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क्या फल प्राप्त होता है रूद्राक्ष धारण करने से: आचार्य रूद्र देव त्रिपाठी

क्या फल प्राप्त होता है रूद्राक्ष धारण करने से: आचार्य रूद्र देव त्रिपाठी

गंगापुर भीलवाड़ा. सहाड़ा चौराहा,रिको एरिया स्थित वृंदावन कॉलोनी में प्रकाश टांक परिवार द्वारा आयोजित श्री नर्मदेश्वर महादेव मंदिर परिसर में नो दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा के तृतीय दिवस में व्यास पीठ पर विराजित विद्वान पंडित अंतरराष्ट्रीय कथा प्रवक्ता आचार्य रूद्र देव त्रिपाठी जावद वालों ने रुद्राक्ष की महिमा बताते हुए कहा कि एक समय भगवान शिव लीला मात्र से नेत्र बंद करके बैठे हुए थे कि उनकी आंखों से अश्रु बिंदु निकल पड़े जिस स्थान पर वह अश्रु गिरे वहां पर रुद्राक्ष की उत्पत्ति हुई रुद्र कहते हैं शिव को अक्ष कहते हैं आंसू को शिव की आंख से निकले हुए आंसू से रुद्राक्ष की उत्पत्ति हुई। आपने बताया कि रुद्राक्ष 14 प्रकार के होते हैं। एक मुखी रुद्राक्ष भक्ति मुक्ति एवं लक्ष्मी प्राप्ति के लिए, दो मुखी गौ हत्या के पाप से मुक्त होने के लिए, तीन मुखी सांसारिक सुख साधन एवं विद्या प्राप्ति के लिए, चार मुखी नर हत्या के पाप से मुक्ति के लिए, पांच मुखी सर्व मनोकामना सिद्धि के लिए, 6 मुखी ब्रहम हत्या के पाप से मुक्ति के लिए, सात मुखी संपत्ति के लिए, अष्ट मुखी पूर्ण आयु के लिए, 9 मुखी वैराग्य के लिए, 10 मुखी विशिष्ट मनोकामना के लिए,11 मुखी हर स्थान पर विजय के लिए, 12 मुखी तेज बढ़ाने के लिए, 13 मुखी सर्व कामना सिद्धि एवं सौभाग्य के लिए तथा 14 मुखी रूद्राक्ष सभी रोगों से मुक्ति के लिए धारण करना चाहिए। नारद मोह की कथा सुनाते हुए आपने बताया कि माया संसार में दो ही है एक स्त्री और दूसरा धन और अपना कल्याण चाहने वाले मनुष्य को कभी भी माया के पीछे नहीं भागना चाहिए यह सब दुखों के कारक है। संत हमें माया से बचाते है इसलिए संतो का संग करना चाहिए। यहअनमोल मनुष्य जीवन ईश्वर की आराधना के लिए मिला है मनुष्य जीवन का अंतिम लक्ष्य जीते जी ब्रह्मकी प्राप्ति होना चाहिए। भागदौड़ की जिंदगी में हमें ज्यादा समय नहीं मिले तो 24 घंटे में कम से कम 5 मिनट एकांत मे बैठकर एकाग्र चित्त से ईश्वर का ध्यान करना चाहिए एकांत कहते हैं जहां एक का भी अंत हो अर्थात उन 5 मिनट में हमें अपना भी बोध ना रहे भगवान के ध्यान में इतना लीन हो जाएं। गुरुदेव ने कहा कि अपना दुख कभी भी दुनिया वालों को ना बताएं वे कभी भी आपके दुख को हल्का नहीं कर सकते हैं अपना दुख या तो गुरु को सुनाएं या भगवान शिव को क्योंकि दुख या संकट के समय गुरु या ईश्वर ही हमारी सहायता करते हैं और उस संकट से हमें उबारते हैं। जो मनुष्य चलते फिरते जीते जाते इंसान में भगवान के दर्शन नहीं कर सकता वह पत्थर की प्रतिमा में भगवान के दर्शन क्या करेगा मानव सेवा ही माधव सेवा है जो दूसरों की सहायता करता है परोपकार की भावना रखता है पराये दुख को अपना दुख समझता है भगवान शिव उससे बहुत प्रसन्न होते हैं और अपनी पूर्ण कृपा उस पर बरसाते हैं। कथा के बीच में मधुर मधुर भजनों पर श्रोता मंत्र मुक्त हो गए आज के मुख्य अतिथि सहाड़ा विधानसभा क्षेत्र की लोकप्रिय विधायक श्रीमती गायत्री तिवारी जी ने सपरिवार व्यासपीठ का पूजन किया एवं सभी विप्रगणों का स्वागत किया तथा गुरुदेव से आशीर्वाद प्राप्त किया।
संपूर्ण कथा का रुद्रदेव त्रिपाठी यूट्यूब चैनल पर लाइव प्रसारण हो रहा है चैनल को सब्सक्राइब करें और घर बैठे कथा का आनंद लें। कथा के मुख्य यजमान लोकप्रिय समाजसेवी प्रकाशजी टांक ने नगर एवं आसपास के क्षेत्र की जनता से कथा में पधारने का भावपूर्ण आग्रह करते हुए बताया कि यह आयोजन 16 अगस्त तक चलेगा अतः अधिक से अधिक संख्या में पधार कर इस आयोजन का लाभ उठावें।

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