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कछुओं का चढ़ावा! असम का ये विष्णु मंदिर बना रहस्य का केंद्र

कछुओं का चढ़ावा! असम का ये विष्णु मंदिर बना रहस्य का केंद्र

भारत के असम राज्य में कामरूप जिले के हाजो में श्री हयग्रीव माधव मंदिर स्थित है। यह मंदिर न सिर्फ अपनी वास्तुकला बल्कि अनोखी परंपराओं के लिए भी फेमस है। मणिकूट पर्वत पर बना यह मंदिर सदियों से बौद्ध और हिंदू धर्म के लोगों के लिए बड़ा आस्था का केंद्र रहा है। इस मंदिर की खासियत यह है कि भक्त भगवान श्रीविष्णु को प्रसन्न करने के लिए कछुए का चढ़ावा करते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इस मंदिर का महत्व, अनूठी परंपरा और बौद्ध धर्म से खास जुड़ाव के बारे में बताने जा रहे हैं।


मंदिर का पौराणिक महत्व
इस मंदिर का इतिहास काफी प्राचीन है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक यहां भगवान श्रीविष्णु के 'हयग्रीव' अवतार की पूजा की जाती है। माना जाता है कि श्रीविष्णु ने इसी स्थान पर मधु-कैटभ नामक दोनों राक्षसों का वध किया था। माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 1583 में कोच राजा रघुदेव नारायण द्वारा कराया गया था। वहीं कुछ लोग 100 साल से भी ज्यादा प्राचीन काल के ध्वस्त मंदिर का पुनर्निर्मित रूप मानते हैं। यह मंदिर पत्थरों से बना है और इसकी दीवारों पर हाथियों और अन्य पौराणिक आकृतियों की बेहद सुंदर नक्काशी बनी है।


जानिए अनूठी परंपरा
इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यहां का 'माधव पुखरी' है। इस तालाब में सैकड़ों दुर्लभ प्रजाति के कछुए रहते हैं। यहां की परंपरा है कि भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने पर या फिर भगवान को श्रद्धा अर्पित करने के लिए कछुओं को खाना खिलाते हैं। या फिर तालाब में कछुए छोड़ते हैं। इन कछुओं को भगवान विष्णु का कूर्म अवतार माना जाता है। वहीं स्थानीय लोग इन कछुओं की सुरक्षा का खास ख्याल रखते हैं और इनको कभी नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।


बौद्ध धर्म से जुड़ाव
हयग्रीव माधव मंदिर की खासियत यह भी है कि यहां पर सिर्फ हिंदू ही नहीं बल्कि भारी संख्या में बौद्ध अनुयायी भी आते हैं। तिब्बती बौद्धों का मानना है कि यह वही स्थान है, जहां पर स्वयं भगवान बुद्ध ने निर्वाण प्राप्त किया था। इस कारण बौद्ध अनुयायी इस मंदिर को काफी पवित्र मानते हैं और इसको 'महामुनि' का मंदिर कहते हैं। श्री हयग्रीव माधव मंदिर संस्कृति, धर्म और वन्यजीव संरक्षण का एक अनूठा उदाहरण है। यहां की शांति और सदियों पुरानी परंपराएं इसको भारत के अन्य मंदिरों से अलग बनाती हैं। वहीं अगर आप असम की यात्रा पर जा रहे हैं, तो हाजो के इस फेमस मंदिर के दर्शन करना न भूलें।

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