भारत समेत 60 देशों पर अमेरिकी टैरिफ की तलवार, नया प्रस्ताव चर्चा में
नई दिल्ली। अमेरिका ने वैश्विक व्यापार को लेकर एक नया कदम उठाते हुए भारत सहित 60 देशों और अर्थव्यवस्थाओं पर अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) की ओर से 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत जारी किया गया है।
यूएसटीआर का आरोप है कि कई देशों ने जबरन श्रम (फोर्स्ड लेबर) से तैयार उत्पादों के आयात को रोकने और उन पर प्रभावी निगरानी रखने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि ऐसी स्थिति निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था को प्रभावित करती है और अमेरिकी उद्योगों तथा श्रमिकों के लिए प्रतिस्पर्धा को असमान बनाती है।
प्रस्ताव के अनुसार, जिन देशों में जबरन श्रम से जुड़े उत्पादों के आयात पर रोक लगाने की व्यवस्था पर्याप्त नहीं मानी गई है, उन पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है। भारत भी इसी श्रेणी में शामिल देशों में गिना गया है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राजदूत जैमीसन ग्रीर ने कहा कि वैश्विक व्यापार में समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए सभी साझेदार देशों को अधिक जिम्मेदारी निभानी होगी। उनके अनुसार, जबरन श्रम से जुड़े उत्पादों का कारोबार न केवल श्रमिक अधिकारों के खिलाफ है, बल्कि यह बाजार में असंतुलन भी पैदा करता है।
यूएसटीआर ने यह भी संकेत दिया है कि कुछ देशों को सीमित राहत दी जा सकती है। जिन देशों ने ऐसे उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाने या नियंत्रण के लिए आंशिक कदम उठाए हैं, उनके लिए 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क का विकल्प प्रस्तावित किया गया है।
इसके अलावा, अमेरिका ने कपड़ा और परिधान क्षेत्र के लिए एक विशेष व्यवस्था का सुझाव भी दिया है। इसके तहत कुछ देशों से आने वाले चुनिंदा टेक्सटाइल उत्पादों को निर्धारित सीमा तक कम टैरिफ दर पर अमेरिकी बाजार में प्रवेश की अनुमति मिल सकती है।
फिलहाल यह प्रस्ताव विचाराधीन है और इस पर 7 जुलाई 2026 को सार्वजनिक सुनवाई आयोजित की जाएगी। सुनवाई के दौरान उद्योग जगत, व्यापार संगठनों और अन्य हितधारकों की राय ली जाएगी। इसके बाद प्राप्त सुझावों और प्रतिक्रियाओं के आधार पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो भारत सहित कई निर्यातक देशों के लिए अमेरिकी बाजार में व्यापार लागत बढ़ सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय से पहले अभी कई चरणों की प्रक्रिया बाकी है, इसलिए सभी संबंधित पक्षों की नजर आगामी सुनवाई और उसके बाद होने वाले फैसलों पर टिकी हुई है।