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निलंबित किए गए शिक्षकों को बहाल करने की मांग को लेकर शिक्षकों ने घेरा उपखंड अधिकारी कार्यालय

निलंबित किए गए शिक्षकों को बहाल करने की मांग को लेकर शिक्षकों ने घेरा उपखंड अधिकारी कार्यालय

रतनगढ़ . बीएलओ कार्य को लेकर निलंबित कार्मिकों को बहाल करने के संबंध में आज राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत के ब्लॉक अध्यक्ष महेंद्र शर्मा व ब्लॉक मंत्री भंवरलाल पूनिया के नेतृत्व में उपखंड कार्यालय का घेराव किया। राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत के प्रांतीय संयुक्त मंत्री शुभकरण नैण, जिला अध्यक्ष विजय पोटलिया, शिक्षक संघ अंबेडकर के जिला अध्यक्ष शिवाराम मेघवाल ने बताया की उपखंड कार्यालय की अनुशंसा पर स्थानीय महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय बापूनगर  के  शिक्षक ताराचंद व राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय राजलदेसर के कार्मिक गिरधारीलाल को जिला निर्वाचन अधिकारी (कलेक्टर) चूरू द्वारा निलंबित किया गया है। जो की गैर वाजिब है। शेखावत संघ के जिला मंत्री वेदपाल मलिक,जिला संयोजक सुरेंद्र सीगड़, रेसा वीपी के सुरेश न्यौल, रेसला के विनोद महिया, जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष बाबूलाल मुंदलिया ने बताया की राजस्थान के शिक्षक संघों द्वारा "हमें पढ़ाने दो" मुहिम के तहत समस्त प्रकार के गैर शैक्षणिक कार्यों के बहिष्कार का निर्णय लिया गया है । उसके बाद आज दिनांक तक रतनगढ़ और चूरू के शिक्षक छात्र हित में और शिक्षा अधिकार कानून की पालना में बीएलओ कार्य के बहिष्कार पर हैं। संगठन द्वारा बार बार अवगत करवाने के बावजूद भी अनैतिक तरीके से शिक्षकों पर दबाव बनाया जा रहा है, तथा कार्यवाही के नाम पर शिक्षकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। जो की राजस्थान का शिक्षक  बर्दास्त नहीं करेगा। संबोधनकर्ताओं राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत से प्रांतीय प्रतिनिधि ओमप्रकाश मुहाल,ओमप्रकाश पूनिया,प्रदेश संरक्षक रतिराम सारण,सीकर प्रवक्ता फारुख अली खान, खिंवाराम ख्यालियां,खेताराम सांडेला,रतमसिंह पूनिया ,रेसा वीपी के सुभाष मीणा,शिक्षक संघ अंबेडकर से नरेंद्र नायक व शिवाराम मेघवाल,किसान सभा से मदनलाल जाखड़,भादर भामू ने बताया की राजस्थान हाईकोर्ट के विभिन्न निर्णयों तथा राजस्थान शिक्षा सेवा नियमों के अनुसार किसी शिक्षक/कार्मिक पर कार्यवाही का अधिकार केवल उसके नियोक्ता का होता है उपखंड अधिकारी रतनगढ़ द्वारा की गई अनुशंसा पर निलंबन गैर वाजिब है। तथा निशुल्क बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 27 में स्पष्ट उल्लेख किया गया है की अध्यापन कार्य के अलावा शिक्षकों से 10 वर्षीय जनगणना, लोकसभा विधानसभा, निकाय, पंचायतीराज चुनाव तथा प्राकृतिक आपदा के कार्य करवाए जा सकते हैं। जबकि बीएलओ कार्य वर्षपर्यन्त चलने वाला सतत कार्य है जो की आरटीई के अनुसार निर्वाचन कार्य के अंतर्गत नहीं आता है तो इसे करने के लिए कोई कार्मिक बाध्य नहीं है। वर्ष पर्यन्त चलने वाले बीएलओ कार्य से पढ़ाई और परिणाम प्रभावित होते हैं। संगठन द्वारा कार्यालय का घेराव कर ये चेतावनी दी गई है की शिक्षा अधिकार कानून की पालन और राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा जारी विभिन्न आदेशों की पालना सुनिश्चित करते हुए निलंबित किए गए कार्मिकों को तुरंत बहाल करने की कार्यवाही की नहीं की जाती है तो संगठन द्वारा जिला और प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।

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