एकजुट एनडीए का तीन तरह इंडिया गठबंधन से मुकाबला
आगामी लोकसभा चुनाव जीतने के लिए राजनीतिक पार्टियां अपनी रणनीति बना कर चुनावी संघर्ष में कूद
गई है। इस समय एकजुट एनडीए का तीन तरह इंडिया गठबंधन से मुकाबला है। एनडीए हिंदी पट्टी के तीन
राज्यों में जीत के बाद उत्साहित है वहीं इंडिया गठबंधन के सामने अपने घटक दलों में सीट शेयरिंग का
काम काफी चुनौतीपूर्ण है। इसी बीच तृणमूल सुप्रीमों और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इंडिया
गठबंधन की और से प्रधानमंत्री पद के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे का नाम प्रस्तावित कर एक
तीर से कई शिकार करने का प्रयास किया है लगता है यह चुनाव मोदी और खरगे के चेहरे पर लड़ा जायेगा।
यदि ऐसा होता है तो यह अब तक का सबसे दिलचस्प चुनाव होंगा । अस्सी आयु पार खड़गे दलित समुदाय
से है। कर्णाटक जीत का श्रेय भी उन्हें दिया जा सकता है। कन्नड़ होने के बावजूद हिंदी में जोशीला बोलते है।
भाजपा और प्रधान मंत्री पर हमला बोलते समय कई बार मर्यादा का उल्लंघन भी कर देते है। ममता ने
खरगे का नाम प्रस्तावित कर नेहरू गाँधी परिवार के वारिस राहुल गाँधी का पीएम बनने का रास्ता काट
दिया है। हालाँकि खरगे ने कहा मैं वंचितों के लिए काम करता हूं। पहले जीतें फिर देखेंगे। इंडिया गठबंधन के
निर्माण के साथ सबसे पूर्व कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी के नाम की ही दावेदारी की गई थी, लेकिन राहुल
के नाम पर विपक्षी दल एकजुट नहीं हुए। इसके बाद नीतीश कुमार, ममता बनर्जी, शरद पवार समेत कई
वरिष्ठ नेताओं के नाम सामने आए, लेकिन हर नेता के नाम पर दूसरा नेता सहमत नहीं दिखा। गठबंधन में
सबसे बड़ा दल कांग्रेस है, इसलिए पीएम का चेहरा कांग्रेस से होना चाहिए। खरगे के नाम पर विपक्षी
पार्टियों के बीच उनकी स्वीकार्यता भी देखी जाती है, मगर सियासी क्षेत्रों में इसे लेकर एक नई बहस छिड़ गई
है। आने वाले लोकसभा चुनाव में इसे दक्षिण और उत्तर की लड़ाई के रूप में भी देखा जा रहा है।
भाजपा और एनडीए के पास प्रधान मंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी जैसा लोकप्रिय और मजबूत व्यक्तित्व है।
हिंदी पट्टी के तीन राज्यों में जीत के बाद भाजपा के हौसले बुलंद है। तीन राज्यों में से दो राज्य राजस्थान
और छत्तीसगढ़ को भाजपा ने कांग्रेस से छीन लिया। मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस की उम्मींदें धराशाही हो
गयी। तेलंगाना को एक क्षेत्रीय पार्टी से छीन कर कांग्रेस ने जरूर कुछ राहत महसूस की है। मगर तीन राज्यों
में भाजपा की शानदार जीत ने कांग्रेस के छक्के छुड़ा दिए। इसे छह महीने बाद होने वाले लोकसभा चुनाव से
पूर्व सेमी फ़ाइनल की संज्ञा दी जा रही है। देश के सामने वर्तमान में तीन मोर्चे की त्रिकोणात्मक लड़ाई है।
पहला मोर्चा भाजपा नीत एनडीए का है तो दूसरा मोर्चा कांग्रेस नीत इंडिया गठबंधन का है। तीसरा मोर्चा
निर्गुट कही जाने वाली क्षेत्रीय पार्टियों का है। तीन राज्यों को जीतने के बाद प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का कद
और देशभर में मोदी की गारंटियों पर लोगों का विश्वास बढ़ा है।
देश के अधिकांश राज्यों में एनडीए और इंडिया गठबंधनों के बीच सीधे मुकाबले के आसार है। उड़ीसा,
तेलंगाना, आंध्र, कर्नाटक, हरियाणा, पंजाब और यूपी जैसे प्रदेशों में त्रिकोणात्मक संघर्ष की संभावनाएं
व्यक्त की जा रही है। एक तरफ भाजपा के नेतृत्व में 38 पार्टियों का एनडीए है। दूसरी तरफ 28 पार्टियों का
इंडिया गठबंधन है। 2019 में भाजपा के नेतृत्व में एनडीए को 45 फीसदी वोट मिले थे। जिसमें अकेले
भाजपा का वोट 37.6 फीसदी था। दूसरी ओर कांग्रेस के साथ जिन पार्टियों की बैठक हुई उन सबको मिला
कर कुल वोट 38 फीसदी के करीब यानी भाजपा के बराबर मिला था। यानी अकेले भाजपा बैठक में शामिल
विपक्ष की सभी पार्टियों पर भारी है। वर्तमान लोकसभा में एनडीए के पास 332 और इंडिया के पास 141
सांसद है। शेष सांसद निर्गुट बताये जाते है।
भाजपा ने लोकसभा चुनाव की तैयारियां जोर शोर से शुरू कर दी है जबकि विपक्षी पार्टियों का
गठबंधनअभी सीट शेयरिंग का मामला भी नहीं सुलझा पाया है। कहा गया है, इस महीने के अंत तक सुलझा
लेंगे। 2014 और 2019 के चुनाव में एनडीए की भारी जीत हुई और नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने
अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। पिछले दो लोकसभा चुनावों में ऐतिहासिक जीत हासिल करने वाली भारतीय
जनता पार्टी ने अपने ‘मिशन 2024’ के तहत नये सिरे से काम करना शुरू कर दिया है।