केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का भीलवाड़ा दौरा, उद्यमियों से की चर्चा
भीलवाड़ा। केंद्रीय कपड़ा मंत्री पीयुष गोयल एक दिवसीय प्रवास के दौरान गुरुवार को भीलवाड़ा पहुँचे। यहाँ उन्होंने लघु उधोग भारती और मेवाड़ चेंबर के कार्यक्रम में शिरकत की।
लघु उधोग भारती के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने सूबे की गहलोत सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के उद्योगों के विकास के लिए कांग्रेस सरकार ने केंद्र को कोई प्रस्ताव नहीं भेजे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार जब दोनों मिलकर काम करती है तभी उद्योग तेज गति से आगे बढ़ सकता है। विदेश से निवेशक अलग-अलग राज्यों में तो जाते हैं, लेकिन राजस्थान में नये निवेशक नहीं आते तो यह चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार ने भीलवाड़ा के उद्योग जगत के लिए कोई भी प्रपोजल किसी भी योजना का केंद्र को नहीं भेजा है। गोयल ने कहा कि मैं, समझता हूं राज्य सरकार को भी ध्यान होगा कि भीलवाड़ा अपने आप में इतना ताकतवर है और वे, अपने आप ही अपने पांव पर खड़े हैं। गोयल ने कहा कि भीलवाड़ा में 400 से ज्यादा कपड़ा फैक्ट्रियां है। ये फैक्ट्रियां क्यू नही स्कील डवलपमेंट कर आगे के लिए तैयार करें, जिसका आगे चलकर फायदा मिलेगा। केंद्र सरकार ने कई ऐसी स्कीमें चाहे वो एसआईटी की स्कीम हो या आईटीबीएस आदि स्कीमें है, लेकिन राज्य सरकार ने कोई प्रस्ताव केंद्र को नहीं भेजा, जिससे कि केंद्र कोई मदद कर सके। उन्होंने कहा कि मुंबई में जब मैने फैक्ट्री शिफ्ट की, तब वहां कोमन ट्रीटमेंट प्लांट उद्योगपतियों ने ही लगाया था, सरकार ने नहीं लगवाया था। मैं, मेवाड़ चैंबर के प्रतिनिधियों से अनुरोध करुंगा कि वे भी मुंबई के थाणे जाकर इस कौमन ट्रीटमेंट प्लांट को जरुर देखें। उन्होंने सरकार से कुछ नहीं लिया। शायद, जमीन सरकार से ली हो सकती है। बाकी सहकारिता की तरह कंपनी बनाई और यह ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया। गोयल ने कहा कि वहां सभी फैक्ट्रियां केमिकल से जुड़ी है। इसके बावजूद भी कोमन ट्रीटमेंट प्लांट लाभ में चल रहा है। पीयुष गोयल ने भीलवाड़ा के उद्योगपतियों को सीख देते हुये कहा कि नवीं मुंबई में भी प्रदूषण की समस्या नहीं है। वहां उद्योगपतियों ने खुद ही संस्था खड़ी कर दी ओर प्रदूषण होने नहीं दिया। यह एक आत्मनिर्भरता की कहानी है। उन्होंने कहा कि हम बैठे रहें। इंतजार करते रहे कि कोई आकर हमें कुछ देगा, तभी हम काम करेंगे तो लाइफ में हम कभी आगे नहीं बढ़ पायेंगे। हमें सोचना पड़ेगा कि पूरे समय सरकार पर निर्भर रहना है या हाथ में डंडा लेकर चलना है। या आईटी सेक्टर की तरफ आत्मनिर्भर व्यवस्था खड़ी करनी है।
उन्होंने कहा कि हम, बैठे रहे कि सरकार कंधा देने आगे बढ़ाने आयेगी तो यह चिंता की बात है। गोयल ने कहा कि उद्योगों को चिंतन करना होगा कि पिछले दस वर्षो में टैक्सटाइल का निर्यात 30 से 40 मिलियन डॉलर पर ही क्यूं अटका है। इसे 100 मिलियन डालर तक ले जाना है। उन्होंने कहा कि एमएसएमई को बड़ी छलांग लगाने के लिए कुछ बड़ा करने की जरुरत है। हमारे से जो अपेक्षायें हैं, उन पर हम अपना काम करेंगे। उन्होंने यह कहते हुये भरोसा भी दिया कि सरकारी योजनाओं को स्कूटर की किक स्टार्ट के रूप में लें। उस पर निर्भर न रहें। मैं, यह नहीं कह रहा कि आपकी मांगों पर ध्यान नहीं दूंगा। उन पर विचार करुंगा। उद्योग मंत्री गोयल ने कहा कि मैं विश्वास दिलाता हूं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सभी केंद्रीय विभाग मिलकर आपकी मांगों पर विचार करते हुये इंडस्ट्री को ओर आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि भीलवाड़ा को कैसे टैक्सटाइल का हब बना सकते हैं। इसके लिए भी कुछ सोचना होगा। बड़ी छलांग लगाने के लिए कुछ बड़ा करना होगा। इससे पूर्व भीलवाड़ा के उद्यमियों ने सस्ती बिजली, सब्सिडी, हवाई अड्डा, टैक्सटाइल पार्क जैसी मांगे मंत्री गोयल के समक्ष रखी। उन्होंने कहा कि हमें सोचना होगा कि कैसे हम भीलवाड़ा को अंतरराष्ट्रीय पटल पर टैक्सटाइल के हब के रूप में बना सके। समर्थ योजना की चर्चा करते हुये कहा कि भीलवाड़ा में इस योजना के तहत 3 हजार लोगों को ही प्रशिक्षित किया गया। जबकि एक लाख लोगों को प्रशिक्षित किया जाना था। नये लोगों को नौकरी मिलेगी। राज्य सरकार से प्रस्ताव आये तो भीलवाड़ा में लिफ्ट का परिसर स्थापित कर सकते हैं, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन का केंद्र खोल सकते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कुछ और चुस्ती दिखाये तो भीलवाड़ा और यहां के उद्योगों का भी भला होगा। एमएसएमई की कई योजनायें हैं, लेकिन यहां से प्रस्ताव तो भेजे जायें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपनी उलझनों में व्यस्त रहती है कि उनकों लघु उद्योग, सुक्ष्म उद्योग व अन्य उद्योग और निवेशकों को आकर्षित करने के लिए जो उत्साह दिखना चाहिये, वो दिखता नहीं है।
पीयुष गोयल ने जीएसटी की चर्चा करते हुये कहा कि बिजली, मंडी, टैक्स, पेट्रोल, डीजल जीएसटी में शामिल नहीं है। केंद्र सरकार इन्हें जीएसटी में शामिल करना चाहती है, पर राज्य सरकारें तैयार नहीं हो पा रही है। उन्होंने राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुये कि युवराज किस तरह रोज जीएसटी का मजाक उड़ा रहे हैं। कार्यक्रम में लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय महासचिव घनश्याम ओझा, पूर्व अध्यक्ष ओम मित्तल, प्रांतिय अध्यक्ष योगेंद्र शर्मा, चित्तौडग़ढ़ सांसद सीपी जोशी, शहर विधायक विट्ठ्लशंकर अवस्थी, सभापति राकेश पाठक, भाजपा जिलाध्यक्ष लादूलाल तेली, उद्योगपति त्रिलोक छाबड़ा, पीएम बेसवाल, अजय मूंदड़ा आदि मौजूद थे।