मातृ-शोक के बीच सदन पहुंचे टीकाराम जूली,सदन में सरकार को शिक्षा के मुद्दे पर घेरा, बोले- क्या 20 बच्चों का अधिकार नहीं कि उन्हें लेक्चरर मिले
जयपुर। राजस्थान विधानसभा में सोमवार को जनसेवा और कर्तव्यनिष्ठा की एक विरल मिसाल देखने को मिली। अपनी माताजी के निधन के शोक से गुजर रहे नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सोमवार को सदन की कार्यवाही में शामिल होने पहुंचे। व्यक्तिगत जीवन में पहाड़ जैसा दुख टूटने के बावजूद, जूली ने लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रदेश की जनता के प्रति अपनी जवाबदेही को सर्वोपरि रखा। उनके इस कदम की सदन के गलियारों में चर्चा रही, जहाँ उन्होंने यह संदेश दिया कि एक जनसेवक के लिए जनहित की लड़ाई व्यक्तिगत पीड़ा से बड़ी होती है। शोक संतप्त होने के बाद भी श्री जूली ने सदन में विपक्ष की आवाज को कमजोर नहीं पड़ने दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता ने उन्हें उनकी समस्याओं को उठाने के लिए चुनकर भेजा है, और विषम परिस्थितियों में भी वे पीछे नहीं हटेंगे। सदन में उनकी उपस्थिति ने न केवल कांग्रेस विधायक दल में ऊर्जा भरी, बल्कि यह भी सिद्ध किया कि वे 'कर्तव्य और संवेदना' के अद्भुत संगम हैं।
*शिक्षा मंत्री की अमर्यादित भाषा पर कड़ी आपत्ति जताई :
सदन की कार्यवाही के दौरान स्कूलों में शिक्षकों की कमी से जुड़े प्रश्न पर चर्चा उस समय गरमा गई, जब शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने अमर्यादित टिप्पणी की। मंत्री दिलावर ने कटाक्ष किया और भांग खाकर स्कूल खोलने जैसा लज्जाजनक बयान दिया जिस पर नेता प्रतिपक्ष जूली ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा " मंत्री जिस तरह से बात कर रहे हैं ' भांग खा के, भांग खा के ' आप प्रदेश के शिक्षा मंत्री हो ,जवाब तो आप भांग खा कर दे रहे हो ।"
*जो बीस बच्चे पढ़ रहे हैं उनका अधिकार नहीं है कि उनको लेक्चरर मिले?
शिक्षा के मुद्दे पर सरकार को तार्किक अंदाज़ में में घेरते हुए स्कूली बच्चों की शिक्षा जरूरतों पर महत्वपूर्ण बात कहते हुए नेता प्रतिपक्ष बोले कि " जो बीस बच्चे पढ़ रहे हैं उनका अधिकार नहीं है कि उनको लेक्चरर मिले ? उनको बिल्डिंग मिले।“ उन्होंने ड्रॉप आउट की संख्या बढ़ने का जिक्र भी किया। वहीं उन्होंने स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल और महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूल में प्रतिनियुक्ति से पोस्ट भरने के विषय पर श्री जूली ने याद दिलाया कि महात्मा गांधी विद्याकायों में पूर्ववर्ती सरकार ने दस हजार पोस्ट का कैडर बनाया था।