जायकेदार मसालों के पीछे मिलावट का कड़वा सच
बाल मुकुन्द ओझा
त्योहार आते ही मनमाफिक मुनाफा कमाने के चक्कर में धंधेबाज़ सेहत से खिलवाड़ करने से बाज़ नहीं आते। दरअसल खाने-पीने की चीजों में हो रही मिलावट से अब मसाले भी अछूते नहीं रहे हैं। मसालों में मिलावट का मामला बढ़ता जा रहा है। मिलावटखोर घटिया मसाले बेचकर मुनाफा कमाते हैं, जिससे कैंसर, पेट दर्द और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ता है। सब्जियों को स्वादिष्ट बनाने के लिए ब्रांडेड से लेकर खुदरा बिकने वाले मसाले में धड़ल्ले से मिलावट का खेल चल रहा है। आम आदमी महंगाई के साथ खाद्य पदार्थो में हो रही मिलावट खोरी से खासा परेशान रहता है। हमारे बीच यह धारणा पुख्ता बनती जा रही है कि बाजार में मिलने वाली हर चीज में कुछ न कुछ मिलावट जरूर है। लोगों की यह चिंता बेबुनियाद नहीं है। आज मिलावट का कहर सबसे ज्यादा हमारी रोजमर्रा की जरूरत की चीजों पर ही पड़ रहा है। खाने पीने के पदार्थो में मिलावट कोई नयी समस्या नहीं है। मिलावट और खराब उत्पाद बेचे जाने की खबरें आम हो चुकी हैं। साल-दर-साल इसका दायरा व्यापक होता जा रहा है। मसालों में मिलावट की खबर से हर देशवासी हैरान और परेशान है। सबसे ज्यादा मिलावट मसालों में हो रही है। काली मिर्च में पपीते का बीज, लाल मिर्च में रंग वाला पाउडर और ईंट पीस कर मिला देते हैं। धनिया पाउडर में तरह तरह की मिलावट करते हैं। हल्दी में पीला रंग मिला देते हैं और जीरा में झाड़ू वाला जीरा मिला देते हैं। गलियों में फेरी लगाने वाले सस्ता और मिलावटी मसाला सरेआम बेच रहे है। सस्ते के धोखे में हमारी रसोई में मिलावटी मसाले पहुंचते देर नहीं लगती। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक काली मिर्च में पपीते के बीजों को सुखाकर मिलाया जाता है. अगर इसकी जांच आप आसानी से कर सकते हैं। काली मिर्च को कूट लें अगर इसे हाथ में लें। अगर हाथ में तेल नजर आता है तो यह असली है। इसी भांति दालचीनी के नाम पर चाइनीज कासिया बेचा जाता है। दालचीनी की खुशबू काफी तेज होती है। दालचीनी पाउडर पर आयोडीन की बूंदे डाले अगर वह पाउडर नीला हो जाए तो वह मिलावटी है। हल्दी में मिलावट की जाती है तो कहीं लाल मिर्च और काली मिर्च मिलावटी बेची जाती है। इसी तरह मिलावटी जीरा भी बाजार में धड़ल्ले से बिक रहा है। FSSAI ने जीरा की मिलावट जानने के लिए हथेली पर किए जाने वाले टेस्ट के बारे में बताया है। इस टेस्ट को करने के लिए जीरा को हथेली पर रखकर मलें। अगर हथेली पर कालिख नजर आने लगे या फिर भूसा छूटकर हथेली पर चिपक जाए तो यह जीरा मिलावटी है। अगर जीरा को रगड़ने पर हथेली एकदम साफ नजर आए तो इसका मतलब है कि जीरा में किसी तरह की मिलावट नहीं की गई है।
मिलावट का अर्थ है महँगी चीजों में सस्ती चीज का मिलावट। मुनाफाखोरी करने वाले लोग रातोंरात धनवान बनने का सपना देखते हैं। अपना यह सपना साकार करने के लिए वे बिना सोचे-समझे मिलावट का सहारा लेते हैं। सस्ती चीजों का मिश्रण कर सामान को मिलावटी कर महंगे दामों में बेचकर लोगों को न केवल धोखा दिया जाता है, बल्कि हमारे स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ भी किया जाता है। मिलावटी खाद्य पदार्थों के सेवन से प्रतिवर्ष हजारों लोग विभिन्न बीमारियों का शिकार होकर जीवन से हाथ धो बैठते हैं। मिलावट का धंधा हर तरफ देखने को मिल रहा है। दूध बेचने और मिलावट करने वाले से लेकर बहुराष्ट्रीय कंपनियों तक ने मिलावट के बाजार पर अपना कब्जा कर लिया है।
आज मिलावट का कहर सबसे ज्यादा हमारी रोजमर्रा की जरूरत की चीजों पर ही पड़ रहा है । संपूर्ण देश में मिलावटी खाद्य-पदार्थों की भरमार हो गई है। आजकल नकली दूध, नकली घी, नकली तेल, नकली चायपत्ती आदि सब कुछ धड़ल्ले से बिक रहा है। सच तो यह है अधिक मुनाफा कमाने के लालच में नामी कंपनियों से लेकर खोमचेवालों तक ने उपभोक्ताओं के हितों को ताख पर रख दिया है। अगर कोई इन्हें खाकर बीमार पड़ जाता है तो हालत और भी खराब है, क्योंकि जीवनरक्षक दवाइयाँ भी नकली ही बिक रही हैं ।
सामान्य तौर पर एक परिवार अपनी आमदनी का लगभग 60 फीसदी भाग खाद्य पदार्थों पर खर्च करता है। खाद्य अपमिश्रण से अंधापन, लकवा तथा टयूमर जैसी खतरनाक बीमारियाँ हो सकती हैं। सामान्यत रोजमर्रा जिन्दगी में उपभोग करने वाले खाद्य पदार्थों जैसे दूध, छाछ, शहद, हल्दी, मिर्च, पाउडर, धनिया, घीं, खाद्य तेल, चाय-कॉफी, मसाले, मावा, आटा आदि में मिलावट की सम्भावना अधिक है। मिलावट एक संगीन अपराध है। मिलावट पर काबू नहीं पाया गया तो यह ऐसा रोग बनता जा रहा कि समाज को ही निगल जाएगा। मिलावट के आतंक को रोकने के लिए सरकार को जन भागीदारी से सख्त कदम उठाने होंगे।