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कापड़ोद गांव में दो दिवसीय मावलिया महाराज के मेले का आयोजन

कापड़ोद गांव में दो दिवसीय मावलिया महाराज के मेले का आयोजन

डीडवाना। जिले के पालोट ग्राम पंचायत के गाँव कापड़ोद में मावलिया (बायाजी )महाराज का प्रसिद्ध मेला आज शुरू हो चुका है मेला दो दिन तक आयोजित होता है और डीडवाना उपखंड ही नही आसपास के क्षेत्र से हजारों श्रद्धालु मेले में दर्शनार्थ आते है, यहां आने वाले श्रद्धालुओ में सबसे ज्यादा उन लोगो की तादात होती है जो नवविवाहित जोड़े होते है या फिर बच्चो का जड़ूला संस्कार करवाने वाले लोग यहां अपनी आस्था से आते है और जात देने के साथ साथ अपने बच्चों का जड़ूला भी चढ़ाते है, क्षेत्र में आस्था है कि बच्चो में होने वाली बीमारियों से मावलिया महाराज रक्षा करती है, और नवविवाहित दम्पतियों यहां अपने सुखी वैवाहिक जीवन की मंगल कामना के लिए आते है , मेला कई वर्षों से कापड़ोद गाँव के मावलिया महाराज मंदिर क्षेत्र में भरता है और इसका स्थानीय ग्राम पंचायत इसका आयोजन करवाती है । डीडवाना कस्बे में भी आज मावलिया मंदिर में मेले का आयोजन हुआ। जिसमें जानकारी देते हुए मंदिर पुजारी कानसिंह ने बताया कि मांवलिया माता का मंदिर 1000 वर्ष से अधिक पुराना है यहां पर लोग दूर दराज से मावलिया माता के दर्शन के लिए आते हैं मावलिया माता की महिमा अनोखी है मावलिया माता को बायाजी महाराज के रूप में भी जाना जाता है आगे जानकारी देते हुए बताया कि यहां पर जो नव विवाहित जोड़े हैं वह माताजी के दर्शन के लिए आते हैं वहीं जिस घर परिवार में नए बच्चे का जन्म हुआ है वह भी अपने बच्चों को यहां पर धोक लगवाने के लिए उसका झडूला उतारने के लिए लाते हैं साथ में यहां पर लूले लंगड़े बहरे सभी माता जी के धोक लगाने आते हैं माताजी सभी का उद्धार करती है यह मावलिया माता (बायाजी महाराज) का मंदिर काफी वर्षों पुराना है यहां की महिमा माताजी की अनोखी निराली है सात बहनों का यह मंदिर है जिसको बायाजी महाराज मावलिया माता के रूप में जाना जाता है जिसमें साल में दो बार मेले का आयोजन होता है और लोग दूर दराज से माता के दर्शन करने के लिए आते हैं और अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं और माता उन सब की मनोकामना पूर्ण करती है और जो भी कष्ट होते हैं माता उनको हरती है ।

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