क्यूबा की तेल कंपनी पर अमेरिका का शिकंजा, ट्रंप प्रशासन ने लगाए नए प्रतिबंध
वॉशिंगटन। अमेरिका ने क्यूबा की सरकारी तेल एवं गैस कंपनी यूनियन क्यूबा-पेट्रोलियो (सीयूपीईटी) के खिलाफ नए आर्थिक प्रतिबंधों की घोषणा की है। ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार ऊर्जा संसाधनों का उपयोग जनता की भलाई के बजाय सत्ता बनाए रखने और शीर्ष नेतृत्व के हितों को साधने के लिए कर रही है।
नए प्रतिबंधों के तहत सीयूपीईटी की अमेरिका में मौजूद सभी संपत्तियों और अमेरिकी नागरिकों या संस्थाओं के नियंत्रण में आने वाले हितों को फ्रीज कर दिया जाएगा। साथ ही ऐसे सभी वित्तीय और व्यावसायिक हितों की जानकारी अमेरिकी वित्त मंत्रालय के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) को देना अनिवार्य होगा।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकारी आदेश के तहत सीयूपीईटी को प्रतिबंधित संस्था घोषित करने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि क्यूबा का शासन लंबे समय से ऊर्जा क्षेत्र का इस्तेमाल राजनीतिक नियंत्रण, दमन और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए करता रहा है।
रुबियो के अनुसार, देश में बुनियादी ढांचे में पर्याप्त निवेश नहीं होने के कारण आम नागरिक ईंधन संकट और लगातार बिजली कटौती का सामना कर रहे हैं, जबकि सत्ता से जुड़े लोग ऊर्जा संसाधनों का विशेष लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि क्यूबा के नेतृत्व ने घरेलू जरूरतों के बावजूद तेल और ईंधन को दूसरे बाजारों में बेचा तथा सेना और सुरक्षा एजेंसियों के लिए ऊर्जा भंडार सुरक्षित रखे।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि जहां आम लोग अपनी गाड़ियों के लिए ईंधन पाने में हफ्तों इंतजार करते हैं और बिजली संकट से जूझते हैं, वहीं शीर्ष नेतृत्व विशेष सुविधाओं का लाभ उठाता है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने पर्यटन उद्योग और लक्जरी होटलों को प्राथमिकता देते हुए ऊर्जा आपूर्ति का असमान वितरण किया।
रुबियो ने यह भी आरोप लगाया कि सीयूपीईटी की कुछ महत्वपूर्ण परिसंपत्तियां वर्षों पहले अमेरिकी मालिकों से अवैध रूप से अधिग्रहित की गई थीं। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन क्यूबा के उन आर्थिक स्रोतों को निशाना बनाता रहेगा, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर दमनकारी नीतियों और सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए किया जाता है।
अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंधित संस्था के साथ किसी भी प्रकार के लेन-देन पर रोक रहेगी, जब तक कि ओएफएसी की ओर से विशेष अनुमति न दी जाए। साथ ही क्यूबा से जुड़ी कुछ आर्थिक गतिविधियों में शामिल विदेशी कंपनियां, बैंक और अन्य संस्थान भी प्रतिबंधों के दायरे में आ सकते हैं।
अमेरिका ने कहा कि इन कदमों का उद्देश्य केवल दंडात्मक कार्रवाई करना नहीं है, बल्कि क्यूबा की नीतियों में सकारात्मक बदलाव को प्रोत्साहित करना भी है। गौरतलब है कि अमेरिका और क्यूबा के बीच लंबे समय से तनावपूर्ण संबंध रहे हैं और पिछले छह दशकों से अधिक समय से विभिन्न प्रकार के आर्थिक प्रतिबंध लागू हैं।