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 कौन बनेगा कांग्रेस पार्टी का बीकानेर लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार

 कौन बनेगा कांग्रेस पार्टी का बीकानेर लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार

 क्या कांग्रेस पार्टी का आला कमान कांग्रेस को वोट देने वाले समाज के प्रतिष्ठित रहनुमाओं की सलाह पर टिकट देने का निर्णय लेंगें  
यदि सही प्रत्याशी को टिकट नहीं दिया गया तो क्षेत्र के मुस्लिम समाज में हो सकती है नाराज़गी 

             
बीकानेर। बीकानेर लोकसभा क्षेत्र का इतिहास रहा है कि जनता के मन मुताबिक़ प्रत्याशी को जब भी टिकट ना देकर मतदाताओं पर थोपने का प्रयास किया गया है तो उस निर्णय को जनता द्वारा बैरंग वापस लौटा दिया गया है ।
रेवन्त राम पंवार सन 1993 में नोखा में भाजपा से विधायक बने, सन 1998 में उन्होंने फिर  कांग्रेस पार्टी को ज्वॉइन कर लिया और कांग्रेस पार्टी की टिकट पर नोखा से विधायक बन गए । सन 2003 में भाजपा ने नोखा से गोविन्द राम चौहान को टिकट दी और वे नोखा से विधायक बन गए ।
उस वक्त जनता में चर्चा थी कि कांग्रेस पार्टी के लोकल बड़े नेताओं की रेवन्त राम पंवार से नाराज़गी हो गई, और मनमुटाव भी इतना बड़ा हो गया था कि  नोखा विधानसभा क्षेत्र की सीट कांग्रेस पार्टी से दूर चली गई ।
भाजपा के विधायक गोविन्द राम चौहान चुनाव जीत गए, उन को वसुन्धरा राजे सिंधिया ने संसदीय सचिव भी बनाया लेकिन फिर बीच में ही हटा दिया था ।
इसी समय नोखा के एक कांग्रेस नेता के समर्थन की आवाज़ की गूंज विधानसभा में भी सुनी गई थी ।
सन 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी द्वारा नोखा के पूर्व विधायक रेवन्त राम पंवार को टिकट दे दी गई, कहते हैं नोखा के कांग्रेस नेताओं की नाराज़गी और मतभेद दूर नहीं हुए, जिसका खामियाजा कांग्रेस पार्टी को भुगतना पड़ा था ।
चुनाव में नोखा विधानसभा क्षेत्र में केवल मात्र 24.88 प्रतिशत ही मतदान हुआ और पूरे बीकानेर लोकसभा क्षेत्र में मात्र 41.81 प्रतिशत वोट कास्ट हुए और कांग्रेस पार्टी के प्रत्यासी रेवन्त राम पंवार की 19,575 वोट से हार हो गई ।
सन 1996 के लोकसभा चुनाव में भी कमोवेश यही हालात रहे थे जब कांग्रेस पार्टी ने मनफूल सिंह भादू को टिकट दिया, भाजपा से महेन्द्र सिंह भाटी और बसपा से दिलीप मारवाल चुनाव मैदान में उतरे ।
क्षेत्र के मुस्लिम समाज में कोई इंटरेस्ट और जोश नहीं रहा, मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में भी बेहद कम वोट डाले गए, यहां तक कि कई मुस्लिम बहुल क्षेत्र के बूथ में तो 17 प्रतिशत की ही कास्टिंग हो पाई ।
नतीजा यह हुआ कि कांग्रेस पार्टी के प्रत्यासी मनफूल सिंह भादू करीबन 35,000 वोट से चुनाव हार गए ।
परिसीमन के बाद लगातार तीन दफा भाजपा के अर्जुन राम जी चुनाव जीत रहे हैं । सन 2014 और 2019 के चुनाव में तो कोई मुक़ाबला ही नहीं बन पाया । शंकर पन्नू जी लगभग 3,08,000 वोट से और मदन गोपाल पंवार 2,64,000 वोट से चुनाव हार गए । आरोप है कि चुनाव में कांग्रेस के बड़े नेताओं ने कोई मेहनत नहीं की, अलबत्ता कार सेवा ज़रूर की गई, उम्मीदवार को अपने हाल पर ही छोड़ दिया गया ।
अब तीन महीने में ही चुनाव होना है । हालांकि मदन गोपाल पंवार की व्यक्तिगत प्रतिष्ठा बहुत अच्छी है लेकिन शायद आला कमान उनके नाम पर सहमति नहीं दे रहे हैं । कांग्रेस से तीन नाम सामने आ रहे हैं ? पहला अनुपगढ़ की विधायक शिमला नायक, दूसरा खाजूवाला से चुनाव हारे हुए नेता पूर्व मंत्री गोविन्द राम चौहान और तीसरा नाम बीकानेर जिला प्रमुख मोडा राम मेघवाल का लिया जा रहा है ।
इन तीनों में मोडा राम मेघवाल को ज्यादा मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा है ।
मोडा राम मेघवाल की व्यक्तिगत प्रतिष्ठा बेहद अच्छी बताई जा रही है, यह पहले नोखा क्षेत्र में प्रधान भी रहे हैं और अभी जिला प्रमुख है, लेकिन इन पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप जनता के बीच नहीं आया है ।
इसके अलावा एक बेहद रोचक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है कि मेघवाल समाज में भी जाटा मेघवाल और बस्सी मेघवाल के नाम से दो मेघवाल समाज गांवों में रहते हैं ।
राजपूत गांवों में अधिकतर बस्सी मेघवाल रहते हैं और जाटों के गांवो में जाटा मेघवाल रहते हैं ।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पहले तो साधारणतया इनमें रिश्ते भी नहीं किए जाते थे लेकिन अब बहुत सारे रिश्ते होने लग गए हैं ।
प्राप्त जानकारी अनुसार बीकानेर लोकसभा क्षेत्र में जाटा मेघवालों की जनसंख्या अधिक है क्योंकि क्षेत्र में जाटों के गांव अधिक है ।
जानकारी मिली है कि मोडा राम मेघवाल जाटा मेघवाल है ।
इसलिए भी मोडा राम को मज़बूत माना जा रहा है ।
बीकानेर लोकसभा क्षेत्र के मुस्लिम समाज में रोष है कि कांग्रेस पार्टी द्वारा मुस्लिम समाज को केवल मात्र वोट बैंक ही समझा जाता है ।
यह धारणा मानी जा रही है कि मुसलमान भाजपा को वोट नहीं देगा । हाल ही के विधानसभा चुनाव में खाजूवाला क्षेत्र के मुस्लिम समाज ने इस गलतफहमी को दूर कर दी थी और बेहद जोश के साथ अपने घर के साधनों से जाकर भाजपा के डॉक्टर विश्वनाथ मेघवाल को वोट दिए और जीत दिलाई थी ।
मुस्लिम समुदाय में चर्चा है कि यदि लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस पार्टी ने टिकट का वितरण सही नहीं किया तो कांग्रेस को नुकसान पहुंच सकता है ।
ऐसे में कांग्रेस पार्टी को बेहद सावधानी बरतनी होगी और मुस्लिम समाज को भरोसे में लेना जरूरी होगा ।
भाजपा में भी किसी नए उम्मीदवार पर दांव खेला जा सकता है ।
डॉक्टर विमला विश्वनाथ और अजमेर में कार्यरत एक डॉक्टर के नाम की भी जनता में चर्चा जोरों पर चल रही है ।
देखते हैं ऊंट किस करवट बैठता है ।

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