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डाकिया डाक लेकर नहीं आता

डाकिया डाक लेकर नहीं आता

हम ऐसे दौर में विश्व डाक दिवस मना रहे है जब आज का युवा डाकिये को नहीं जानता। उसे नहीं मालूम की
कभी डाकिया पैदल चलकर घर घर डाक बांटता था। आज युवा ने पैदल चलना नहीं सीखा इसीलिए उसे यह
पता नहीं है की पैदल चलकर भी कोई सरकारी काम होता था। युवा ने कभी पोस्टकार्ड नहीं देखा। मंनिआर्डर
का भी उसे मालूम नहीं है। वह पैसे या सन्देश का आदान प्रदान मोबाइल से आधुनिक माध्यम से करता है।
फिर भी हम अपनी पुरानी व्यवस्था को धरोहर के रूप में हर साल याद करते है। विश्व डाक दिवस हर साल 9
अक्टूबर को मनाया जाता है। इस दिवस की शुरुआत 1969 में हुई थी उसी साल पहला विश्व डाक दिवस
मनाया गया था। तभी से हर साल इसे 9 अक्टूबर के दिन मनाया जाता है। उसी तरह से भारत में भी राष्ट्रीय
स्तर पर डाक दिवस मनाया जाता है। भारत में दिवस से अधिक इसे स्प्ताह से के तौर पर मनाया जाता है।
इस वर्ष की थीम विश्वास के लिए एक साथ: एक सुरक्षित और जुड़े भविष्य के लिए सहयोग रखी गई है। अब
यह दिवस रश्मि हो गया है क्योंकि न तो डाकिया घर घर आता है और न ही डाक के दर्शन होते है। अब कहीं
भी डाकिया डाक बांटते दिखाई नहीं देता। वर्षों पुरानी घर घर डाक बांटने की परम्पराएं अब ध्वस्त हो गई है।
हमने भी खुद को ज़माने के अनुरूप डाल लिया है। जब इंटरनेट सुविधा का विस्तार हुआ है हम ने डाक
व्यवस्था से तौबा करली है। सारे काम इंटरनेट से जुडी सुविधाओं के माध्यम से हो रहे है। फोन, ईमेल से
लेकर सोशल मीडिया के माध्यम से संदेशों का आदान-प्रदान किया जाता है। व्हाट्सएप से घर बैठे बात हो
जाती है तो डाक की जरुरत कहाँ रह गई।
डाक सेवाओं की हमारी पुरानी परम्परा है। आज के युवा वर्ग को छोड़ दे तो दुनिया भर में कोई ऐसा व्यक्ति
नहीं होगा, जिसका कभी डाक सेवाओं से पाला न पड़ा हो। यह अचरज की बात है कि एक देश में पोस्ट किया
हुआ पत्र दुनिया के दूसरे कोनों में आराम से पहुँच जाता है। डाक सेवाओं के संगठन रूप में उद्भव के साथ ही
इस बात की जरूरत महसूस की गई कि दुनिया भर में एक ऐसा संगठन होना चाहिए, जो यह सुनिश्चित करे
कि सभी देशों के मध्य पत्रों का आवागमन सहज रूप में हो सके और आवश्यकतानुसार इसके लिए नियम-
कानून बनाये जा सकें। इसी क्रम में पूरे सप्ताह राष्ट्रीय डाक सप्ताह (9-14 अक्टूबर) का आयोजन चलता
है।
भारतीय डाक सेवा ने 1 अक्टूबर 2023 को अपने सफर के 173 वर्ष पूरे कर लिए। डाक व्यवस्था शुरू होते ही
हर शहर और गांव में पोस्ट ऑफिस बनाए गए। बाद में तो इन पोस्ट ऑफिसों में चिट्ठियों को संभालने के
साथ-साथ लोगों के पैसों को भी जमा करने का काम किया जानेलगा। कभी-कभी यह बैंक का काम भी करता

हैं। अब तो सरकार भी इसे बैंक के रूप में स्थापित करने की योजना बना रही है। चिट्ठियों का प्रचलन कम
होने के साथ इनके कामों में भी कमी आई है ऐसे में इन्हें अन्य कामों में भी शामिल किया जा रहा है।
आजकल भारतीय डाक विभाग रजिस्ट्री पोस्ट,स्पीड पोस्ट,बिजनेस पोस्ट और ग्रीटिंग पोस्ट से चिट्ठियों
को भेजने का काम करता है।
कुछ वर्ष पहले इसकी सबसे महत्वपूर्ण सेवा डाकतार सेवा को पूरी तरह से बंद कर दिया गया। भारत की
डाक सेवा में एक खास बात यह है कि यहां एक खास तरह का पिन कोड होता है। यह पिन कोड 6 नंबरों का
होता है। पिन कोड पोस्ट ऑफिस का नंबर होता है। इसकी मदद से ही हम तक चिट्ठियां पहुंच पाती हैं। यह
हम सबके लिए यह गर्व करने वाली बात है कि भारत की डाक सेवा दुनिया की सबसे बड़ी डाक सेवा है। साथ
ही दुनिया में सबसे ऊंचाई पर बना पोस्ट ऑफिस भी भारत में ही है जो हिमाचल प्रदेश के हिक्किम में स्थित
है। कबूतर से लेकर कम्प्यूटर तक डाक सेवाओं ने एक लम्बा सफर तय किया है। वर्तमान में सूचना एवं
संचार क्रान्ति के चलते डाक व्यवस्था अवरुद्ध हुई है। जबसे निजी क्षेत्र में कोरियर सेवा का प्रारंभ
हुआ तब से डाक विभाग की सेवाएं मंद हुई है। इसके बाद इंटरनेट के आने के बाद सुचना
आदान प्रदान की सेवाएं द्रुत गति से परवान चढ़ी फलस्वरूप डाक विभाग का कार्य धीमी गति
का बुलेटिन हो गया।

बाल मुकुन्द ओझा

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