योग को अपनाएं और बीमारियों से छुटकारा पाएं
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस हर साल 21 जून को दुनियाभर में मनाया जाता है। इस साल 9वां अंतरराष्ट्रीय
योग दिवस मनाया जा रहा है। इस बार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस वसुधैव कुटुम्बकम के सिद्धांत पर वन
वर्ल्ड, वन हेल्थ रखी गई है। इस दिन दुनियाभर में घर घर में योग की ज्योति प्रज्जवलित होंगी जिसमें
करोड़ों लोग भाग लेंगे। यही एक ऐसा निरोगी कार्यक्रम है जिसमें एक पैसा खर्च नहीं होता। हमारी आज की
भागदौड़ भरी लाइफ स्टाइल ने हमें अनेक बीमारियों का शिकार बना दिया है।इन बीमारियों पर हमारे
कठिन परिश्रम से अर्जित कमाई का एक बड़ा भाग व्यय हो जाता है। योग से बिना कोई राशि खर्च किये
हम तन और मन को स्वस्थ रख सकते है। बीमारियों को दूर भगा सकते है। आज योग और प्राणायाम ने
देश और दुनिया में अपना शासन स्थापित कर लिया है। बच्चे से बुजुर्ग तक ने निरोगी रहने के लिए योग को
अपने दैनंदिन कार्यों में शामिल कर लिया है।
इस दिन प्रधानमंत्री मोदी संयुक्त राष्ट्र संघ के परिसर में योग दिवस मनाकर विश्व मानवता को एक संदेश
देंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दिल्ली में ही योग दिवस समारोह में शामिल होंगे जबकि रक्षा मंत्री
राजनाथ सिंह कोच्चि में भारतीय नौसेना के विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर योग कार्यक्रम में
शिरकत करेंगे। योग दिवस पर केंद्रीय आयुष मंत्रालय गोवा में एक बड़े समारोह का आयोजन करेगा। गोवा
के पणजी में खुद केंद्रीय आयुष मंत्री सर्वानंद सोनोवाल शामिल होंगे।
योग सिर्फ आसन, प्राणायाम ही नहीं, बल्कि एक जीवन पद्धति है। हमारी भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल और
खानपान की गलत आदतों की वजह से हमारी सेहत पर बुरा असर पड़ता है। स्वास्थ्य का ठीक से ख्याल न
रखने की वजह से हमारे शरीर में तनाव, थकान, चिड़चिड़ाहट जैसी कई मानसिक और शारीरिक बीमारियां
घेर लेती हैं जिससे हमारा तन,मन दूषित हो जाता है। इसके साथ ही शरीर भी बेडोला हो जाता है। शुरू में हम
अपने शरीर और स्वास्थ्य पर पूरा ध्यान नहीं देते जब पानी सिर से ऊपर निकल जाता है और हम कई
प्रकार की व्याधियों के शिकार हो जाते है तो हमें योग और प्राणायाम का ध्यान आता है। और फिर शरीर को
फिट और बीमारियों से मुक्त रखने लिए हम योग का सहारा लेते है। योग अब सम्पूर्ण संसार में चर्चा में
आगया है। यह एक ऐसी विधा है जो बिना एक पैसा खर्च किये हमारे लिए उपयोगी है।
योग हजारों साल से भारतीयों की जीवन-शैली का हिस्सा रहा है। ये भारत की धरोहर है। योगासन का सबसे
बड़ा लाभ यह है कि वे सहज, सरल और सुलभ है। इसके लिए धन की आवश्यकता नहीं है। यह अमीर, गरीब
सबके लिए बराबर है। योगासनों में जहाँ माँसपेशियों को तानने, सिकोड़ने और ऐंठने वाली शारीरिक क्रियाएँ
करनी पड़ती हैं, वहीं दूसरी ओर तनाव, खिंचाव दूर करने वाली क्रियाएँ भी होती हैं। इससे शारीरिक थकान
मिटने के साथ-साथ आधुनिक जीवन शैली की विभिन्न बीमारियों से भी मुक्ति मिलती है। इससे शरीर पुष्ट
होने के साथ पाचन संस्थानों में विकार उत्पन्न नहीं होते। मोटापा कटता है। शरीर सुडोल बनता है। निश्चय
ही योग शारीरिक स्वास्थ्य के लिए वरदान है। योगासन हमारे शरीर के विकारों को नष्ट करता है। नेत्र
ज्योति बढ़ाता है, योग हमारे तन और मन दोनों का ध्यान रखता है और विभिन्न बीमारियों से मुक्त रखता
है। शारीरिक स्वास्थ्य को प्राप्त करने के लिए योगासनों का अपना महत्व और उपयोगिता है। आसनों से
शारीरिक सौष्ठव के साथ-साथ श्वास-श्वास की प्रक्रिया और रक्त संचार आवश्यक और नियमित रूप से
बना रहता है। जो स्वस्थ तन-मन के लिए बेहद जरूरी है। योग की जरूरत और महत्ता को विश्व के
चिकित्सकों ने भी एक मत से स्वीकारा है और यह निर्विवाद रूप से माना है कि विभिन्न बीमारियों से बचाव
के लिए योग का उपचार वरदान साबित होगा।
योग का शाब्दिक अर्थ तन और मन को प्रसन्न रखना है। योग हमारे देश में कोई नई प्रणाली नहीं है। इसे
हमने अपनी जीवन शैली के रूप में अपनाया है। प्राचीन काल में दवाओं का प्रयोग न के बराबर होता था।
जड़ी-बूटियाँ और औषधीय पौधे और योग ही प्रचलित थे जो शरीर को स्वस्थ रख कर निरोग रखते थे और
रोग को भगाते थे। जिन्हें अपनाकर हम शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक रूप से स्वस्थ और प्रसन्नचित्त
रहते थे। योग और प्राणायाम का स्वास्थ्य रक्षा में भारी योगदान है। स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन का वास
होता है। यदि हमारा शरीर पूरी तरह स्वस्थ होगा तो निश्चय ही मन भी प्रसन्न और प्रफुल्लित होगा।
योगासनों को सीखने से पूर्व आवश्यक सावधानियाँ भी रखनी चाहिये। सही आसन ही प्रयोग में लाने
चाहिये। योगासन शौच क्रिया और स्नान से निवृत्त होने के बाद किया जाना चाहिये। यह समतल जमीन पर
आसन बिछा कर करना चाहिये। योगासन के लिए खुला और हवादार स्थान होना परम आवश्यक है। आसन
करते समय सहज और सरल होना चाहिये तथा किसी भी प्रकार का टेंशन नहीं होना चाहिये।
यदि हम चाहते हैं कि हम स्वस्थ रहें। तन-मन प्रफुल्लित हो तो हमें योग को अंगीकार करना होगा। यह
बिना खर्चे का बहुत ही उपयोगी और महत्त्वपूर्ण उपाय है जिसे अपना कर हम अपना जीवन खुशहाल बना
सकते हैं।
- बाल मुकुन्द ओझा