सर्दी का सितम और कोरोना का डर
नया साल, नई आशा, नया विश्वास और खुशियों भरी उमंग के साथ आ गया है जिसका देशभर
में लोगों अपने अपने तरीकों से गीत और संगीत के साथ स्वागत किया है। नए साल के साथ
सर्दी भी अपने सितम पर है । देश इस वक्त भीषण कोहरे और ठंड की लहर की चपेट में है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक पूरे उत्तर
भारत में कोहरे का असर देखने को मिल रहा है। जिसकी वजह से लोगों को कई तरह की
मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कई जगह विजिबिलिटी जीरो हो गई है। मौसम विभाग
के अनुसार, अगले दो दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम के कई हिस्सों और मध्य भारत के आसपास
के मैदानी इलाकों में ‘बहुत घना’कोहरा छाए रहने और पूर्वी भारत में फैलने की संभावना है।
सर्दी और ठण्डी लहर अपने साथ सर्दी जुकाम जैसी बीमारियां भी साथ लेकर आई है। इसी के
साथ कोरोना के एक नए वेरिएंट का खतरा भी मंडराने लगा है। हालाँकि भारत में बड़ी संख्या में
वैक्सीन लगने के बाद खतरा कम हो गया है फिर भी सावधानी जरूरी है। मौसम में बदलाव के कारण सर्दी,
खांसी, जुकाम और बुखार जैसी बीमारियां लोगों को परेशान कर रही हैं। वायरल बुखार की समस्या होने पर
कुछ सावधानियां को बरता जाए तो यह चार से छह दिन में अपने आप ठीक हो जाएगा, लेकिन इन-दिनों
कोरोना का भी लोगों को डर सताने लगा है। मौसम में हो रहे बदलाव के कारण कफ, कोल्ड, फीवर, गले में
खराश, खांसी, सिर में दर्द आदि समस्याएं होना एक आम बात है, लेकिन यह वायरल समस्याएं कोरोना
वायरस संक्रमण के लक्षण नहीं हैं।
देश इस समय सर्दी और शीत लहर की चपेट में है। घर घर में सर्दी और जुकाम का प्रकोप देखा सकता है।
ऐसे में लोगों के समक्ष यह दुविधा उत्पन्न हो जाती है की आखिर कोरोना को कैसे पहचाने। कुछ लोग सर्दी
के साथ बुखार की चपेट में आने से घबराये हुए है। कोरोना वायरस की सबसे खतरनाक बात ये है कि इसके
लक्षण आम सर्दी-जुकाम या कॉमन एलर्जी से इतने मिलते-जुलते है। विशेषज्ञों के अनुसार कॉमन एलर्जी में
इंसान को खांसी जुकाम जरूर होते हैं, लेकिन उसे बुखार नहीं चढ़ता जबकि कोरोना पीड़ित में तेज बुखार की
शिकायत देखी गई है। दूसरा, कोरोना वायरस के रोगियों में बदन दर्द और जोड़ों में दर्द की समस्या देखी गई
है. जबकि आम सर्दी-जुकाम में बदन टूटा-टूटा रहता है, लेकिन उसमें तेज दर्द की शिकायत नहीं होती है।
कोरोना संकट में प्रकृति और ऋषि मुनियों द्वारा अपनायी जाने वाली देशी चिकित्सा ने हमारा ध्यान खिंचा
है। सर्दी, जुकाम, खांसी, गले में खराश आम बात है। हल्दी वाला दूध हो या नमक मिले गरम पानी के गरारे
कोरोना के जुकाम और गले दर्द में दोनों ही कारगर इलाज है। अदरक को पानी में उबालकर और फिर शहद
के साथ खाया जाए तो यह कफ, गले में खराश और गला खराब होने की दिक्कत से छुटकारा दिला सकती
है। अदरक को शहद के साथ खाने से गले में होने वाली सूजन और जलन में भी राहत मिलती है। इसी भांति
अजवायन, लोंग, काली मिर्च, तुलसी गिलोय, मलेठीयुक्त पान, शहद, दालचीनी आदि के नुस्खे भी
संजीवनी साबित हुए है। उल्टा लेटकर ऑक्सीजन प्राप्त करने के नुस्खे को एलोपेथी की मान्यता मिली है।
इन नुस्खों का उपयोग कर लाखो लोग कोरोना के प्रारंभिक लक्षणों से बाहर निकलने में कामयाब हुए है।
यही नहीं इनमें से ज्यादातर नुस्खों का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता।
सचमुच प्रकृति, पर्यावरण और आयुर्वेद का अद्भुत संगम है। मानव जीवन के लिए तीनों कारकों के
एकाकार होने की आज के समय महती जरूरत है। इससे प्रकृति को जहाँ साफ सुथरा रखा जा सकता है वहां
पर्यावरण भी हमारे अनुकूल होगा जिससे आयुर्वेद को भी संरक्षित रखा जा सकेगा। जो मनुष्य प्रकृति के
जितना अधिक अनुकूल है। स्वास्थ्य की दृष्टि से वह व्यक्ति उतना ही अधिक निरापद एवं व्याधियों के
आक्रमण से दूर होगा। मौजूदा वक्त में विभिन्न देशों के छात्र आयुर्वेद और पारंपरिक दवाओं का अध्ययन
करने के लिए भारत आ रहे हैं। यह दुनिया भर में लोक कल्याण के बारे में सोचने का सबसे माकूल वक्त है।
आयुर्वेद पूरे शरीर को सुरक्षित रखता है। आयुर्वेद भारत की संस्कृति और प्रकृति से जुड़ा हुआ है। आयुर्वेद
और योग भारत द्वारा पूरे मानव समाज और पृथ्वी को दिया अनमोल उपहार है।
- बाल मुकुन्द ओझा