पायलट के विजय रथ को रोक सकते है भाजपा के वयोवृद्ध नेता महावीर प्रसाद जैन!
टोंक। सावन की ठंडी फुहारों के कारण जैसे-जैसे गर्मी की तपिश कम होने लगी है, वैसे-वैसे इन दिनों विधानसभा चुनावों के नजदीक आने से राजनीतिक तपीश धीरे-धीरे बढऩे लगी है। वहीं राजनीतिक भविष्य बताने वाले पंडितों ने भी अपने-अपने चोपड़ पासे निकालकर संभावित उम्मीदवारों के भाग्य का लेखा-जोखा जानने में लग गए हैं। वैसे तो टोंक जिले में टोंक सहित निवाई, देवली-उनियारा एवं मालपुरा विधानसभा क्षेत्र आते हैं, लेकिन विगत 2018 के विधानसभा चुनाव में टोंक से कांग्रेस के बड़े नेता सचिन पायलट के चुनाव लडऩे से भाजपा प्रदेश नेतृत्व को भी उन्हीं के समकक्षता रखने वाले मुस्लिम समुदाय के यूनुस खान को पायलट के सामने उतारना पड़ा था, जिसके चलते भाजपा के विधायक अजीत सिंह मेहता के नाम की घोषणा होने के पश्चात भी उनका टिकट वापस लेना पड़ा, लेकिन चुनाव में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा था। सचिन पायलट के कारण आगामी तीन महीनों के बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में टोंक विधानसभा क्षैत्र की सीट ‘‘हॉट सीट’’ बनने के कारण भाजपा व कांग्रेस के स्थानीय चुनाव लडऩे की इच्छा रखने वाले नेताओं की उम्मीदों पर एक बार फिर ओले पड़ते नजर आ रहे हैं। पायलट के कारण कांग्रेस के संभावित उम्मीदवार तो अपनी इच्छा दबी जुबान में भी नहीं बता पा रहे हैं। वहीं भाजपा के सशक्त उम्मीदवार के रूप में पूर्व विधायक अजीत सिंह मेहता एवं नगर परिषद की पूर्व सभापति लक्ष्मी जैन को लेकर चर्चाएं जोर पर है, लेकिन राजनीतिक पंडितों व आम लोगों में यह रोचक चर्चा है कि सचिन पायलट को हराने में अजीत सिंह मेहता एवं लक्ष्मी जैन हालांकि सक्षम नहीं है, लेकिन पूर्व सभापति लक्ष्मी जैन मुस्लिम मतदाताओं में सेंध लगाने में कामयाबी हांसिल कर सकती है। बाजार में इन दिनों चाय-पान की दुकानों पर, यार दोस्तों की पार्टियों व सरकारी दफ्तरों में राजनैतिक चर्चाओं का दौर बहुत जोरों शोरों से शुरू होने लगा है । इन दोनों पूर्व विधायक कांग्रेस की स्वर्गीय जाकिया व पूर्व मुख्य सचेतक टोंक की तकदीर के नाम से जाने जाने वाले भाजपा के कद्दावर नेता पूर्व मुख्य सचेतक प्रसाद जैन के बीच हुए चुनावों के बारे में भी उन दिनों की बातें चटखारे लेकर लोग बातें करते नजर आने लगे हैं। टोंक शहर में इन दिनों हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदाय के मतदाताओं को कहते सुना जा रहा है कि यदि भाजपा की तरफ से पूर्व विधायक महावीर प्रसाद जैन यदि एक बार फिर से टोंक से चुनाव में उतर जाए तो सचिन पायलट की जीत की राह आसान नहीं होगी। लोगों में यह भी चर्चा है कि महावीर प्रसाद जैन के टोंक से चुनाव लडऩे पर भाजपा में व्याप्त भारी गुटबाजी स्वत: ही समाप्त हो जाएगी, जिससे भाजपा के बूढ़े शेर को पायलट शायद ही हरा पाए या यूं कहो कि यदि जैन की उम्मीदवारी समय रहते घोषित हो जाए तो सचिन पायलट को अपना विधानसभा क्षेत्र बदलने के लिये सोचना पड़ सकता है, क्योंकि इस बार एक तो टोंक के मुस्लिम नेता अंदरूनी रूप से पायलट की तरफ से इन पांच सालों में हुई उपेक्षा के कारण नाराज चल रहे हैं, लेकिन वह बेचारे खुलकर अपना विरोध नहीं जता पा रहे है, हां उन्हें आचार संहिता के लगने का इंतजार जरूर है। वहीं दूसरी ओर इस बार कांग्रेस के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए आप एवं असदुद्दीन ओवैसी की, ए आई एम आई एम पार्टी टोंक में दस्तक दे चुकी है। राजनीतिक अपुष्ठ मिली एक महत्वपूर्ण जानकारी के अनुसार भाजपा का प्रदेश नेतृत्व सचिन पायलट के सामने बाहरी उम्मीदवार के बजाय स्थानीय उम्मीदवार उतारने का मन शायद बना चुका है, जिसके चलते चार बार टोंक विधायक रहे वयोवृद्ध महावीर जैन को एक बार फिर से चुनाव लड़ाया जा सकता है?, इसके लिए प्रदेश नेतृत्व ने टोंक के स्थानीय भाजपा नेताओं की राय भी मांगी जाना ज्ञात हुआ है, तथा जिसके बाद महावीर प्रसाद जैन की राय भी जाननी चाही, जिसके चलते शायद उन्होंने भी अपनी सहमति जाहिर कर दी है ,लेकिन उसकी पुष्टि अभी नहीं करी जा सकती है, क्योंकि चुनावों के समय ऐसी चर्चाएं अक्सर सुनी व कही जाती रही है। अभी तो बस लोगों का मानना है कि टोंक में महावीर प्रसाद जैन के चुनाव मैदान में उतरने से सचिन पायलट की जीत की राह मुश्किल हो जाएगी, जिसके कारण सचिन पायलट को अपना विधानसभा क्षेत्र बदलना भी पड़ सकता है, जैसा कि समाचार भी मिल रहे है कि पायलट अपना चुनाव क्षेत्र बदल सकते है। इसमें यहां एक महत्वपूर्ण बात पैदा होगी कि महावीर प्रसाद का मुकाबला कौन अल्पसंख्यक उम्मीदवार कर सकता है, तो कांग्रेस प्रदेश नेतृत्व को निज़ाम बीड़ी फैक्टरी के उधोग पति मोइनुद्दीन निजाम की ओर देखना पड़ेगा, वरना अन्य कोई मुस्लिम या हिंदू कांग्रेसी उम्मीदवार महावीर जैन का शायद ही मुकाबला कर सके। राजनीतिक लोगों का यह भी मानना है कि यदि जैन चुनाव लड़ते हैं तो टोंक में उनके समर्थक जो राजनीति से दूर हो गए थे, ऐसे बीजेपी नेताओं में नया जोश का संचार होने से चुनाव रोचक हो जाएगा । यदि सचिन पायलट के सामने कोई ओर भाजपा नेता को उतारा जाता है तो उसकी हार से टोंक में भाजपा के लिए 10 साल की रिक्तता आ जाएगी, जिससे मालपुरा में बार-बार हारने से कांग्रेस की दशा हो गई है, वैसी टोंक में दो बार हारने पर भाजपा की हो जाएगी।