सरकारी शराब को 35 प्रतिशत लिए जाने की अनिवार्यता का तीखा विरोध
कोटा. सरकारी शराब को 35 प्रतिशत लिए जाने की अनिवार्यता का कोटा वाइन कॉन्ट्रेक्टर एसोसिएशन ने तीखा विरोध किया है और अतिरिक्त आबकारी आयुक्त कोटा को आबकारी आयुक्त जयपुर, राज. सरकार के नाम ज्ञापन दिया है। ऐसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद पारेता ने कहा कि सरकारी शराब की क्वालिटी बेहद ही खराब आती है, जिसे ग्राहक नहीं लेता। ऐसे में जो पहले 25 प्रतिशत सरकारी देशी शराब बेचने की अनिवार्यता थी उससे ही कॉन्टेÑक्टर परेशान हो चुका था, ऐसे में इसे 35 प्रतिशत किए जाने से समस्या और भी गहरी हो गई है। ऐसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि 25 प्रतिशत शराब बेच पाना ही मुश्किल हो रहा था, ऐसे में 35 प्रतिशत तो किसी भी सूरत में नहीं बेची जा सकती। उन्होंने कहा कि देशी की जो बिलिंग होती है उसमें जीएसएम का राइडर 25 प्रतिशत का लगा हुआ था, परन्तु अब उसे बढाकर 35 प्रतिशत कर दिया गया है। जीएसएम एक ऐसा ब्राण्ड है जो ग्राहक को मुफ्त में भी दिया जाये तो वह नहीं लेता है। अनुज्ञाधारी पहले 25 प्रतिशत से परेशान है अब 35 प्रतिशत कर दिया है जबकि राजस्थान के ही अन्य जिलो में जीएसएम का राइडर 15 से 25 प्रतिशत किया गया है। उन्होंने ज्ञापन के माध्यम से अवगत कराया कि इस राइडर को तुरन्त प्रभाव से हटाए ताकि अनुज्ञाधारी बिलिंग कराकर अपनी गारण्टी की पूर्ति कर सकें।