महिला अत्याचारों ने पलटा गहलोत सरकार का राज
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की सोमवार को जारी वार्षिक रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया कि
महिला अपराधों के आंकड़ों में देश में सबसे अधिक बलात्कार के मामले राजस्थान में दर्ज किये
गए। ये आंकड़े 2022 के है जो गहलोत सरकार की कानून व्यवस्था की नाकामियों को उजागर
करते है। विधान सभा चुनाव में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य में महिला अत्याचार के मामलों
को प्रमुखता से उठाया था। मोदी ने महिला अत्याचार जैसे मुद्दों को कसकर पकड़ कर कांग्रेस
के छक्के छुड़ा दिए। देश के गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी चुनावी सभाओं में कहा था
महिलाओं के साथ हुए अत्याचार चिंता जनक है। सरकार महिलाओं की सुरक्षा में पूरी तरह से
फेल रही है। इसलिए जनता ने पूरी तरह से परिवर्तन का मूड बना लिया है।
गहलोत सरकार की चुनावों में हार के प्रमुख कारणों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों को बताया
जा रहा है। एनसीबी द्वारा जारी रिपोर्ट में बताया गया है की उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान
में महिलाओं पर सब से अधिक अपराध के मामले दर्ज़ हुए। इनमें बलात्कार के कुल 31 हजार
516 में से सर्वाधिक 5 हजार 399 प्रकरण राजस्थान में दर्ज़ हुए जो देश में सबसे अधिक है।
आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय दंड संहिता के तहत महिलाओं के खिलाफ ज्यादातर अपराध पति
या उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के थे, इसके बाद महिलाओं का अपहरण, महिलाओं पर उनकी
लज्जा को भंग करने के इरादे से हमला और दुष्कर्म के मामले शामिल हैं।
सच तो यह है इस अवधि में गहलोत सरकार के दावों के विपरीत दुष्कर्म, दरिंदगी और महिला
अत्याचार में राजस्थान में हदें पार कर दी। बलात्कार की घटनाओं ने सियासत को हिलाकर रख
दिया। देशभर में दुष्कर्म के मामलों में नंबर-1 रहने वाले राजस्थान में एक और डराने वाला
आंकड़ा सामने आया है। प्रदेश में बच्चियों के साथ दुष्कर्म के मामलों में इजाफा हुआ है।
राजस्थान में दलित बेटियों के साथ ज्यादती की घटनाओं तो लगातार सामने आ ही रही थी।
राजस्थान पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार साल 2022 में ये आंकड़ा 825 और साल 2021 में 694
था। यानी साल दर साल मासूम बच्चियों के साथ दरिंदगी की घटनाएं बढ़ रही हैं।
दुष्कर्म में देशभर में एनसीबी के आंकड़ों में राजस्थान अव्वल चल रहा है। राष्ट्रीय अपराध
रिकॉर्ड ब्यूरो 2021 के आंकड़ों में भी राजस्थान में सबसे ज्यादा रेप के मामले सामने आए। रेप
के ये आकड़ें बेहद भयावह है। ऐसा लगता है जैसे राजस्थान रेप की राजधानी बन गया हो।
हालाँकि गहलोत सरकार ने दावा किया था कि इतने मामले इसलिए सामने आ रहे हैं क्योंकि
हमने एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य कर दिया और जब एफआईआर अधिक दर्ज होंगी तो
अपराध का आंकड़ा तो बढ़ेगा ही।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट का विश्लेषण करें तो पाएंगे राज्य में कानून का इकबाल
खत्म हो गया है विशेषकर महिलाओं से दुष्कर्म के मामलों में। चाहे किसी पार्टी का शासन हो,
दावे अवश्य बढ़ चढ़ कर किये जाते है मगर अपराधियों के खौफ के आगे सभी बेबस है। नेता हो
या अभिनेता, साधु वेषधारी हो या सफेदपोश, महिला से जोर जबरदस्ती में सब आगे है। दो
साल की बच्ची से लेकर बुजुर्ग महिला तक दुष्कर्म की शिकार हो रही है। ऐसे में कानून के
पालनहार कोई सख्त कदम उठाने के बजाय अपनी गलतियों को छिपाने के लिए नित नए बहाने
ढूंढ रहे है। ये ऐसे आंकड़े हैं, जो सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हैं। ऐसे मामलों में ज्यादातर महिलाएं
रिपोर्ट दर्ज कराने से झिझकती हैं। वे सामाजिक, पारिवारिक या अन्य किसी दबाव की वजह से
अपने साथ हुए जघन्य अपराध के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने में असफल होती हैं।
आजकल प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर महिलाओं के साथ दुष्कर्म और छेड़छाड़ की खबर
रोज दिखाई जाती है परंतु इसकी रोकथाम के उपाय पर चर्चा कहीं नहीं होती है। इस तरह के
अत्याचार कब रुकेंगें। क्या हम सिर्फ मूक दर्शक बन खुद की बारी का इंतजार करेंगे। लड़कियों
पर अत्याचार पहले भी हो रहे थे और आज भी हो रहे हैं अगर इसके रोकने के कोई ठोस उपाय
नहीं किये गये। आज भी हमारे समाज में बलात्कारी सीना ताने खुले आम घूमता है और बेकसूर
पीड़ित लड़की को बुरी और अपमानित नजरों से देखा जाता है । न तो समाज अपनी जिम्मेदारी
का माकूल निर्वहन कर रहा है और न ही सरकार।
सच तो यह है कि एक छोटे से गांव से देश की राजधानी तक महिला सुरक्षित नहीं है। अंधेरा
होते-होते महिला प्रगति और विकास की बातें छू-मंतर हो जाती हैं। रात में विचरण करना बेहद
डरावना लगता है। कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित घर पहुँचने की चिंता सताने लगती है। देश
में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में कमी नहीं आरही है।