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सियासत के कट्टर ईमानदार और कट्टर बेईमान

सियासत के कट्टर ईमानदार और कट्टर बेईमान

देश की राजधानी दिल्ली में कट्टर ईमानदार और बेईमान पर सियासत अपने पूरे उफान पर है।
इस सियासी ड्रामें का अंत सुखद होगा या दुखद हालफिलहाल यह कोई कहने की स्थिति में नहीं
है। केजरीवाल जन आंदोलन की उपज है और आंदोलन से निकली पार्टी के मुखिया है। दिल्ली
की जनता ने भारी बहुमत से उन्हें सिंहासन पर बैठाया है। इसे भी मान लेने में कोई गुरेज नहीं
है कि केजरीवाल को राज चलाना नहीं आता। यही कारण है उसके निकटस्थ साथी एक एक कर
उसका साथ छोड़ गए। अन्ना आंदोलन के दौरान केजरीवाल कांग्रेस के भ्रष्टाचार को भारी जोर
शोर से उठाते थे और यह कहते नहीं थकते थे कि सोनिया गांधी सहित कांग्रेस के नेताओं ने
देश को लूटा है, इसलिए उनकी जगह जेल में होनी चाहिए। मगर शासन में आते ही केजरीवाल
प्रधान मंत्री मोदी पर आरोप लगाने से नहीं चूके और कांग्रेस से हाथ मिलाने में कोई गुरेज नहीं
किया। भाजपा भी विधानसभा चुनाव में अपनी हार को नहीं पचा पारही है और केजरीवाल को
बक्सने के मूढ़ में नहीं है। मगर इस बार केजरीवाल और उसकी पार्टी को भ्रष्टाचार के मामले
का सामना करना पड़ रहा है और उससे बचने के लिए तरह तरह के उपाय सोचे जा रहे है।
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगामी लोकसभा चुनाव से पूर्व भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्णायक जंग छेड़
दी है। मोदी के निशाने पर वे सभी नेता है जो किसी न किसी घोटाले में फंसे है। हालाँकि विपक्ष का आरोप है
की भाजपा में शामिल होने वाले कथित भ्रष्टाचारियों को बक्श दिया गया है। इस समय केंद्रीय जाँच
एजेंसियों के निशाने पर देश की राजधानी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और झारखण्ड के
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मुख्यत शामिल है जिन पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप है। सियासी दंगल में
केजरीवाल को कट्टर ईमानदार और कट्टर बेईमान की संज्ञा से विभूषित किया जा रहा है। आम आदमी
पार्टी जहाँ अपने नेता को कट्टर ईमानदार बता रही है वहां भाजपा कट्टर बेईमान बता रही है। इस समय
दोनों मुख्यमंत्रियों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। ईडी दोनों मुख्यमंत्रियों को लगातार समन
भेजकर अपना शिकंजा कस रही है। दोनों ही मुख्यमंत्री अपनी गिरफ़्तारी की आशंका व्यक्त कर जांच
एजेंसी के सामने पेश नहीं हो रहे है। देश में लोकसभा चुनाव चार पांच महीने बाद होने वाले है। चुनाव से पूर्व
दो मुख्यमंत्री और कई बड़े विपक्षी नेता ईडी और अन्य जाँच एजेंसियों के निशाने पर हैं। इसे लेकर सियासी
हलचल उफान पर है। ईडी लगातार इन नेताओं से पूछताछ के लिए समन भेज रही है। केजरीवाल का आरोप
है उनके नेताओं को बिना किसी सबूत के जेल में बंद कर रखा है और उन्हें भी आगामी चुनाव में अपनी हार

के डर से जेल में बंद करना चाहती है। समन ईडी नहीं भाजपा भेज रही है। भाजपा कह रही है आप नेता
निर्दोष है तो अदालत उन्हें छोड़ क्यों नहीं देती।शराब घोटाला मामले में आम आदमी पार्टी के दो बड़े
नेता मनीष सिसोदिया और संजय सिंह पहले ही जेल में हैं।
झारखण्ड के मुख्यमंत्री पर भी खनन घोटाले का गंभीर आरोप है और वे भी सात बार समन भेजने के बाद भी
ईडी के सामने उपस्थित नहीं हो रहे है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की. कथित अवैध खनन और मनी लॉन्ड्रिंग
के जुड़े मामले में ईडी हमेंत सोरेन के करीबियों के ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है। इस कारण
झारखंड की राजनीति में इस वक्त काफी उठापठक चल रही है। दोनों ही नेता समन को राजनीति से प्रेरित
बता रहे हैं और केंद्र सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि लोकसभा चुनाव की तैयारी से पहले गिरफ्तार करने
की साजिश की जा रही है ताकि मुख्यमंत्री चुनाव प्रचार न कर सकें। इसके अलावा राहुल गांधी, सोनिया
गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, तेजस्वी यादव, संजय राउत, अभिषेक बनर्जी, जंयत पाटिल, राघव चड्ढा, पी
चिदंबरम, डीके शिवकुमार आदि पर भी ईडी की जाँच की तलवार लटक रही है। गौरतलब है विपक्ष ईडी पर
पक्षपात करने का आरोप लगते रहते है। विपक्षी नेताओं ने ईडी को बीजेपी की कठपुतली कहा है। इन
आरोपों पर स्वतंत्र समीक्षक कहते हैं कि अगर एजेंसी कार्रवाई करती है तो इसका मतलब शुरुआती जांच के
आधार पर उनके पास कुछ न कुछ सबूत है। अगर किसी को भी ईडी की कार्रवाई गलत लगती है तो अदालत
जाकर अपनी बात रखने का विकल्प है। वहां अपना पक्ष रख सकते हैं। विपक्ष कह रहा है सत्तारूढ़ पार्टी
देश की संवैधानिक संस्थाओं को नष्ट भ्रष्ट कर रही है तो सत्तारूढ़ पार्टी का कहना है जिन लोगों
ने देश को लूटा है वे सारे अपनी जान बचाने के लिए एक होने का नाटक कर रहे है ताकि उनके
खिलाफ कोई स्वतंत्र जाँच न हो।

-बाल मुकुन्द ओझा

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