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शिक्षकों का हल्ला बोल प्रदर्शन सरकार की शिक्षा विरोधी नीतियों के खिलाफ 

शिक्षकों का हल्ला बोल प्रदर्शन सरकार की शिक्षा विरोधी नीतियों के खिलाफ 

पदमपुर. एसडीएम कार्यालय पर राजस्थान शिक्षक एवं पंचायती राज कर्मचारी संघ के सौ सदस्य से अधिक शिक्षकों ने राज्य सरकार के खिलाफ हल्ला बोल प्रदर्शन करते हुए  एक सुर में कहा कि वो बीएलओ नहीं शिक्षक बनकर अपनी सेवाएं राष्ट्रहित में सर्वोपरि के रूप  देगे ,सरकार प्रताड़ित करना बंद करें अन्य  इसके गंभीर परिणाम भुगतने को तैयार रहें ।  संघ के जिला अध्यक्ष रामचंद्र शर्मा , इन्द्राज  जाखड़ , प्रमोद राजपाल ,  ब्लॉक अध्यक्ष जयपाल शर्मा , श्रीमुख सिंह , राज कुमार , गोपाल चावला , पवन लिंबा , सुधीर विश्नोई , दिनेश यादव , प्रेम कुमार चंदोला , मोनिका पारवानी ,  मनप्रीत कौर , अनु बिश्नोई , सुनील यादव आदि शिक्षकों ने कहा कि अपनी जायज मांग को लेकर अनेकों बार  शांतिपूर्ण तरीके से समय -समय पर  ज्ञापन व  सम्मेलन  एवं धरना प्रदर्शन के माध्यम से  निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 27 तथा तत्कालीन मुख्य सचिव राजस्थान सरकार के आदेश  5 जुन 2020 की अनुपालना में 10 वर्षीय जनगणना, निर्वाचन तथा आपदा प्रबंधन के कार्यों के अतिरिक्त शिक्षकों को किसी भी गैर शैक्षणिक कार्य में नहीं लगाने की मांग की जाती रही है। प्रदेश में विभागीय अधिकारियों द्वारा  उच्चततम न्यायालय तथा राज्य सरकार के ऐसे सभी जारी आदेशों को दरकिनार कर वर्तमान में शिक्षकों की उनके मूल कार्य से विमुख कर अनेक प्रकार के गैर शैक्षणिक कार्यों में लगातार लगाने से स्कूलों में विद्यार्थियों का शिक्षण कार्य और परीक्षा परिणाम प्रभावित हो रहा है।  उपखंड अधिकारियों के द्वारा निर्वाचन विभाग की ओर से जारी दिशा निर्देशों को दरकिनार कर अन्य विभाग के कर्मचारियों की बजाय अधिकतर शिक्षकों को ही मनमाने तरीके से बीएलओ लगाया जाता है ,और उन्हें तरह-तरह के नोटिस एवं धमकी देकर प्रताड़ित भी किया जाता है। यही नहीं स्कूलों में भी शिक्षकों पर मिड डे मील, दूध वितरण साक्षरता ई ग्राम प्रभारी, आए दिन विभिन्न प्रकार की सरकारी डाक सूचनाओं के आदान-प्रदान के आंकड़ों में उलझा कर शिक्षण कार्य से दूर किया जा रहा है जिससे शिक्षकों में भारी असंतोष है।  शिक्षक वर्ग को शिक्षक ही रहने दिया जाये ताकि वो मूल कार्य प्रभावित ना हो , अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 27 की फालना सुनिश्चित कराते हुए वर्ष भर चलने वाले गैर शैक्षिक कार्य बीएलओ सहित सभी प्रकार के लिए जा रहे गैर शैक्षणिक कार्यों से पूरी तरह मुक्त कराए जाने की मांग को लेकर संघ के राज्यव्यापी आदोलन के प्रथम चरण में उपखंड मुख्यालय  पर धरना , प्रदर्शन  कर मुख्य सचिव राजस्थान के नाम प्रेषित ज्ञापन में  राजकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों के सुचारु शिक्षण कार्य हेतु शिक्षकों को बीएलओ कार्य से पूरी तरह मुक्त किया जाए तथा मिड-डे-मील, दूध वितरण जैसे अनेक प्रकार के लिए जा रहे अशैक्षणिक कार्यों से पूरी तरह मुक्त किया जायें। शिक्षकों के स्थान पर बीएलओ सहित अन्य प्रकार के कार्यों के लिए अन्य विभागों के कार्मिकों को लगाये जाने की कृपा करें। साथ ही प्रदेश के विभिन्न स्कूलों के संस्था प्रधान, पोषाहार प्रभारी, एकल अध्यापक, ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी व नगरपालिका क्षेत्रों पर लगाये गये बीएलओ एक ग्राम पंचायत में दूरस्थ दूसरी ग्राम पंचायतों के शिक्षकों को बीएलओ के रूप में लगाया गया है, ऐसे सभी कार्मिकों को बीएलओ के

दायित्व से मुक्त कराए जाने की कृपा करें।  विभिन्न जिलो में शिक्षकों को जिला कलेक्टर, उपखण्ड अधिकारी, तहसीलदार, विकास अधिकारी तथा विभिन्न शिक्षा अधिकारी मनमाने तरीके से अपने अपने कार्यालय में प्रतिनियुक्ति पर लगा देते हैं ,उस पर रोक लगवाते हुए सभी कार्यालयों में लिपिकीय कार्य हेतु लगाए गए ऐसे सभी शिक्षकों को उनके मूल विद्यालयों के लिए कार्यमुक्त करवाये जाने जावें । प्लस फोटो सहित प्रमुखता से लगाए । 

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