कहां ले जाएंगी ये महापंचायतें व जातीय बोर्ड
भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है इस राज्य में सभी जाति, धर्म, लिंग का भेदभाव नहीं है राष्ट्र के संविधान में हमारी आस्था है। संविधान लिखित व लचीला है। काफी अर्से से हम देख रहे हैं कि हमारे देश के अंदर जातिवाद , अलगाववाद ,भाशावाद ,क्षेत्रीयता व धर्म विशेष पर ज्यादा लोगों को बहलाया फुसलाया जा रहा है आज हमारे देश को जरूरत है कि हम सब एक संविधान का पालन करते हुए राष्ट्र को ऊंचाई प्रदान करें परंतु देखने में आया है कि आज जितने भी राजनीतिक दल हैं वह अपने अपने हिसाब से लोकतंत्र को प्रलोभन प्रस्तुत कर रहे हैं सामाजिक सौहार्द को भी कुछ अलग से ही प्रस्तुत कर रहे हैं ऐसे में आज आम आदमी की आवाज सिमटती जा रही है । ऐसा लगता है कि हमारा समाज किस दिशा की ओर बढ़ रहा है । सदियों से हमारे देश में जाति प्रथा ने हमें झकझोर कर रख दिया था वही परंपरा आज सारे देश में शुरू होने के दुष्परिणाम भी देखने को मिल रहे एमएल है ।
आज राजनीति का स्तर भी धार्मिक मानसिकता के आधार पर चलाने का जो सिलसिला चल रहा है वह देश के लिए कहीं ना कहीं घातक सिद्ध होगा जब हिंदू राष्ट्र की बात करेंगे तो अन्य लोग भी कई बार खड़े हुए हैं और खड़े होने के कगार पर हैं तो हमें ओछे हथकंडे अपनाकर राष्ट्रहित में देश की राजनीति व समाज में जहर घोलने का काम नही करना चाहिए , चाहे वे टिकट वितरण का या किसी जाति विशेष को प्रलोभन देकर यह आचरण जो किया जा रहा है कहां तक उचित है ? इसे आजकल सोसिल इंजीनियरिंग के रूप में हम सब देख रहे हैं। हमारे समाज में वहीं ऊंच नीच वापस शुरू होने जा रही है ।समाज के नाम से जाति के नाम से जो महापंचायत ,महाकुंभ हो रहे हैं वे साजिश के तौर पर सरकारॉ मे बैठे लोगो द्वारा व चंद पदलोलुप लोगो द्वारा किया जा रहा कृत्य है। एक पैंतरा सरकार ने जाति विशेष के लोगों को साधने के लिए कल्याण बोर्ड गठन के नाम से किया जा रहा है यह भी बहुत दुखदाई होगा । आज के दौर में सभी समाज के जाति विशेष के लोग शक्ति प्रदर्शन करते हुए यह जताना चाहते हैं कि हमारी जाति को भी वह सभी सुविधाएं सरकार द्वारा मिलनी चाहिए जबकि संविधान में अधिकार एवं कर्तव्य की बात कही गई है नीति निर्देशक तत्व की बात की गई है नीतिपरक जो भी सुविधाएं देश के नागरिक को मिलनी चाहिए उनका हमारी सरकार को आचरण में लाना चाहिए जबकि आज देश में जो शोषित वर्ग हैं उपेक्षित वर्ग हैं वह उसी श्रेणी में है और जो लोग सता व सरकार में अपना कब्जा आबादी के अनुपात से भी अधिक प्राप्त कर रहे हैं जो हमेशा सदियों से उपेक्षित थे वे आज भी उपेक्षित हैं और जो सदा सता व सरकार में रहे हैं वह भी आज महापंचायत कर रहे हैं इससे ऐसा लगता है कि फिर से जातीय जहर एक बार राष्ट्र की दीमक न बन जाए जबकि हम संविधान में यह अंगीकार कर चुके हैं कि किसी के साथ जाति धर्म लिंग के आधार पर कोई भेद नहीं किया जाएगा सबको समान समझा जाएगा पर ऐसा अब जो डॉक्टर अंबेडकर ने सविधान दिया था उससे हटकर अब हमारी मानसिकता बनती जा रही है । आज हमारे राज्य में हर जाति अपना प्रदर्शन महापंचायत महा कुंभ , अधिवेशन आदि कई नामों से किए जा रहे हैं , यह कहां तक उचित है इस पर भी गौर करना होगा वैसे भी हमारे समाज में जाति धर्म के आधार पर काफी वर्षों से यह भेदभाव मिट् सा गया था ऐसा लगता है कि आज जातीय सम्मेलनों से आपसी दूरियां समाज में बढ़ने के दुष्परिणाम भी हमारे सामने आ सकते हैं नीति निदेशक तत्वों के आधार पर जो भी कमजोर तबके के लोग हैं उनको ऊंचा उठाने का प्रयास किया जा सकता है ।अभी वर्तमान में राजस्थान सरकार द्वारा कल्याण बोर्ड बनाने का सिलसिला भी शुरू हो गया है सभी जाति के लोग कल्याण बोर्ड की मांग कर रहे हैं ऐसे में हर जाति जब sc-st ओबीसी अन्य प्रकार के लाभ ले रहे हैं ओबीसी की जितनी भी जातियां , जनगरीब स्वर्णो को आरक्षण का लाभ मिल रहा है उनके भी बोर्ड बन रहे हैं जबकि मुस्लिम लोगों को धर्म के आधार पर वह सुविधा देने से सरकार नक्कार रही है मुस्लिम समुदाय अल्पसंख्यक श्रेणी में आता है मुस्लिमों में भी शिक्षा की कमी है इस कारण मुस्लिमो को जो सुविधा नही मिल पाती क्योंकि अन्य अल्पसंख्यक जो पढ़े लिखे हैं जैसे जैन ,सिख ,पारसी, ईसाई आदि को मिल जाती है ,मुस्लिम तो ठगा ही जाता रहा है । मुस्लिमों की पीड़ा भी स्वाभाविक है कि जिन लोगो के लिए बोर्ड फाउडेशन बने हैं वे सभी एस सी , ओबीसी व स्वर्ण मूलरूप से तो हिंदू ही है राजस्थान सरकार का चरित्र भी सामने आ गया वो मुस्लिमो के कितने हितेषी हैं । हां तो मानना होगा कि sc-st में शिक्षा की कमी है स्वर्णो में भी अशिक्षित हैं बात यह नहीं है कि हम महासम्मेलन करें महाकुंभ करें इससे हर जाति धर्म के लोग अपने हक की बात करेंगे तो फिर सविधान की मूलभूत भावनाओं से हम कहीं भटक नहीं जाएंगे राजस्थान सरकार ने वर्तमान में जो कल्याण बोर्ड बनाए हैं इससे लगता है यह अब हर जाति अपने कल्याण की बात करेगी तो फिर कितने बोर्ड बनेंगे कितने लोगों की राजनीतिक जिज्ञासाओं को शांत किया जाएगा यह सोचनीय विचार है हमें सोचना होगा कि देश के नागरिक कोई भी हो उनको सविधान के अंतर्गत वह सभी अधिकार दिए गए हैं उनका पालन हो किसी भी जाति विशेष धर्म के लोगों की उपेक्षा न हो ,जब हमारा देश एक है हमें सभी भेदभाव भूलाकर देश में सौहार्दपूर्ण वातावरण के अंतर्गत राजनीतिक विचारधारा के लोगों को देश के संविधान के अनुसार आचरण करना चाहिए । मुस्लिम समुदाय मे अनेक जातियां व उप जातियां हैं शिक्षा से वंचित वसामाजिक रुप से पिछड़ी जातियों के भी बोर्ड बन चाहिए , उत्तरी पश्चिमी सीमांत की क्षेत्र की मुस्लिम जातियों की फिर उपेक्षा क्यों कल ही वैशाखी पे सिक्ख समाज समाज को भी कल्याण बोर्ड का तोफ़ा दिया है , मुस्लिम समुदाय में भी राजस्थान सरकार के प्रति आक्रोश है जब आप ये रेवड़ियां बांट ही रहे हैं तो भेद भी न हो ये सब कब तक चलेगा ।
मेरा यहां यह सवाल है आम लोगों की बात व विचार भी है कि हम कौन से युग में जा रहे हैं ?क्या इन महा पंचायतों से व इन कल्याण बोर्ड से आमजन का जीवन स्तर बढ़ जाएगा ? वैसे लगता है कि मेरे विचार से हम भटक रहे हैं लोगों में निराशा है रोग मरीचिका जैसी बीमारी से ग्रस्त देखे जा रहे हैं । यह महापंचायते आए दिन हो रही है व कल्याणकारी बोर्ड आए दिन बन रहे हैं चारों तरफ लोग इस जंजाल में अपने समाज को झोंक रहे हैं ।यह आम लोगों के लिए न होकर कुछ ऐसे व्यक्ति विशेष लोग होते हैं जिनको सत्ता व सरकार में स्थापित होने का जरिया बनना है आम लोग धर्म व जाति के अफीम रूपी नशे में चंद लोगों के इशारों पर इन महा पंचायतों एवं कल्याणकारी बोर्डों के लिए अपने समय व धन को खर्च करने में लगे रहते हैं यह सब विचारणीय है हम सबको इन पर विचार करना चाहिए क्या यह महापंचायते हमें कहा ले जाएगी सोचिए आम लोगों के लिए सोचिए यह एक आज के माहौल में एक सोचनीय व विचारणीय प्रश्न है ? जो आप तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा हूं मेरा कतई किसी जाति धर्म से किसी प्रकार की दवैषता की भावना कतैई नही है ।