Dark Mode
भारत क्यों पाकिस्तान को बार – बार POK खाली करने को कहता है ?

भारत क्यों पाकिस्तान को बार – बार POK खाली करने को कहता है ?

भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को आईना दिखाया है. यूएन में भारत ने पाकिस्तान को दो टूक कहा कि, पाक पीओके खाली करें. भारतीय इलाके में पाकिस्तान अवैध कब्जा छोड़े. एन में भारत की सचिव पेटल गहलोत ने कहा कि पाकिस्तान को तीन कदम उठाने होंगे. पहला सीमा पार से आतंकी घुसपैठ को बंद करें उसके साथ ही आतंकी ठिकानों को तुरंत ध्वस्त करे. दूसरा अवैध कब्जा किए गए भारतीय इलाकों को तुरंत खाली करे. उन्होंने ये भी कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यतकों और उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन करना बंद करें.

यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारतीय मिशन की 1st सेक्रेटरी और युवा राजनयिक पेटल गहलोत कहना है कि जब भारत के खिलाफ आधारहीन और दुर्भावनापूर्ण प्रचार करने के लिए इस अगस्त मंच का दुरुपयोग करने की बात आती है तो पाकिस्तान एक आदतन अपराधी बन जाता है. संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश और अन्य बहुपक्षीय संगठन अच्छे से जानते हैं कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान मानवाधिकारों पर अपने ख़राब रिकॉर्ड से हटाने के लिए ऐसा करता है. हम फिर दोहरा देते हैं कि जम्मू -कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश भारत का अभिन्न अंग हैं. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों से संबंधित मामले पूरी तरह से भारत के आंतरिक मामले हैं. पाकिस्तान को हमारे घरेलू मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है.' 

पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए भारतीय राजनयिक ने दोहराया कि दुनिया के सबसे खराब मानवाधिकार रिकॉर्ड वाले देश के रूप में, खासकर जब अल्पसंख्यकों और महिलाओं के अधिकारों की बात आती है, तो दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र पर उंगली उठाने से पहले पाकिस्तान को अपना घर संभालना चाहिए. पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ सरकारी हिंसा का एक ज्वलंत उदाहरण अगस्त 2023 में पाकिस्तान के फैसलाबाद जिले के जारनवाला में अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय के खिलाफ बड़े पैमाने उदाहरण अगस्त 2023 में पाकिस्तान के फैसलाबाद जिले के जारनवाला में अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय के खिलाफ बड़े पैमाने पर की गई क्रूरता थी, जहां कुल 19 चर्च जलाए गए और 89 ईसाई घर जला दिए गए. अहमदिया लोगों के साथ भी ऐसा ही यवहार किया गया है, जिनके धार्मिक स्थलों को ध्वस्त कर दिया गया.

भारत का कहना है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों, विशेषकर हिंदू, सिख और ईसाइयों की महिलाओं की स्थिति दयनीय बनी हुई है. पाकिस्तान की ही मानवाधिकार आयोग द्वारा हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में हर साल अल्पसंख्यक समुदायों की अनुमानित 1000 महिलाओं को अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन और जबरन विवाह का शिकार बनाया जाता है.भारत ने कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित सर्वाधिक आतंकवादी संस्थाओं और व्यक्तियों का पनाहगार और संरक्षक रहा है.

पाकिस्तान को दो टूक जवाब देते हुए भारत ने आगे कहा कि और वह पीओके को खाली करे और तकनीकी कुतर्क में उलझने के बजाय मुंबई आतंकवादी हमलों के अपराधियों के खिलाफ विश्वसनीय कार्रवाई करे जिनके पीड़ित 15 साल बाद भी न्याय का इंतजार कर रहे हैं.

इससे पहले पाकिस्तान के केयरटेकर प्रधानमंत्री अनवारुल हक ककार ने शुक्रवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 78वें सत्र को संबोधित करते हुए बिना किसी भेदभाव के आतंकियों के खात्मे की जरूरत पर जोर दिया था . उन्होंने यूएन से इतर एक इंटरव्यू के दौरान हिंदुत्व को लेकर खूब बयानबाजी की थी. ककार ने कहा था कि इस हिंदुत्व की राजनीति के पीछे एक घिनौनी वास्तविकता छिपी हुई है, जिसने दुनिया को युद्ध की आग में झोंक दिया है. उन्होंने कहा कि कनाडा में निज्जर की हत्या हिंदुत्व की विस्तारवादी राजनीति का ही परिणाम है. इन सब बातों को देखते हुए ही यूएन में भारत ने पाकिस्तान को दो टूक कहा कि, पाक पीओके खाली करें. भारतीय इलाके में पाकिस्तान अवैध कब्जा छोड़े.

दरअसल सन् 1947 में मिली आजादी और बंटवारे से पहले जम्मू-कश्मीर का अस्तित्व एक स्वतंत्र रियासत के तौर पर था. लेकिन 1947 में ही पाकिस्तान की सीमा से सटे जम्मू-कश्मीर के क्षेत्र पर जबरन कब्जा कर लिया. ये कब्जा अब तक कायम है.पाकिस्तान की सेना और आईएसआई उस स्थान को आतंकवादी कैंपों के तौर पर इस्तेमाल करती है और भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने की रणनीति बनाती रहती है. इस क्षेत्र को संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा पाकिस्तान नियंत्रित कश्मीर या पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के तौर पर कहा जाता है. लेकिन भारत इस क्षेत्र को पाक अधिकृत कश्मीर यानी पीओके (POK) कहता है. क्योंकि यह भारत का हिस्सा है.

देखा जाय तो भारत-पाकिस्तान और जम्मू-कश्मीर के विवाद के बीज अंग्रेज बो गये थे . सन् 1947 में जब भारत को स्वतंत्रता मिली उस वक्त अंग्रेजों ने रियासतों पर अपना-अपना दावा छोड़ दिया. कहा – भारत या पाकिस्तान में शामिल होने या स्वतंत्र रहने का निर्णय खुद लें. जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन महाराजा हरिसिंह ने पहले तो स्वतंत्र राज्य के तौर पर बने रहना चाहा लेकिन पख्तूनों के हमले के बाद उन्होंने भारत से मदद मांगी और इसी दौरान पाकिस्तान से लगे कश्मीर के हिस्से पर कब्जा कर लिया. जो आज पीओके कहलाता है.

सन् 1947 से पहले केवल जम्मू-कश्मीर ही नहीं बल्कि लद्दाख भी हरिसिंह की रिसायत का हिस्सा था. उससे पहले यह ना तो भारत और ना ही पाकिस्तान का हिस्सा था. सन् 1935 में अंग्रेजों ने इसके एक हिस्से को गिलगित एजेंसी को 60 साल के लिए लीज पर दे दिया था लेकिन आजादी मिलते ही अंग्रेज सरकार ने उस लीज को रद्द कर हरिसिंह को पूरा कश्मीर लौटा दिया था.गिलगिट और बाल्टिस्तान के विलय के बाद हरिसिंह के लोकल कमांडर कर्नल मिर्जा हसन खान ने महाराजा के खिलाफ बगावत कर दी और गिलगिट-बाल्टिस्तान को आजाद घोषित कर दिया. कमांडर के विद्रोह को देखते हुए हरिसिंह ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत में विलय को मंजूरी दे दी. लेकिन इसके बाद पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया.करीब तीन हफ्ते बाद के बाद पाकिस्तानी सेना ने गिलगिट बाल्टिस्तान पर हमला कर दिया और उस पर कब्जा कर लिया. उसमें जम्मू का भी कुछ हिस्सा है. ये पूरा इलाका पीओके कहलाता है.

1947 में जिस पूरे क्षेत्र पर पाकिस्तान ने कब्जा किया, उसे दो भागों में बांट दिया-गिलगित बाल्टिस्तान और आजाद कश्मीर कहने लगा जो कि वास्तव में पाक अधिकृत कश्मीर है. गिलगित बाल्टिस्तान का क्षेत्रफल 28 हजार 147 वर्ग मील है, यहां की राजधानी गिलगित है. जबकि पीओके का क्षेत्रफल 5,134 वर्ग मील है और यहां की राजधानी मुजफ्फराबाद है. यहां की कुल आबादी करीब 60 लाख मानी जाती है.गिलगिट बाल्टिस्तान पर कब्जे के बाद पाकिस्तान ने चाल चली. वहां की सेना ने वहां से स्थानीय कश्मीरियों पर जुल्म ढाकर खदेड़ दिया. आजादी के वक्त वहां शिया और सूफी बड़ी संख्या में रहते थे लेकिन धीरे धीरे वे अल्पसंख्यक हो गए.

गिलगित बाल्टिस्तान की सीमा अफगानिस्तान और चीन से लगती है. पीओके को दो भागों में बांटने से पहले पाकिस्तान ने गिलगित बाल्टिस्तान के एक बड़े हिस्से को चीन को सौंप दिया. पाकिस्तान ने चीन को जितना बड़ा हिस्सा दिया वह करीब 1900 वर्ग मील समझा जाता है. यह साल 1963 का था. वहीं उससे पहले चीन सन् 1962 के युद्ध में भारत से युद्ध के दौरान लद्दाख के कुछ हिस्से पर कब्जा कर लिया था जिसे अक्साई चिन कहा जाता है.पाकिस्तान ने चीन को जो इलाका दिया है वहां चीन एक कोरिडोर बना चुका है, जिसे चाइना-पाकिस्तान इकोनोमिक कोरिडोर कहा जाता है. चीन के प्रोजक्ट, पाकिस्तानी सेना, आईएसआई और आतंकवादी गतिविधियों के चलते वहां स्थानीय लोगों में काफी रोष है. लेकिन पाकिस्तानी सरकार का दमन इन्हें खामोश कर देता है.

जिस पाकिस्तान की बदहाली के किस्से दुनिया में अब आम हो चुके हैं वहां पीओके की हालत किसी से छुपी नहीं है. आये दिन पाक सरकार के खिलाफ वहां आवाजें उठती रहती हैं. लेकिन इस पीओके को लेकर पाकिस्तान दुनिया में किस तरह के दिखावे करता है उसे भी जान लिजिए.पीओके पर शासन पाकिस्तान का चलता है लेकिन वहां प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति पद भी है. दुनिया को दिखाने के लिए पीओके में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट भी है. लेकिन जमीनी हालत कुछ और ही है.

पूरे जम्मू -कश्मीर क्षेत्र को धरती की जन्नत कहा गया है. लिहाजा इसका भू-भाग होने के नाते गिलगित-बाल्टिस्तान भी कम खूबसूरत नहीं है. पहाड़ियां, झरने और फूलों की घाटियां देखते ही बनती हैं. यहां पर्वत की चोटियों की नैसर्गिक सुंदरता अनोखी है. पूरा क्षेत्र काराकोरम की मनोहारी पहाड़ियों से लैस है. यहीं पर हिंदुकुश और तिरिच मीर नाम के दो पर्वत भी हैं. पर्यटन यहां की अर्थव्यवस्था का मुख्य जरिया रहा है लेकिन आतंकवाद और पाकिस्तान की बदहाली से पूरा क्षेत्र प्रभावित है और स्थानीय लोग परेशान हैं.

भारत ने पाकिस्तान के सामने हमेशा कहता आया है कि पूरा जम्मू कश्मीर और लद्दाख (POK सहित) भारत देश का अंग है और इसका विलय भारत में पूरे वैध तरीके से हुआ है, जिसे कभी पलटा नहीं जा सकता। भारत ने कहा रहा है कि वो पाकिस्तान के उन सभी क़दमों का कड़ा विरोध करता है, जिनके तहत वो अपने कब्जे वाले भारतीय प्रदेशों की स्थिति में बदलाव लाने के लिए उठा रहा है।इसीलिए भारत ने पाकिस्तान को तुरंत अपने अवैध कब्जे वाले प्रदेशों को खाली करने को कहा है।

Comment / Reply From

Newsletter

Subscribe to our mailing list to get the new updates!