शनि जन्मोत्सव पर की भगवान शनि देव की आराधना
लक्ष्मणगढ़ । श्रीधर शनि धाम मंदिर जालूकी रोड बिजली घर के पास के पुजारी पंडित लोकेश कुमार शर्मा ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनिदेव न्यायप्रिय देवता हैं। शनि देव भगवान सूर्य और छाया के पुत्र माने जाते हैं । वैदिक ज्योतिष के अनुसार, शनि को पापी ग्रह माना जाता है शनिग्रह सबसे धीमी चाल चलने बाले ग्रह है। जिसको शनि की ढैय्या कहा जाता है।
शनि जन्मोत्सव 19 मई शुक्रवार को मनाई गई। शनि जयंती ज्येष्ठ अमावस्या के कृष्ण पक्ष के दिन मनाई जाती है। ज्येष्ठ अमावस्या,और वट सावित्री व्रत, का त्योहार भी आज मनाया गया । ये तीनों ही त्योहार एक ही दिन में पड़ रहे हैं। शनि जयंती का अर्थ है शनिदेव का जन्मदिवस, सूर्य के पुत्र शनिदेव देवों के न्यायधीश, कर्मफलदाता और दंडधिकारी भी हैं। ऐसा कहा जाता है कि जिसके ऊपर शनिदेव की कुपित दृष्टि हो, वह व्यक्ति राजा से रंक बन जाता है।
इस बार की शनि देव जन्मोत्सव बेहद खास माना जा रहा है। आज शनि जन्मोत्सव के दिन इस बार शोभन योग का निर्माण भी हुआ है। आज दिन चंद्रमा गुरु के साथ मेष राशि में विराजमान होंगे। इससे गजकेसरी योग का निर्माण भी हुआ। शनि अपनी कुंभ राशि में विराजमान होकर शशयोग का निर्माण भी करेंगे।
शनैश्चरम" शनि चालीसा, या शनि स्तोत्र का पाठ या मंत्र का जाप करने से भी शनिदेव को प्रसन्न किया गया। लोगों द्वारा शनि देव की वस्तुओं का दान किया गया।
कस्बे में स्थित मंदिर में सुबह शुक्रवार को शनि महाराज का पंचामृत से स्नान कराया गया। गंगा जल दूध दही शहद बुरा तेल से अभिषेक करने के बाद बाबा का शृंगार किया गया। बिजली विभाग के अभियंता शिवकुमार शर्मा के द्वारा केक काटकर शनि महाराज का जन्मदिन मनाया गया और शनि जन्मोत्सव मना कर सभी को प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर ईश्वर नकड़ा शिवकुमार शर्मा गोविंद शर्मा वीरेंद्र साहू पूरण सैनी टिंकू ज्योतिष आदि लोग मौजूद थे।