सड़क पर पैदल चलना भी मौलिक अधिकार, फिर फुटपाथ क्यों बेहाल ?
-सुनील कुमार महला
सड़क पर पैदल चलना मौलिक अधिकार है, लेकिन आज भारत के कई शहरों में पैदल चलना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है। दरअसल, आज भी बहुत से शहरों में फुटपाथ या तो बने ही नहीं हैं, या उन पर अतिक्रमण, पार्किंग और निर्माण सामग्री के कारण लोगों के चलने की जगह नहीं बचती। ऐसे में यहां पर प्रश्न यह उठता है कि जब किसी व्यक्ति के पास सड़क पर सुरक्षित रूप से पैदल चलने की जगह ही नहीं है, तो उसे वास्तव में आवागमन की आजादी कैसे मिल सकती है ?
उक्त संदर्भ में यहां पाठकों को जानकारी देना चाहूंगा कि कुछ समय पहले ही यानी कि 19 जून 2026 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह कहा है कि सुरक्षित और निर्धारित पैदल मार्ग पर चलना भी संविधान के अनुच्छेद 19(1)(डी) के तहत आवागमन के मौलिक अधिकार का हिस्सा है। वास्तव में, यह मामला उस दुखद घटना से जुड़ा हुआ था, जिसमें पांच साल के एक बच्चे की सड़क पर टैंकर की चपेट में आने से मौत हो गई थी। वहां न फुटपाथ था और न ही सड़क पार करने की सुरक्षित व्यवस्था। कहना ग़लत नहीं होगा कि आज कई भारतीय शहरों में फुटपाथ पर अतिक्रमण, टूटे या गायब फुटपाथ, सड़क पार करने के लिए अपर्याप्त क्रॉसिंग, तेज रफ्तार वाहन और यातायात नियमों का उल्लंघन पैदल यात्रियों के लिए जोखिम बढ़ाते हैं और हमारे देश में पैदल यात्रियों की सुरक्षा अभी भी एक गंभीर चुनौती है। आंकड़ों की बात करें तो सरकारी 'भारत में सड़क दुर्घटनाएँ-2023 के अनुसार, वर्ष 2023 में 35,221 पैदल यात्रियों की सड़क दुर्घटनाओं में मौत हुई, जो कुल सड़क दुर्घटना मौतों का 20.4% थी।सच तो यह है कि आज पर्याप्त पैदल यात्री बुनियादी ढाँचे की आवश्यकता है। यहां पाठकों को बताता चलूं कि फुटपाथों का निर्माण और रखरखाव मुख्यतः राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों के दायरे में आता है, इसलिए सरकारों और संबंधित निकायों को इन पर ध्यान देना चाहिए। यहां पाठकों को बताता चलूं कि वैसे विश्व में सड़क की गुणवत्ता, फुटपाथ, पैदल पार-पथ, ट्रैफिक नियंत्रण और पैदल यात्रियों की सुरक्षा के मामलों में नीदरलैंड को दुनिया के सबसे अच्छे उदाहरणों में गिना जाता है। सच तो यह है कि नींदरलैंड पैदल चलने के लिए दुनिया में एक अग्रणी देश है, जहां पैदल और साइकिल यात्रियों के लिए अलग एवं सुरक्षित मार्ग, कम गति वाले क्षेत्र और बेहतर सड़क डिजाइन उपलब्ध हैं। नींदरलैंड के बाद डेनमार्क विशेषकर कोपेनहेगन में पैदल यात्रियों के लिए सुव्यवस्थित फुटपाथ, क्रॉसिंग और ट्रैफिक-शांत क्षेत्र हैं। वहीं पर स्वीडन विश्व में कम पैदल मृत्यु दर और मजबूत सड़क-सुरक्षा व्यवस्था के कारण अग्रणी देशों में शामिल है।नॉर्वे(यूरोप में) तथा फिनलैंड भी पैदल मार्गों और सड़क पार करने की सुरक्षित व्यवस्था के मामले में विश्व में अहम् और महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
हाल फिलहाल, यहां यह कहना चाहूंगा कि 19 जून 2026 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने सड़क पर पैदल चलने के संदर्भ में जो फैसला दिया है,इस फैसले का सीधा सा संदेश यही है कि सरकार और स्थानीय निकायों की यह जिम्मेदारी है कि ये लोगों को सुरक्षित फुटपाथ और सड़क पार करने की उचित सुविधा उपलब्ध कराएं। वास्तव में,सच तो यह है कि नगर निगम, नगरपालिका, शहरी विकास प्राधिकरण और पंचायतों को आगे आकर इस दिशा में गंभीरता और संवेदनशीलता से काम करना होगा।बहरहाल, यदि हम यहां पर आंकड़ों की बात करें तो, आंकड़े हमारी चिंताएं बढ़ाते हैं। यह बहुत ही दुखद है कि सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों में लगभग 20 प्रतिशत से अधिक लोग पैदल यात्री होते हैं। कई शहरों में फुटपाथ टूटे हुए, संकरे, असुरक्षित या लगातार बाधित पाए गए हैं। यानी समस्या केवल फुटपाथ बनाने की नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित, चौड़ा, समतल और सभी के लिए सुगम बनाने की है। वास्तव में,इसके लिए यह बहुत ही जरूरी है कि फुटपाथों पर अतिक्रमण और अवैध पार्किंग न हो, वहां पर पर्याप्त रोशनी हो, सड़क पार करने के लिए सुरक्षित क्रॉसिंग बने और दिव्यांगजनों के लिए रैंप तथा अन्य सुविधाएं उपलब्ध हों। सड़क की खुदाई या निर्माण कार्य के दौरान भी पैदल यात्रियों के रास्ते को पूरी तरह बंद नहीं किया जाना चाहिए।