भाजपा पदाधिकारियों की निष्क्रियता से कार्यकर्ता हुए निराश
जनसमस्या के विरोध की बजाय स्वार्थ साधने में लगे है मुखिया
फलोदी . भारतीय जनता पार्टी देहात उतर के सन्गठन में छाई निष्क्रियता से पार्टी कार्यकर्ता बड़े क्षुब्ध नजर आ रहे है। उनका कहना है कि राजस्थान में विधानसभा चुनाव 6 माह बाद होने को है लेकिन पार्टी पदाधिकारियों की निष्क्रियता से कार्यकर्ता सोच में पड़े हुए है कि इस स्थिति में मोदी जी को कैसे मजबूत किया जा सकेगा।
राजस्थान में इसी वर्ष नवम्बर में विधानसभा चुनाव होने वाले है। वर्तमान सरकार ने चुनावी वर्ष में लोकलुभावन बजट पेश कर दिया है। पिछले 4 वर्षों से हाशिये पर रहे फलोदी को 45 वर्षो से लंबित फलोदी जिला बनाने को माँग को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने स्वीकार कर फलोदी को जिला बनाकर पार्टी में नई ऊर्जा उत्त्पन्न कर दी है। कोंग्रेसी नेता जिले की घोषणा के साथ ही अपने लिए विधायक बनने की जमीन तलाशने में जुट गए है। वहीं भारतीय जनता पार्टी पदाधिकारियों की स्थानीय स्तर पर पूर्ण निष्क्रियता के कारण पार्टी कमजोर होती नजर आ रहा है , जिस वजह से भाजपा की नीतियों और मोदी के समर्थक निराश नजर आने लगे है। ऐसे लोगों का कहना है कि पिछले तीन सालों में पार्टी द्वारा फलोदी की एक भी जन समस्या के लिए आवाज नहीं उठाई है। पिछले नगरपालीका बोर्ड में ऐतिहासिक विकास कार्य होने के बावजूद पार्टी की फुट ओर निष्क्रियता से पार्टी बैकफुट पर जा रही है।
पूर्ण निष्क्रिय हो गई भाजपा-
फलोदी के स्थानीय भाजपा पार्टी के पदाधिकारी तो विपक्षी पार्टी का विरोध क़रने की बजाय अंदर ही अंदर बैठकें करके अपने निजी स्वार्थ साधने में लगे हुए है। उनमें कभी भी शहर की जन समस्याओं के खिलाफ आवाज उठाते नहीं देखा गया है। भाजपा शहर अध्यक्ष की तो शायद दो कार्यकाल भी पूरे हो गए लेकिन संगठन की निष्क्रियता भाजपा को बड़ा नुकसान देती नजर आ रही है। भाजपा पदाधिकारी क्षेत्र में अतिक्रमण, बिजली, पानी, साफ सफाई, यातायात व्यवस्था, क्षेत्र में बढ़ रहै अवैध नशे का कारोबार, तश्करी, लूट, चिकित्सा समस्या जन समस्या, पानी की समस्या सहित किसी भी जन समस्या के लिए पिछले 4 वर्षों में एक बार भी विरोध करते नजर नहीं आये।
कार्यकर्ताओ को आई स्वर्गीय थानवी की याद- भाजपा कार्यकर्ता जब शहर की समस्याओं का जिक्र होता है तो आपस मे बतियाते है कि भाजपा के कद्दावर नेता स्वर्गीय राधाकिशन थानवी आज यदि जिंदा होते तो भारतीय जनता पार्टी का ये जश्र नहीं होता। थानवी के निधन के बाद भाजपा शहर मण्डल तो ऐसा लगता है कि या तो सत्ता पक्ष के आगे नतमष्टक हो गया है या फिर पूर्ण रूप से निष्क्रिय हो गया है।