Dark Mode
मनरेगा को कमजोर कर गांवों की शक्ति छीनी जा रही है: सिद्धारमैया

मनरेगा को कमजोर कर गांवों की शक्ति छीनी जा रही है: सिद्धारमैया

बेंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने केंद्र सरकार पर गांवों की शक्ति छीनने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नष्ट करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। उन्होंने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को समाप्त कर नया कानून लागू करना संघीय ढांचे और संविधान की भावना के खिलाफ बताया है। बेंगलुरु के कृष्णा स्थित गृह कार्यालय में मनरेगा को रद्द किए जाने के मुद्दे पर आयोजित एक प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों से परामर्श किए बिना नया कानून लागू कर तानाशाही रवैया अपनाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम विकेंद्रीकरण की अवधारणा को कमजोर करता है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने रोजगार का अधिकार, सूचना का अधिकार और शिक्षा का अधिकार जैसे जनहितैषी कानून लागू किए थे। इसके विपरीत, मौजूदा केंद्र सरकार ने मनरेगा अधिनियम को वापस लेकर 'विकसित भारत ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका मिशन गारंटी' (वीबी जी राम जी ) के नाम से नया कानून लागू किया है, जो श्रमिकों के हितों के विरुद्ध है। उन्होंने बताया कि देश में लगभग 12.16 करोड़ मनरेगा श्रमिक हैं, जिनमें 6.21 करोड़ महिलाएं हैं। इनमें 17 प्रतिशत अनुसूचित जाति और 11 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति से आते हैं। कर्नाटक में ही 71.18 लाख श्रमिक मनरेगा से जुड़े हैं, जिनमें 36.75 लाख महिलाएं (51.6%) शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुराने अधिनियम के तहत न्यूनतम 100 दिनों का रोजगार, स्थानीय स्तर पर काम, मुद्रास्फीति के अनुरूप वेतन और पूर्ण केंद्रीय सब्सिडी का प्रावधान था, लेकिन नए कानून में रोजगार को केवल अधिसूचित क्षेत्रों तक सीमित कर दिया गया है और कृषि मौसम में काम की अवधि 60 दिनों तक घटा दी गई है। सिद्धारमैया ने कहा कि केंद्र–राज्य सब्सिडी अनुपात को बदलकर 60:40 कर दिया गया है, जिससे राज्यों पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 258 और 280 के खिलाफ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायतों की शक्तियों का हनन संघीय व्यवस्था और संविधान दोनों के विरुद्ध है। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने 30 दिसंबर को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर नए कानून को लागू न करने का आग्रह किया था। साथ ही केंद्र सरकार से मनरेगा अधिनियम को पुनः लागू करने और महिलाओं, दलितों तथा गरीबों के रोजगार अधिकारों को बहाल करने की मांग की। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने चेतावनी दी कि नए अधिनियम से बेरोजगारी बढ़ेगी, महिलाओं की कार्य भागीदारी घटेगी और दलितों व आदिवासियों के जीवन पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इससे पंचायतें केवल कार्यान्वयन एजेंसियां बनकर रह जाएंगी और ठेकेदारों को अधिक लाभ मिलेगा, जिससे ग्रामीण जीवन और भी असुरक्षित हो जाएगा। इस प्रेस वार्ता में राज्य के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, मंत्री प्रियंक खड़गे, के.एच. मुनियप्पा, चालुवरायस्वामी, लक्ष्मी हेब्बालकर, शरण प्रकाश पाटिल और राजनीतिक सचिव नसीर अहमद भी उपस्थित थे।

Comment / Reply From

You May Also Like

Newsletter

Subscribe to our mailing list to get the new updates!