उद्धव ठाकरे की फडणवीस को चुनौती, लॉरेंस बिश्नोई पर घेरा
मुंबई. मुंबई के दादर स्थित ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में आयोजित शिवसेना (यूबीटी) की वार्षिक दशहरा रैली में उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र सरकार और केंद्र की सत्ताधारी नेतृत्व पर जमकर निशाना साधा। विजयादशमी के अवसर पर समर्थकों को संबोधित करते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की आलोचना की। अपने भाषण में ठाकरे ने कानून-व्यवस्था, जन सुरक्षा और देश की अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दे उठाए।
टाइगर श्रॉफ पर हाल में हुए हमले का जिक्र करते हुए ठाकरे ने मुख्यमंत्री पर दिखावे की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि घटना के बाद मुख्यमंत्री अभिनेता से मिलने पहुंच गए, लेकिन सवाल यह है कि हमलावर वहां तक पहुंचे कैसे। ठाकरे के मुताबिक, पुलिस द्वारा आरोपियों को पकड़ लेना ही पर्याप्त नहीं है, क्योंकि असली जिम्मेदारी ऐसी घटनाओं को पहले ही रोकने की है।
उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पूछा कि नियमित जांच और नाकेबंदी के बावजूद हमलावर कैसे अंदर दाखिल हो गए। ठाकरे ने आरोप लगाया कि सरकार का ध्यान अपनी छवि बनाने पर अधिक है, जबकि पुलिस पर पूरी जिम्मेदारी छोड़ दी जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक विरोधियों से जुड़ी छोटी घटनाओं पर पुलिस तत्काल कार्रवाई करती है, लेकिन गंभीर सुरक्षा मामलों में चूक चिंता का विषय है।
लॉरेंस बिश्नोई के मुद्दे पर फडणवीस को चुनौती
ठाकरे ने लॉरेंस बिश्नोई का नाम लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री में वास्तव में साहस है, तो उन्हें साबरमती जेल में बंद बिश्नोई के खिलाफ कार्रवाई करके दिखानी चाहिए। ठाकरे ने बिश्नोई गिरोह की ताकत को लेकर किए जा रहे दावों का हवाला देते हुए राज्य सरकार की अपराध नियंत्रण नीति पर सवाल खड़े किए।
उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र में अपराधियों की सक्रियता गंभीर चिंता का विषय है। साथ ही, राज्य सरकार की ओर से हाई कोर्ट में दाखिल उस हलफनामे पर भी सवाल उठाए, जिसमें कथित तौर पर महाराष्ट्र को 'अर्बन नक्सलियों' का गढ़ बताया गया है। ठाकरे ने पूछा कि शहरों में अर्बन नक्सलवाद के दावे कितने ठोस हैं और आरोप लगाया कि दूसरे राज्यों से अपराधी महाराष्ट्र में आ रहे हैं।
प्रदर्शनकारी युवाओं के समर्थन में बोले ठाकरे
अपने भाषण में ठाकरे ने सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके और युवा प्रदर्शनकारियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने पुराने विरोध प्रदर्शन को याद करते हुए कहा कि उस दौरान कई युवाओं को चोटें आई थीं और एक युवती के कपड़े तक फट गए थे। ठाकरे के अनुसार, उन्होंने प्रदर्शनकारियों से घर लौटने को कहा था, लेकिन उन्होंने पीछे हटने से इनकार कर दिया।
ठाकरे ने इन घटनाओं को लंबे समय से जमा असंतोष का नतीजा बताया। उन्होंने कहा कि सड़कों और जंतर-मंतर पर अपनी मांगों के लिए प्रदर्शन करने वाले युवा क्रांतिकारी हैं, उन्हें केवल विरोध के कारण 'अर्बन नक्सल' कहना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, इन प्रदर्शनों में मध्यमवर्गीय परिवारों ने भी हिस्सा लिया और माता-पिता अपने बच्चों के साथ खड़े दिखाई दिए।
रैली के अंत में ठाकरे ने सत्ताधारी दल पर देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार को अपनी नीतियों और कामकाज के लिए जल्द ही राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। हालांकि, ये आरोप और दावे ठाकरे ने अपने राजनीतिक संबोधन के दौरान लगाए।