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अस्पताल में पनपते चोर साम्राज्य

अस्पताल में पनपते चोर साम्राज्य

पिलानी . बिरला सार्वजनिक अस्पताल में चोर घुसे पड़े हैं. चोरों का बोलबाला है यह लुटने की कगार पर है एक सार्वजनिक संस्थान का दुर्भाग्य है पिलानी का पिछले पच्चीस सालों में जब से मेरी समझ बनी है अस्पताल में पेशेंट्स के कुछ केस बिगड़ ने के अलावा हमने अंटशंट कुछ नहीं सुना पर जब से यहां चुटभैया नेता आये हैं सब दुर्घटनाएं होने लगी हैं. ताजा केस में कल आधीरात को दो चोर या उठाईगिर नर्सिंग कॉलेज में खिड़की तोड़ कर घुस गये. वैसे चोरी किसी चीज की नहीं हुई. अब साफ बात है कि नर्सिंग कॉलेज की लड़कियों के हॉस्टल में जब चोरी भी नहीं हुई हो तो समझा जा सकता है कि घुसने वालों के इरादे क्या थे! लड़के पकड़े नहीं गये और आज सुबह से लड़कियां स्ट्राइक पर हैं.
मेरे जीवन का अर्द्धशतक हो गया और मेरे घर के बगल में लड़कियों का कॉलेज है स्कूल है और उनके हॉस्टल हैं पर मुझे आज तक उनके हॉस्टल का मुंह किधर है नहीं पता. गोविंदजी सैनी जब तक अस्पताल में रहे हम पत्रकारों को भी कभी हॉस्टल के अंदर नहीं लेकर गये बस न्यूज भिजवा देते थे मेल पर कॉलेज की पर अब तो लड़कियों के हॉस्टल और कॉलेज में आम और खास दरबार लगते हैं. अब हॉस्टल सबके लिए खुले हैं.. समाजसेवियों के लिए, सलाहकारों के लिए, बाबाओं के लिए, नेताओं के लिए, आम आदमियों के लिए... और चोरों के लिए भी क्यों कि मैनेजमेंट समाजवादी आदमी है.
5 फुटे को जिसकी दाढ़ी मूंछ आई नहीं है आदमी की समझ नहीं है डाकुओं को सलाहकार बनाये रखता है बाबाओं से ताबीज बनाये फिरता है कुवांरा अभी तक घूम रहा है उसको नेता बनने की बहुत जल्दी है. टिकट तो भैया हमसे बांड पर लिखवा लो टिकटआज मिले ना आपको 50 साल बाद मिले झुंझुनूं जिले की. एक अस्पताल संभलता नहीं और जिला संभालने चल पड़ा! पर सिर धुनना केवल इस बात का है कि अस्पताल बंद करवा जायेगा एक सनकी. सेठों की स्कूलों के बाद अब अस्पतालों का नंबर लग गया बंद होने का. सबमें कॉमन कारण मूर्ख मैनेजमेंट है.
नेताजी, हॉस्टल में घुसने वाले पकड़े ना गये तो कारण क्या हो सकता है इस बात पर सौ बार सोचना. आपके तो थाना, पुलिस सब कदमों में रहते हैं तो घुसपैठिएं क्यों नहीं पकड़ आ पाते आप को कारण पता ना चले तो हमसे पूछ लेना. हम समाजसेवी नहीं पत्रकार हैं घास नहीं छीलते। ना नकली डिग्री रखते हैं ना थानों की दलाली करते हैं। ना नकली आईडी से किसी को गालियां देते हैं हम जो कहते हैं मुंह पे मारते हैं।

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