पश्चिम एशिया तनाव का असर, शेयर बाजार खुलते ही धड़ाम
मुंबई। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार दबाव में नजर आया। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों के बीच निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिससे बाजार में शुरुआत से ही बिकवाली हावी रही।
कारोबार शुरू होते ही बीएसई सेंसेक्स 800 अंक से अधिक टूटकर 73,421 के करीब पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 23,100 के स्तर से नीचे फिसल गया। दोनों प्रमुख सूचकांकों में करीब एक प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इजरायल और ईरान के बीच बढ़ती टकराव की स्थिति से कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है, जिसका असर दुनिया भर के वित्तीय बाजारों पर दिखाई दे रहा है।
कच्चे तेल की कीमतों में भी जोरदार तेजी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड में भी चार प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी देखी गई। ऊर्जा कीमतों में यह उछाल आयातक देशों के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। इसके अलावा मेटल, ऑटो और आईटी सेक्टर में भी व्यापक बिकवाली रही। बाजार के प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में विप्रो, टीसीएस, टाटा स्टील, हिंदाल्को, जेएसडब्ल्यू स्टील, बजाज फाइनेंस और श्रीराम फाइनेंस शामिल रहे।
कमजोरी केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों ने मुनाफावसूली की। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में करीब एक प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार में डर और अनिश्चितता का अंदाजा इंडिया वीआईएक्स से लगाया जा सकता है, जो करीब 15 प्रतिशत उछलकर 18 के आसपास पहुंच गया। आमतौर पर वीआईएक्स में बढ़ोतरी निवेशकों की बढ़ती चिंता और बाजार में अस्थिरता का संकेत मानी जाती है।
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी फिलहाल महत्वपूर्ण तकनीकी स्तरों के नीचे कारोबार कर रहा है और इसमें कमजोरी का रुझान बरकरार है। उनके मुताबिक 23,000 के आसपास मजबूत सपोर्ट दिखाई दे रहा है, जबकि 23,500 से 23,700 का दायरा निकट भविष्य में प्रमुख रेजिस्टेंस बन सकता है।
वैश्विक बाजारों में भी कमजोरी का माहौल रहा। जापान का निकेई सूचकांक करीब 4 प्रतिशत लुढ़क गया, दक्षिण कोरिया का कॉस्पी 5 प्रतिशत तक टूट गया, जबकि हांगकांग का हैंगसेंग भी लाल निशान में कारोबार करता दिखाई दिया।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक पश्चिम एशिया में हालात सामान्य नहीं होते और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।