संसद मार्च पर बवाल, पुलिस कार्रवाई के बीच टूटा अनशन
नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत के साथ ही राजधानी में आयोजित 'संसद मार्च' ने सियासी माहौल गर्मा दिया। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़े, जिससे सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं। हालात बिगड़ने पर संसद भवन के आसपास सुरक्षा और कड़ी कर दी गई तथा मुख्य प्रवेश द्वार को एहतियातन बंद रखा गया।
सुबह जंतर-मंतर से शुरू हुआ मार्च धीरे-धीरे उग्र होता चला गया। प्रदर्शनकारी राजीव चौक और मंडी हाउस की ओर से आगे बढ़ते हुए संसद मार्ग तक पहुंच गए। रास्ते में लगाए गए कई स्तर के बैरिकेड पार करने की कोशिश के बाद पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए पहले चेतावनी दी और फिर आंसू गैस के गोले छोड़े। इसके बाद लाठीचार्ज भी किया गया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। तेज गर्मी और भगदड़ के कारण कुछ प्रदर्शनकारियों की तबीयत भी बिगड़ गई।
इसी घटनाक्रम के बीच आंदोलन में बड़ा बदलाव देखने को मिला। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने घोषणा की कि सरकार की ओर से बातचीत की पहल किए जाने के बाद वह अपना अनशन समाप्त कर रहे हैं। उन्होंने समर्थकों से फिलहाल आंदोलन स्थगित रखने की अपील भी की। पार्टी नेताओं ने बताया कि उनकी ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ बातचीत हुई है।
दूसरी ओर, लंबे समय से अनशन कर रहे ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के तीन सदस्यों ने भी विभिन्न विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की अपील के बाद अपना उपवास समाप्त कर दिया। इससे आंदोलन के स्वर में कुछ नरमी देखने को मिली।
नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद संसद मार्च में शामिल होने की इच्छा जताते रहे। अस्पताल से उन्होंने प्रशासन को पत्र लिखकर डिस्चार्ज की मांग की, लेकिन अनुमति नहीं मिली। इसके बाद उनकी पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने प्रदर्शन का नेतृत्व संभाला और कहा कि यदि सरकार शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर संसद में गंभीर चर्चा का भरोसा देती है तो अनशन समाप्त किया जा सकता है।
दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि नई दिल्ली क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू होने के कारण जंतर-मंतर से किसी भी तरह के मार्च की अनुमति नहीं थी। पुलिस ने लोगों से प्रतिबंधों का पालन करने और भीड़ से दूर रहने की अपील भी की।
इस आंदोलन को कई विपक्षी नेताओं का समर्थन मिला। पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने प्रदर्शन में भाग लेते हुए इसे शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों की लड़ाई बताया। समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय, इकरा हसन और प्रिया सरोज भी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में पहुंचे। वहीं कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी आंदोलनकारियों से मुलाकात कर शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का समर्थन किया।