सिगरेट के धुएं में उड़ती है 80 लाख लोगों की जिंदगी
धूम्रपान सेहत के लिए हानिकारक होता हैं। ये बात टीवी, न्यूज पेपर, होर्डिंग में दिखने वाले
विज्ञापनों में कई बार देखने को मिलती हैं। यहां तक कि सिगरेट के पैकेट पर भी लिखा होता हैं
कि सिगरेट पीना हानिकारक हैं और इससे कर्करोग होता है। लेकिन इसके बावजूद लड़के और
लड़किया धड़ले से सिगरेट फूंकते जाते हैं। वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के
शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि धूम्रपान से याददाश्त तेजी से घटने और अल्जाइमर रोग का
भी खतरा हर समय मंडराता रहता है। शोध के दौरान अलग-अलग आयु वर्ग के 32,094 लोगों
के मस्तिष्क का अध्ययन किया गया। शोध ग्लोबल ओपन साइंस पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि धूम्रपान न सिर्फ दिल और फेफड़ों को प्रभावित करता है, बल्कि
मस्तिष्क पर भी स्थायी प्रभाव डालता है। जीन की भी इसमें अहम भूमिका होती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया के करीब 125 देशों में तंबाकू पैदा होती है और हर
साल करीब 5.5 खरब सिगरेट का उत्पादन होता है। एक अरब से ज्यादा लोग इसका सेवन
करते है। धूम्रपान का घातक प्रभाव खाँसी, गले में जलन, सांस लेने में परेशानी और कपड़ों की
दुर्गंध के साथ आरंभ होता है। दुनियाभर में हर साल लगभग 80 लाख लोगों की मौतें ध्रूमपान की वजह
से होती है। यह हर कोई जानता है की सिगरेट के धुएं से धूम्रपान आपकी सेहत के लिए हानिकारक है। मगर
यह सब लोग नहीं जानते है कि सेकेंड-हैंड स्मोकिंग भी आपके लिए जानलेवा है। सेकेंड हैंड स्मोकिंग से
हमारा तात्पर्य है सिगरेट पीने वाले से ज्यादा खतरा उसको होता है जो सिगरेट पीने वाले के पास बैठा होता है
और सिगरेट के धुंए का सेवन करता है। सेंकड हैंड स्मोकिंग से बच्चों और बड़ों दोनों को गंभीर और जानलेवा
बीमारी होने की आशंका रहती है। धूम्रपान और सेकेंड हैंड धुएं के संपर्क में आने से हर साल दुनिया भर में
लगभग 13 लाख लोगों की मौत हो जाती है। भारत में 100 मिलियन से अधिक धूम्रपान करने वाले हैं और
इनके साथ, गैर धूम्रपान करने वालों को घर पर, काम पर और सार्वजनिक स्थानों पर सेकेंड हैंड धुएं का
सामना करना पड़ता है। सेकेंड हैंड धुंआ सात हज़ार से अधिक रसायनों का घातक मिश्रण है, जो धूम्रपान न
करने वाले बच्चों और वयस्कों में समय से पहले मौत और बीमारी का कारण बनता है और इसके संपर्क में
आने का कोई ज्ञात सुरक्षित स्तर नहीं है।
विभिन्न शोधों से जो परिणाम सामने आये हैं वे इस बात की पुष्टि करते हैं कि धूम्रपान, रक्त संचार की
व्यवस्था पर हानिकारक प्रभाव डालता है। धूम्रपान का सेवन और न चाहते हुए भी उसके धूएं का सामना,
हृदय और मस्तिष्क की बीमारियों का महत्वपूर्ण कारण है। इन अध्ययनों में पेश किये गये आंकड़े इस बात
के सूचक हैं कि कम से कम सिगरेट का प्रयोग भी जैसे एक दिन में पांच सिगरेट या कभी कभी सिगरेट का
सेवन अथवा धूम्रपान के धूएं से सीधे रूप से सामना न होना भी हृदय की बीमारियों से ग्रस्त होने के लिए
पर्याप्त है। धूम्रपान के धूएं में मौजूद पदार्थ जैसे आक्सीडेशन करने वाले, निकोटीन, कार्बन मोनो आक्साइड
जैसे पदार्थ हृदय, ग्रंथियों और धमनियों से संबंधित रोगों के कारण हैं। धूम्रपान का सेवन इस बात का
कारण बनता है कि शरीर पर इन्सोलीन का प्रभाव नहीं होता है और इस चीज से ग्रंथियों एवं गुर्दे को क्षति
पहुंच सकती है। धूम्रपान के सेवन के हानिकारक प्रभावों से केवल लोगों के स्वास्थ्य को खतरा नहीं है बल्कि
इससे आर्थिक क्षति भी पहुंचती है विशेषकर यह निर्धन लोगों की निर्धनता में वृद्धि का कारण है। 20
सिगरेट अथवा 15 बीड़ी पीने वाला एवं करीब 5 ग्राम सुरती, खैनी आदि के रूप में तंबाकू प्रयोग करने वाला
व्यक्ति अपनी आयु को 10 वर्ष कम कर लेता है। इससे न केवल उम्र कम होती है, बल्कि शेष जीवन अनेक
प्रकार के रोगों एवं व्याधियों से ग्रसित हो जाता है। सिगरेट, बीड़ी पीने से मृत्यु संख्या, न पीने वालों की
अपेक्षा 50 से 60 वर्ष की आयु वाले व्यक्तियों में 65 प्रतिषत अधिक होती है। यही संख्या 60 से 70 वर्ष की
आयु में बढ़कर 102 प्रतिशत हो जाती है। सिगरेट, बीड़ी पीने वाले या तो शीघ्रता से मौत की गोद में समा
जाते हैं या फिर नरक के समान जीवन जीने को मजबूर होते हैं। धूम्रपान के खतरे को देखते हुए सरकार को
भी इसे प्रतिबंधित कर देना चाहिए ताकि न बजेगा बांस और न बजेगी बांसुरी।