जीवन में पाप और पुण्य का ही प्रभाव रहता है
रतनगढ़। मनुष्य जीवन में पाप और पुण्य का ही प्रभाव रहता है । मनुष्य जन्म से ब्रह्मलोक तक पाप पुण्य ही साथ चलते हैं। आपके आचरण से किसी को सुख मिलता है तो वह पुण्य है, दुख: मिलता है तो वह पाप है। यह धर्मोपदेश चल रही भागवत कथा के दौरान प्रात: प्रार्थना सभा में संत प्रहलाद महाराज ने दिया । उन्होंने गुप्त दान की महिमा पर बोलते हुए कहा कि भगवान मनुष्य को छुपाकर देता है । मनुष्य पेपर में छपाकर देता है , फिर भी मन नहीं भरता है तो संगमरमर पर लिखा कर देता है। उन्होंने गौ माता पर बोलते हुए बताया कि जीवो का पालन करना अच्छी बात है पर इनमें गौ पालन सर्वश्रेष्ठ है। गौ माता के शरीर में तैतीस कोटी देवता है। गौ दूध क्रिया का फल नहीं, वात्सल्य है। इसके दूध में बड़ी विलक्षणता है। भागवत कथा शुरू होने से पूर्व कथा आयोजक अंबिकाप्रसाद हरित अनुराग हरित ने व्यास पीठ पर रखी भागवत जी के पूजा अर्चना की। कथा में दीपक नागौरी द्वारा भगवान श्रीकृष्ण की बांसुरी पर राधा, रुकमणी विवाह की संजीव झांकियां भी सजाई गई। भागवत कथा में राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष राजेंद्रसिंह राठौड़, विधायक अभिनेश महर्षी, शिवभगवान कम्मा, भागीरथसिंह राठौड, हरिप्रसाद दायमा, अरविंद इंदौरिया, रामावतार बूबना, एडवोकेट कमलकांत शर्मा, देवेंद्र चोटिया, आशुतोष पुरोहित का माला दुपट्टा पहनाकर भगवत चित्र देकर अभिनंदन किया गया।