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दौसा PG कॉलेज में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

दौसा PG कॉलेज में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

दौसा। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में “वैश्विक अर्थव्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, शिक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता” विषय पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केन्द्रीय विश्वविद्यालय महेंद्रगढ़ (हरियाणा) के कुलगुरु प्रोफेसर टंकेश्वर कुमार रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में कलेक्टर देवेंद्र यादव तथा की-नोट स्पीकर के रूप में कोटा विश्वविद्यालय की प्रोफेसर अनुकृति शर्मा उपस्थित रहीं। संगोष्ठी के संरक्षक एवं महाविद्यालय प्राचार्य प्रोफेसर लाला राम मीणा ने अतिथियों, विद्वानों और प्रतिभागियों का स्वागत उद्बोधन देते हुए कहा कि यह संगोष्ठी समसामयिक विषयों पर एकीकृत चर्चा और विचार-विमर्श का महत्वपूर्ण मंच बनेगी। इंस्पिरा रिसर्च एसोसिएशन की ओर से डॉ. एस.एस. मोदी तथा महाविद्यालय की ओर से आयोजन सचिव डॉ. शिवशंकर मीणा ने दो दिवसीय कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि संगोष्ठी में देश-विदेश के विश्वविद्यालयों एवं राजस्थान व अन्य राज्यों के कॉलेजों से 900 से अधिक पंजीकरण प्राप्त हुए हैं।
उद्घाटन सत्र में ऑनलाइन मोड पर तीन अंतरराष्ट्रीय रिसोर्स पर्सन जुड़े—कॉलेज ऑफ बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन, यूनिवर्सिटी खोरफाकन (शारजाह, यूएई) की डीन डॉ. निकोलाना लजेपावाज; टायलर यूनिवर्सिटी, मलेशिया के सीनियर लेक्चरर डॉ. जैनिथा कुलारंजन सिंगम; तथा एशिया पेसिफिक यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन, मलेशिया के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अल्बर्ट अहमद।
कलेक्टर देवेंद्र यादव ने कहा—कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रशासनिक व्यवस्था की ‘पावर बूस्ट’विशिष्ट अतिथि कलेक्टर देवेंद्र यादव ने अपने संबोधन में कहा कि राजस्थान सहित देशभर में प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्था में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक हुआ है। उन्होंने कहा कि स्कूल और उच्च शिक्षा में भी AI को एकीकृत करना समय की जरूरत है।यादव ने बताया कि कृषि, कुटीर व लघु उद्योग, अध्यापन, शोध, रक्षा व अंतरिक्ष तकनीक सहित लगभग सभी क्षेत्रों में AI महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इससे न केवल कार्यक्षमता बढ़ती है बल्कि गुणवत्ता में भी सुधार होता है।
तकनीक का सावधानी से प्रयोग जरूरी: डॉ. अनुकृति शर्मा
की-नोट स्पीकर डॉ. अनुकृति शर्मा ने कहा कि बढ़ती तकनीक, प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग जितना लाभकारी है, उतने ही इसके नकारात्मक प्रभाव भी सामने आ रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले समय में इसके और गंभीर दुष्परिणाम देखने को मिल सकते हैं।उन्होंने युवाओं को इंस्टाग्राम, फेसबुक, व्हाट्सऐप, ट्विटर जैसे सोशल मीडिया से दूरी बनाकर पारंपरिक अध्ययन पद्धति अपनाने पर जोर दिया, जिससे ज्ञान में वास्तविक वृद्धि हो सके।
‘तकनीक के जाल से बाहर निकलना चुनौती’: मुख्य अतिथि प्रो. टंकेश्वर कुमार
मुख्य अतिथि प्रो. टंकेश्वर कुमार ने कहा कि तकनीक ने जीवन को सरल बनाया है, लेकिन अति-निर्भरता विकास की गति को बाधित भी कर रही है। उन्होंने कहा कि लर्निंग प्रोसेस, शोध संसाधनों और अध्यापन कौशल में आवश्यक बदलाव कर ही सतत विकास सुनिश्चित किया जा सकता है।उन्होंने कहा कि आज हर विषय एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है और अंतर्विषयात्मक अध्ययन की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता के रूप में उभरी है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सी.पी. शर्मा और डॉ. आरती चोपड़ा ने किया। संयोजक डॉ. विजेंद्र प्रसाद मीणा ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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