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महिला बुनकरों को मिले निःशुल्क चरखे

महिला बुनकरों को मिले निःशुल्क चरखे

खादी आत्मसम्मान व स्वरोजगार का जरियां- खादी बोर्ड उपाध्यक्ष 

 
 
कोटा । खादी बोर्ड के उपाध्यक्ष पंकज मेहता ने कहा कि राज्य सरकार ने खादी को बढावा देने के लिए अनेक सकारात्मक कदम उठाये है। खादी पहनावा ही नहीे बल्कि हमारी संस्कृति है। इससे आत्मविश्वास के साथ बडे स्तर पर स्वरोजगार भी मिलता हैं। 
खादी बोर्ड के उपाध्यक्ष सोमवार को हाडौती खादी समिति परिसर में खादी ग्रामोघोग बोर्ड द्वारा 16 महिलाओं को चरखा, लूम कताई बुनाई का प्रशिक्षण उपरांत आधुनिक 10 चरखे वितरण कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि खादी से देश की संस्कृति एवं सम्मान की पहचान होती है। खादी द्वारा स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर अब तक ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरों तक आत्म सम्मान के साथ रोजगार उपलब्ध कराने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि खादी बोर्ड महिलाओं का घर बैठे रोजगार देने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इसमें प्रशिक्षण से लेकर आधुनिक चरखे उपलब्ध करवाकर आत्मनिर्भर बनाने का कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि खादी वस्त्र या वस्तु नहीं बल्कि हमारी संस्कृति है। आज भी गांधीजी के द्वारा बताये रास्ते पर चलकर गाव मंे स्वरोजगार के लिए खादी कारगर साबित हो सकती हैं। उन्होंने उपस्थित प्रशिक्षाणार्थी महिलाओं को आव्हान किया कि चरखे का उपयोग कर वे आत्म निर्भर बने तथा अन्य महिलाओं को भी सरकार की योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित करें। 
हाडौती खादी समिति के अध्यक्ष रवि भूषण शिरोमणि ने कहा कि खादी को आजीविका का माध्यम बनाना होगा। गांधी जी के द्वारा बताये मार्ग पर चलकर गांव-गंाव खादी की अलख जगानी होगी। उन्होने समिति द्वारा खादी के वस्त्र निर्माण में किये जा रहे नवाचारों के बारे जानकारी प्रदान की। संभागीय खादी अधिकारी महेन्द्र सिंह ने बताया कि 30 दिवस तक प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण के दौरान मानदेय भी प्रदान किया जाता हैं। उन्होने बताया कि  प्रशिक्षणार्थी महिलाओं को प्रतिमाह 10 किलो घुण्डी प्रदान की जायेगी जिससे कताई ,बुनिया का कार्य किया जा सके। इस अवसर पर खादी समिति मंत्री कमल किशोर शर्मा, चन्द्रेश वैष्णव हाडौती खादी समिति के पदाधिकारी उपस्थित रहें। 
खादी ने बनाया आत्मनिर्भर
30 दिवसीय प्रशिक्षण के बाद विज्ञान नगर इन्दिरा कॉलोनी निवासी सीमा विश्वास ने बताया कि खादी ने आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया है। 30 दिवसीय प्रशिक्षण में चरखा चलाने से लेकर कताई, बुनाई की सारी विधाऐ सीखी है। अब हमें किसी पर मोहताज नहीं होना पडेगा। प्रशिक्षण में महिलाओं ने बताया कि इससे घर बैठे रोजगार मिलने से आत्मसम्मान बढेगा। 

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