टोंक: ‘‘अन्नदाता हुंकार रैली’’ का आयोजन 6 अक्टूबर को
टोंक। किसान पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट रविवार को टोंक आये, जहां पर रामपाल जाट पत्रकार वार्ता में बताया कि 6 अक्टूबर को जयपुर में ‘‘अन्नदाता हुंकार रैली’’ का आयोजन किया जायेगा। ‘‘खेत को पानी, फसल को दाम, युवाओं को काम’’ प्राप्ति के लिए किसान संकल्प ले रहे हैं। किसानों की सहमति प्राप्त किए बिना प्रीमियम तो वसूल लिया जाता है, किंतु फसल खराबा होने पर क्षतिपूर्ति नहीं की जाती है, बीमा कंपनियां क्षतिपूर्ति राशि देना ही नहीं चाहती है, बल्कि उससे बचने के लिए मीन मेख निकालती रहती है, इसके लिए बीमा कंपनियां उन कर्मियों को पुरस्कृत करती है, जो ‘‘मीन मेख निकालने’’ में सिद्ध हस्त होते हैं, इस प्रकार की कमियां निकालने के लिए सरकार द्वारा तैयार की गई मार्गदर्शिका बीमा कंपनियों के लिए सहायक बनी हुई है। मार्गदर्शिका तथा क्रियान्वयन दोनों का उपयोग बीमा कंपनियां क्षतिपूर्ति देने से बचने के लिए करती है, इसलिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना् वर्ष 2016-17 से आरंभ होने के बाद के पांच वर्षों में बीमा कंपनियों ने करोड़ों रुपए अर्जित किए हैं, इससे धन किसानों का, तंत्र सरकारों का तथा लाभ कंपनियों का होना स्पष्ट हो गया। किसी भी दल की सरकार हो वह मतदाताओं की तुलना में चंदा दाताओं को अधिक महत्व देती है, मतदाताओं के दल, संप्रदाय, धर्म, जाति में बंधे होने की स्थिति का राजनीतिक दल एवं नेता अनुचित लाभ उठाते हैं। जिसके पैर में कांटा लगता है वह उसी को निकालना होता है, प्रयास भी उसी को आरंभ करना होता है, अभी तो दल, संप्रदाय, धर्म, जाति की बेडिय़ों में जकड़े होने के कारण कांटा निकालने के लिए राजनीतिक दल एवं उनके नेताओं की ओर दौड़ते हैं, इसलिए सभी राजनीतिक दल एवं नेता अपना अपना वोट बैंक बनाने में जुटे रहते हैं, इसलिए ही सकारात्मक कार्य करना उनके लिए आवश्यक नहीं है बल्कि नकारात्मक राजनीति करना उनके अनुकूल है।
इसके लिए किसान मतदाताओं को अपने पैरों का कांटा निकालने का कार्य स्वयं ही आरंभ करना पड़ेगा, इस हेतु किसान वोट बैंक अपरिहार्य है, इसके लिए वे जाति, धर्म से तोड़ेंगे, हम मूंग-चने से जोड़ेंगे, बीती रात हो गई भोर, चलो किसानों राज की ओर का उद्घोष करना होगा, जब तक किसान वोट बैंक नहीं बने तब तक बीमा की क्षतिपूर्ति करने हेतु अल्पकालीन एवं दीर्घकालीन जैसे दोनों कार्य एक साथ करने पड़ेंगेद्य फोड़े, फुंसियों के उपचार की भांति खराबा होने पर वर्ष दर वर्ष की क्षतिपूर्ति प्राप्त करना तथा प्रतिवर्ष की लड़ाई से छुटकारा पाने के लिए स्थाई उपचार की दिशा में रक्त शुद्धि की आवश्यकता है, इसी के आधार पर फसल खराबा होने पर क्षतिपूर्ति सहज रूप से प्राप्त हो पाएगी। फसलों के दाम के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गारंटी का कानून बनाने से नीलामी बोली् न्यूनतम समर्थन मूल्य से ही आरंभ होगी, तब किसानों को उनके परिश्रम का पारिश्रमिक मिलने की संभावना बन जाएगी। कोई भी व्यापारी किसानों से उपज खरीदने के बाद भुगतान किए बिना ही भाग जाए तो बकाया राशि क़ृषि मंडी समिति किसान को भुगतान करेगी तथा उस व्यापारी से सरकार के माध्यम से वसूल कर लेगी। इस मंत्र से ष्किसान राज का यह पैगाम, खेत को पानी, फसल को दामए युवाओं को काम सफल हो सकेगा। ज्ञात रहे किी 7 एवं 8 जून 2025 को जयपुर के किसान भवन में आयोजित किसान महापंचायत के रजस्थान के प्रमुख कार्यकर्ताओं की दो दिवसीय कार्यशाला में 6 अक्टूबर सोमवार को अन्नदाता हुंकार रैली का जयपुर में आयोजन निश्चित किया है, जिसमें राज्य भर के किसान अपने स्वयं के खर्चे जयपुर कूच करेंगेद्य इसके लिए राजस्थान में गांव स्तर पर तैयारी चल रही है। इस अवसर पर किसान महापंचायत के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अकबर खान एवं युवा प्रदेशाध्यक्ष रामेश्वर चौधरी आदि मौजूद थे।