दुनियाभर में दो अरब लोग स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित
विश्व स्वास्थ्य दिवस हर साल एक नई थीम के साथ मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन
ने इस साल हेल्थ फॉर ऑल थीम के साथ इसे मनाने का फैसला किया है। इस बार का विषय
यह दर्शाता है कि, स्वास्थ्य हर व्यक्ति का बुनियादी अधिकार है और हर किसी को बिना किसी
वित्तीय कठिनाइयों के जब और जहां इसकी आवश्यकता हो उसे स्वास्थ्य सेवाएं मिलनी चाहिए।
विश्व स्वास्थ्य दिवस हर साल 7 अप्रैल को मनाया जाता है। इसका मकसद दुनिया भर में लोगों
को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और जनहित को ध्यान में रखते हुए सरकार को स्वास्थ्य
नीतियों के निर्माण के लिए प्रेरित करना है। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया भर के लोगों के
स्वास्थ्य के स्तर ऊंचा को उठाना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है प्रगति और विकास
की लम्बी छलांग के बावजूद दुनियाभर में दो अरब लोग स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित रह जाते
हैं क्योंकि उनके पास सेहत पर खर्च करने के लिए पैसे नहीं हैं। लगभग 930 मिलियन लोगों
को अपने घरेलू बजट का 10 प्रतिशत या उससे अधिक स्वास्थ्य पर खर्च करना पड़ रहा है,
जिससे उनकी वित्तीय हालत और खराब हो रही है। इसी भांति दुनिया की 30 फीसदी आबादी
आज तक जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं तक नहीं पहुंच पाई है। देश और दुनिया में हर व्यक्ति को
स्वास्थ्य सुविधा मिले, इसी को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष की थीम हेल्थ फॉर ऑल रखा गया
है।
पिछले तीन वर्षों से कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को अपना शिकार बना रखा है। हर व्यक्ति
कोरोना से पीड़ित हुआ है। लाखों लोग इससे अकाल मृत्यु के शिकार हो गए। विश्व स्वास्थ्य
संगठन ने अपनी बड़ी भूमिका का निर्वहन करते हुए दुनिया को सचेत किया। कोरोना रोधी टीकों
का निर्माण कर लोगों की जान बचाई गई । अभी भी कोरोना का खतरा कम नहीं हुआ है। आज
के दिन हमें यह संकल्प लेने की जरुरत है की हम पीड़ित मानवता को हर खतरे से बचाने के
लिए समय पर स्वास्थ्य सुविधा सुलभ करा कर स्वस्थ दुनिया के निर्माण की दिशा में आगे
बढ़ेंगे।
हर इंसान का स्वास्थ्य अच्छा हो और बीमार होने पर हर व्यक्ति को अच्छे इलाज की सुविधा मिल सके।
दुनियाभर में पोलियो, रक्ताल्पता, नेत्रहीनता, कुष्ठ, टीबी, मलेरिया और एड्स जैसी भयानक बीमारियों की
रोकथाम हो सके और मरीजों को समुचित इलाज की सुविधा मिल सके और समाज को बीमारियों के प्रति
जागरूक बनाया जाए और उनको स्वस्थ वातावरण बना कर स्वस्थ रहना सिखाया जाए। भारत में आम
तौर पर लोगों में स्वास्थ्य चेतना का अभाव है। शारीरिक स्वास्थ्य के प्रति भी लोग तभी चिंतित होते हैं जब
कोई रोग उन्हें ग्रस लेता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि निष्क्रियता कई गंभीर बीमारियों को
जन्म देती है। विश्व लगातार बढ़ रही निष्क्रियता नामक महामारी का शिकार हो रहा है आरामदेह
जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ, जैसे हृदय रोग और डायबीटीज, अब तक संपन्न देशों की बीमारियाँ मानी
जाती थीं लेकिन संगठन का कहना है कि अब विकासशील देश भी अब इसके शिकार हो रहे हैं। विश्व भर में
इन बीमारियों से हर वर्ष दो करोड़ लोगों की मौत होती है और इनमें से अस्सी प्रतिशत गरीब देशों से हैं
संगठन का कहना है कि इस तरह की बीमारियाँ दौड़-भाग से रोकी जा सकती हैं
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, स्वास्थ्य सिर्फ रोग या दुर्बलता की अनुपस्थिति ही नहीं बल्कि एक पूर्ण
शारीरिक, मानसिक और सामाजिक खुशहाली की स्थिति है। स्वस्थ लोग रोजमर्रा की गतिविधियों से
निपटने के लिए और किसी भी परिवेश के मुताबिक अपना अनुकूलन करने में सक्षम होते हैं। रोग की
अनुपस्थिति एक वांछनीय स्थिति है लेकिन यह स्वास्थ्य को पूर्णतया परिभाषित नहीं करता है। यह
स्वास्थ्य के लिए एक कसौटी नहीं है और इसे अकेले स्वास्थ्य निर्माण के लिए पर्याप्त भी नहीं माना जा
सकता है। लेकिन स्वस्थ होने का वास्तविक अर्थ अपने आप पर ध्यान केंद्रित करते हुए जीवन जीने के
स्वस्थ तरीकों को अपनाया जाना है।
जीवन में स्वास्थ्य ही अनमोल धन है। शारीरिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति ही जीवन के विभिन्न क्षेत्रो में
सफलता अर्जित कर सकते है। स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन का निवास होता है। व्यक्ति की सबसे बड़ी दौलत
उसका शरीर और उसका स्वास्थ्य होता है। जीवन में स्वास्थ्य का मूल्य समझ कर ही विश्व स्वास्थ्य
संगठन की स्थापना की गई थी। अतः प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य के प्रति सदैव सजग रहना चाहिए।
-बाल मुकुन्द ओझा