TMC के खाते खुले, ममता गुट को हाईकोर्ट से राहत
कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहे नाम और चुनाव चिन्ह विवाद के बीच ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को कलकत्ता हाईकोर्ट से बैंक खातों के मामले में राहत मिली है। अदालत ने पार्टी के तीन बैंक खातों के संचालन के लिए पहले से तय अंतरिम व्यवस्था को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है। यह व्यवस्था अब 29 जनवरी तक जारी रहेगी।
जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की सिंगल बेंच ने साफ किया कि चुनाव आयोग की ओर से TMC के पुराने नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह को लेकर लिया गया अंतरिम फैसला आगामी उपचुनावों से संबंधित है। इसलिए इसका सीधा असर पार्टी के बैंक खातों के वित्तीय संचालन पर नहीं पड़ेगा।
ऐसे निकलेगा बैंक खाते से पैसा
अदालत की व्यवस्था के तहत ममता गुट के तीन बैंक खातों से राशि निकालने के लिए दो अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं के हस्ताक्षर जरूरी होंगे। इसके बाद अदालत द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी और सेवानिवृत्त जज सुब्रत तालुकदार संबंधित चेक की जांच करेंगे। उनकी मंजूरी मिलने के बाद ही बैंक से भुगतान किया जा सकेगा।
यह विवाद जुलाई में सामने आया था। उस समय खातों के संचालन को लेकर अदालत ने अंतरिम व्यवस्था बनाई थी और विशेष अधिकारी की नियुक्ति की थी। अब उसी व्यवस्था की अवधि बढ़ा दी गई है, जिससे पार्टी के नियमित प्रशासनिक और कानूनी खर्चों के भुगतान का रास्ता बना रहेगा।
चुनाव चिन्ह पर अलग विवाद, सुप्रीम कोर्ट पहुंची ममता
TMC के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद फिलहाल चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। चुनाव आयोग ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को आगामी उपचुनावों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित किए हैं। ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चिन्ह मिला है, जबकि दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चिन्ह दिया गया है। यह व्यवस्था आगामी उपचुनावों के लिए अंतरिम है।
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। 21 सितंबर को उनकी ओर से मामले की जल्द सुनवाई की मांग की गई, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले को प्राथमिकता के आधार पर सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।
इस तरह TMC के सामने फिलहाल दो अलग कानूनी मोर्चे हैं—एक तरफ पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती है, वहीं दूसरी ओर बैंक खातों के संचालन को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था जारी रखी है।