बच्चों में बढ़ रहा है डायबिटीज का खतरा
एक ताजा वैश्विक रिपोर्ट की माने तो डायबिटीज ने अपना दायरा बढाकर अब बच्चों को भी अपनी चपेट में
लेना शुरू कर दिया है। हमारी बदलती खानपान की शैली और लाइफ स्टाइल ने बच्चे से बुजुर्ग तक को
डायबिटीज नामक बीमारी ने जकड रखा है। दुनियाभर में 2021 तक 12.11 लाख से ज्यादा बच्चे और
किशोर टाइप 1 डायबिटीज से जूझ रहे थे। इनमें से आधे से ज्यादा की उम्र 15 साल से कम है। इनमें भी
सबसे ज्यादा संख्या भारतीयों की है। भारत में 2.29 लाख से ज्यादा बच्चे और किशोरों को टाइप 1
डायबिटीज है। ब्रिटेन में हुई स्टडी में उन पैरेंट्स को सावधान किया गया है जिनके बच्चे स्क्रीन
के आगे (टीवी, कंप्यूटर या स्मार्टफोन) बहुत ज्यादा समय बिताते हैं। इस स्टडी के अनुसार
अगर बच्चे या टीनएजर दिनभर में 3 घंटे से ज्यादा समय टीवी, कम्प्यूटर या स्मार्टफोन को
देते हैं, तो उनमें डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।
आज के दौर की सबसे बड़ी समस्याओं में से डायबिटीज एक है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ समय में
इस बीमारी ने तेजी से बच्चों को भी अपना शिकार बनाना शुरू कर दिया है। इसके पीछे कई कारण हो सकते
हैं लेकिन जो कारण प्रमुखता से सामने आया है वह है खराब लाइफस्टाइल। बच्चों के खानपान की आदतें
बच्चों में डायबिटीज का कारण बन रही है। बच्चा डायबिटीज का शिकार हो जाता है तो उसे आगे चलकर
दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है, जिसमें उसकी किडनी, दिल और आंखें भी
शामिल हैं। अगर बच्चे को मिनट-मिनट में प्यास लगती है, भूख बढ जाती है या फिर बार-बार पेशाब करने
की इच्छा होती है तो इसे नार्मल ना समझे। मधुमेह यानी की डायबिटीज की बीमारी इतनी ज्यादा घातक
हो सकता है कि इससे बच्चों की आंखे और किडनियों पर बुरा असर पड सकता है। डायबिटीज का असर
बच्चों पर भी पड़ रहा है। इसका कारण उनमें मोटापा बढ़ना है। यह स्थिति शरीर को इंसुलिन का उपयोग
करने की अनुमति नहीं देती है। मोटापे, पारिवारिक इतिहास, निष्क्रियता आदि के साथ बच्चों में टाइप II
मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है। मधुमेह कई जटिलताओं के साथ भी आता है। एक अध्ययन रिपोर्ट के के
मुताबिक 20 साल या उससे कम उम्र के बच्चों में डायबिटीज का खतरा 15 साल के बच्चों की तुलना में 45
फीसदी ज्यादा होता है जबकि टाइप-2 डायबिटीज के मामले में ये खतरा 95 फीसदी तक बढ़ जाता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि इस स्थिति के पीछे कुछ कारण जिम्मेदार हैं जैसे खराब जीवनशैली, अनहेल्दी डाइट,
शारीरिक अभ्यास में कमी और मोटापा।
डायबिटीज या मधुमेह केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं है। वजन बढ़ने व सक्रियता में कमी आने से बच्चों में
मधुमेह का रोग बढ़ रहा हैं। इस बीमारी के लक्षण बताते हुए विशेषज्ञ कहते है यदि कोई बच्चा बहुत ज्यादा
पानी पीता है, बार-बार और जल्दी-जल्दी पेशाब जाता है, उसका वजन बढ़ रहा है या उसे बहुत जल्दी भूख
लगती है तो यह चिंता के लक्षण हैं। यदि बच्चे तीन घंटे या इससे ज्यादा रोज टीवी देखते हैं या कंप्यूटर, गेम
कंसोल्स, टैबलेट या स्मार्टफोन पर समय बिता रहे हैं, तो यह उनकी सेहत के लिए अच्छी बात नहीं है। एक
रिसर्च के मुताबिक, इस तरह घंटों टीवी स्क्रीन के सामने बिताने से उनमें डायबिटीज पनप सकता है।
अभिभावकों को यह देखने की जरूरत है कि बच्चों का वजन तो नहीं बढ़ रहा। 10 साल की उम्र के बाद उन्हें
बच्चों की नियमित चिकित्सा जांच करानी चाहिए।
सबसे बड़ा संकट तो यह है कामकाजी अभिभावक बच्चों को चिप्स, नूडल्स, अन्य फास्ट फूड देंगे तो फिर
डायबिटीज जैसी अन्य बीमारियों के प्रभाव से मुक्ति दिलाना संभव नहीं होगा। अमेरिका में हुए एक रिसर्च
के अनुसार डायबिटीज के सात नए मामलों में एक मामले के लिए आहार भी जिम्मेदार है। खान पान की
वजह से इस बीमारी के पनपने की आशंका बढ़ जाती है। आहार की आदतों और सुस्त जीवनशैली को इस
बीमारी का मुख्य कारक माना जाता है। आंकड़ों की बात करें तो दुनियाभर में फिलहाल 42 करोड़ मधुमेह के
रोगी हैं। वर्तमान में भारत में ही 3 करोड़ से ज्यादा डायबिटीज के शिकार लोग हैं। संयुक्त राष्ट्र संगठन
यूनिसेफ और विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार डायबिटीज के शुरुआती लक्षणों का मूल कारण बच्चों को
समुचित और संतुलित आहार न देना है।
-बाल मुकुन्द ओझा