आयोग किसानों और सरकार के बीच की कड़ी : श्री खण्डेला
जैविक एवं कम पानी की खेती की ओर बढने की आवश्यकताः जिला कलक्टर
किसान आयोग ने किया कृषकों से संवाद
किसानों ने खुल कर रखी बात, समाधान का दिया आश्वासन
पाली। राजस्थान किसान आयोग के अध्यक्ष श्री महादेवसिंह खण्डेला ने कहा कि किसान आयोग किसानों और सरकार के बीच की कड़ी है। आयोग ने पाली सहित अब तक 21 जिलों में किसानों से संवाद किया है। कृषक संवादों के माध्यम से जो समस्याएं सामने आ रही है, आयोग उन्हें सरकार के समक्ष रखकर उनका समाधान कराने के लिए प्रयासरत है।
श्री खण्डेला मंगलवार को पाली कलक्ट्रेट परिसर स्थित जिला परिषद सभागार में कृषक संवाद कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत किसानों के प्रति पूर्णतया संवेदनशील हैं। उनका मानना है कि किसान खुशहाल तो देश खुशहाल। किसान का खेत हरा होगा तो सभी का पेट भरा होगा और खेत सुखा होगा तो हर कोई भूखा होगा। इसलिए सरकार लगातार किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाकर क्रियान्वित कर रही है। किसानों की हर छोटी से छोटी समस्या को भी गंभीरता से लिया जाता है।
जिला कलक्टर श्री नमित मेहता ने आयोग अध्यक्ष सहित सदस्यगणों का स्वागत करते हुए कहा कि कृषक संवाद जैसे आयोग शासन और किसानों के मध्य सेतु का कार्य करेगा तथा किसानों की बात सरकार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। उन्होंने संवाद के दौरान सामने आई विभिन्न समस्याओं पर बिन्दूवार चर्चा करते हुए कहा कि कृषक भूमि का ट्रस्टी है उसे जमीन पूर्वजों से उपजाउ हालत में मिली है। इसलिए उसकी नैतिक जिम्मेदारी है कि आने वाली पीढी को वह भूमि को उसी प्रकार उपजाउ स्थिति में सौंपे। इसके लिए जरूरी है कि रसायनों और कीटनाशकों का इस्तेमाल क्रमिक रूप से कम करते हुए जैविक खेती की ओर कदम बढाए जाएं। उन्होंने कम पानी की आवश्यकता वाली खेती पर भी फोकस करते हुए कृषि विभाग के अधिकारियों को ड्रीप संयंत्र, वाटर हार्वेस्टिंग जैसे उपायों को बढावा देने की बात कही।
श्री मेहता ने जालौर में अमरूद की खेती का उदाहरण देते हुए कहा कि आसपास के जिलों में अच्छा काम हो रहा है, किसानों को एक्सपोजर विजिट कराई जानी चाहिए। उन्होंने पाली कलक्टर आवास में अमरूद और नीम की अच्छी पैदावार होने की जानकारी देते हुए कहा कि जब कलक्टर आवास में हो सकती है तो जिले के किसानों को भी इसके लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। उन्होंने फूड प्रोसेसिंग एवं मार्केटिंग पर भी ध्यान देने की आवश्यकता जताते हुए कृषि प्रसंस्करण योजना को अधिक से अधिक काश्तकारों तक पहुंचाने का आह्वान किया।
कृषक संवाद के दौरान आवारा पशुओं की समस्या सामने आने पर जिला कलक्टर ने राज्य सरकार की ओर से प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक करोड़ की लागत से गौ शाला संचालन की योजना की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इसमें 90 लाख रूपए सरकार की ओर से अनुदान रहेगा। ग्राम पंचायत अथवा कोई भी एनजीओ इसका संचालन कर सकेगा। उन्होंने बताया कि पशुपालन विभाग की ओर से जल्द ही इस योजना को लेकर विज्ञप्ति जारी की जाएगी। उन्होंने कृषकों को चिरंजीवी स्वास्थ्य एवं दुर्घटना बीमा में पंजीयन कराने के लिए भी प्रेरित किया। नदी आदि में प्रदूषण की समस्या पर उन्होंने सरकार और प्रशासन की ओर से किए जा रहे प्रयासों से अवगत कराया।
कार्यक्रम में आयोग सदस्य श्री नारायणलाल बेड़ा, श्रीमती सोहन चौधरी भी मौजूद रही। कृषि विश्वविद्यालय कोटा के पूर्व उप कुलपति श्री जी.एल. केशवा, कृषि महाविद्यालय नौगामा अलवर के पूर्व डीन श्री ओ.पी.खेदड़ ने बतौर विषय विशेषज्ञ किसानों को मार्गदर्शन दिया। कार्यक्रम में राजस्थान राज्य बीज निगम के सदस्य श्री भूराराम सीरवी, समाजसेवी श्री महावीरसिंह सुकरलाई ने भी विचार व्यक्त किए। प्रारंभ में संयुक्त निदेशक कृषि श्री ओमप्रकाश शर्मा, उपनिदेशक श्री मनोज अग्रवाल, उपनिदेशक (आत्मा परियोजना) श्री प्रदीप छाजेड़ सहित अन्य ने स्वागत किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रगतिशील काश्तकार, विभागीय अधिकारीगण-कर्मचारीगण मौजूद रहे।
सोजत की मेहंदी को मिले फसल जिन्स का दर्जा
कृषक संवाद के दौरान जिले भर से आए काश्तकारों ने अपनी विभिन्न समस्याएं रखी। इसमें सोजत क्षेत्र के ताराराम सैनी ने सोजत की मेहंदी को फसल जिन्स का दर्जा नहीं होने से किसी भी प्रकार की फसली योजना का लाभ काश्तकार को नहीं मिलने की बात कही। इस पर जिला कलक्टर श्री मेहता ने विभागीय अधिकारियों को इसके लिए आवश्यक कार्यवाही कर सरकार को प्रेषित करने की बात कही। किसानों ने माल तुलाई समय पर शुरू होने, जंगली सुअर और नीलगाय की समस्या से निजात दिलाने, समय पर खाद-बीज उपलब्ध कराए जाने, फसल बीमा का भुगतान समय पर कराने जैसे विभिन्न बिन्दू रखे। इस पर आयोग अध्यक्ष ने सरकार तक किसानों की बात पहुंचाने का आश्वासन दिया।
इन काश्तकारों ने रखी बात
कृषक संवाद में सोनाई मांझी के श्री घीसाराम, हेमावास के श्री मांगीलाल माली, सोजत के श्री ताराराम सैनी, कोसेलाव के श्री हरीशकुमार, सेमली के श्री नवाराम देवासी, हेमावास श्री देवीसिंह भाटी, झितड़ा ढाणी के श्री रमेशकुमार, उंदरा के श्री नारायणलाल मेघवाल, श्री पीराराम पटेल, पिपलिया ढाणी के श्री भूराराम चौधरी, बतरों की ढाणी के श्री गेबाराम पटेल, बुसी के श्री दरगाराम, मारवाड़ जंक्शन के श्री वली खां, श्री हितेंद्र टांक, भीण्डर के श्री मंगलाराम आदि ने अपनी बात रखी।