसंग सुनते हुए आजकल शादी विवाह में प्रचलित दहेज प्रथा को अभिशाप बताते हुए कहा कि दूल्हा भगवान विष्णु का रूप होता है अत: उसे दहेज मांग कर भिखारी नहीं बनना चाहिए।डा.आनंद भारती ने भगवान शिवजी और रामजी की अलौकिक प्रीति का बखान करते हुए कहा कि जिनका शिव के चरणों में अनुराग नहीं वे राम के प्रिय नहीं हो सकते। बिना छल विश्वनाथ के चरणों में प्रेम ही एक राम भक्त की पहचान है। आज की कथा में राम जन्म को बहुत ही आनन्द, उल्लास और भजनों की गंगा के साथ मिष्ठान तथा उपहार बांटकर मनाया गया। कथाव्यास ने भगवान को प्राप्त करने के लिए केवल प्रेमपूर्वक प्रीति करने का अनुरोध किया क्योंकि भगवान तो सब जगह समान रूप से व्याप्त है तथा वे केवल प्रेम के वशीभूत होकर भक्त के सम्मुख ही प्रगट हो जाते हैं। आज की कथा में महिलाओं की बहुत बड़ी भागीदारी के साथ सर्व दुर्गालाल पारीक,रामावतार शर्मा,दीपक शर्मा,नरेंद्र कुमार शर्मा,कमल माथुर,रतनलाल शर्मा,राधाकृष्ण चोबदार,श्याम सुंदर शर्मा,गिरिराज मिश्रा,ओमप्रकाश सैनी, सुखसागर शर्मा,राजीव लोचन शर्मा,रवि शर्मा,अक्षय सेन,भगवान दास सिंधी,मुकेश सेन,ओमप्रकाश,लवेश अग्रवाल,केशव सेन, लक्की तिवाड़ी इत्यादि भक्तगणों ने कथा का रसपान किया।