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सूर्य नमस्कार बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहायक - विद्यारत्न शास्त्री

सूर्य नमस्कार बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहायक - विद्यारत्न शास्त्री


बहरोड़। महात्मा गांधी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में पतंजलि योग समिति जिला कोटपूतली-बहरोड़ के तत्वावधान में सामूहिक सूर्य नमस्कार का आयोजन किया गया। जिसमें पतंजलि योग समिति के जिला प्रभारी योगाचार्य विद्यारत्न शास्त्री ने सूर्य नमस्कार के महत्व को समझाते हुए सभी बच्चों से अभ्यास करवाया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि सूर्य नमस्कार के नियमित अभ्यास से हम न केवल शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ होते हैं। अपितु हम अपने दुर्लभ मनुष्य जीवन को उन्नत शिखर की ओर ले जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी दिव्य यौगिक क्रिया है जो बच्चों के सर्वांगीण विकास में बहुत ही सहायक है। उन्होंने कहा कि सूर्य नमस्कार शरीर और मन के समन्वय के साथ 12 चरणों में किए जाने वाले आठ आसनों का एक संयोजन है। जो ज्यादातर सुबह के समय किया जाता है। जो जीवन शक्ति में सुधार करता है और प्रतिरक्षा को विकसित करता है। सूर्य नमस्कार को नमस्कार या सूर्य के प्रति कृतज्ञता अर्पित करना है। क्योंकि सूर्य की प्रत्येक किरण सभी जीवित प्राणियों के लिए एक उपहार है। इसका महत्व न केवल खाद्य श्रृंखला में ऊर्जा के प्राथमिक स्रोत के रूप में है। बल्कि मनुष्य के मन और शरीर को सक्रिय करने में भी है। साथ ही शास्त्री ने राज्य सरकार द्वारा सभी विद्यालयों में सूर्य नमस्कार को प्रार्थना सभा में अनिवार्य किए जाने पर प्रसन्नता जाहिर की। इस अवसर पर स्कूल प्राचार्य महिपाल सिंह यादव के अतिरिक्त समस्त स्टाफ सदस्य व बड़ी संख्या में बच्चे मौजूद रहे। अंत में स्कूल प्राचार्य ने योगाचार्य का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए सभी के स्वस्थ जीवन व उज्ज्वल भविष्य की मंगल कामना की।

 

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