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अजीत अगरकर के बड़े फैसले, चीफ सिलेक्टर के तौर पर बदली टीम इंडिया की तस्वीर

अजीत अगरकर के बड़े फैसले, चीफ सिलेक्टर के तौर पर बदली टीम इंडिया की तस्वीर

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट में इन दिनों खिलाड़ियों के संन्यास या कप्तानी से जुड़े फैसलों के साथ-साथ मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर के भविष्य को लेकर भी चर्चा है। अगरकर ने जुलाई 2023 में चेतन शर्मा की जगह मुख्य चयनकर्ता का पद संभाला था। उनका मौजूदा कार्यकाल चार अक्टूबर को खत्म होना है।

बुधवार को उन्होंने मौजूदा कार्यकाल की आखिरी चयन बैठक में हिस्सा लिया। हालांकि, उनके आगे पद पर बने रहने को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अगरकर ने बीसीसीआई को पत्र लिखकर कार्यकाल पूरा होने के बाद आगे जिम्मेदारी नहीं संभालने की इच्छा जताई है। वहीं, बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने उनके भविष्य पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया और कहा कि क्रिकेट में 15 दिन भी काफी लंबा समय होता है।

वनडे विश्व कप 2027 को ध्यान में रखते हुए फिटनेस और खिलाड़ियों के कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर अगरकर और बीसीसीआई के बीच मतभेद की खबरें भी सामने आती रही हैं।

आईसीसी ट्रॉफी का इंतजार हुआ खत्म

मुख्य चयनकर्ता बनने के बाद अगरकर के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक भारतीय टीम को आईसीसी ट्रॉफी जिताना था। भारत ने 2013 चैंपियंस ट्रॉफी के बाद लंबे समय तक कोई आईसीसी खिताब नहीं जीता था।

अगरकर की चयन समिति के कार्यकाल में यह इंतजार खत्म हुआ। भारत ने 2024 में टी20 विश्व कप का खिताब जीता। इसके बाद 2025 में चैंपियंस ट्रॉफी में भी भारतीय टीम ने ट्रॉफी अपने नाम की। इससे पहले 2023 वनडे विश्व कप में भारत फाइनल तक पहुंचा था, हालांकि खिताब हासिल नहीं कर सका था।

इस लिहाज से अगरकर के कार्यकाल में टीम के आईसीसी टूर्नामेंट प्रदर्शन में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला।

सूर्यकुमार को बाहर करने का फैसला भी चर्चा में रहा

अगरकर की चयन समिति को कई ऐसे फैसले लेने पड़े, जो आसान नहीं माने जाते। इनमें सूर्यकुमार यादव को टी20 टीम से बाहर करने का निर्णय भी शामिल था।

टी20 विश्व कप जीतने के बाद रोहित शर्मा के संन्यास के बाद सूर्यकुमार यादव को कप्तानी की जिम्मेदारी मिली थी। उनकी कप्तानी में भी भारतीय टीम ने खिताब जीता। हालांकि बाद में उनके खराब फॉर्म के बीच चयनकर्ताओं ने श्रेयस अय्यर को टीम में वापस बुलाया और उन्हें कप्तानी की जिम्मेदारी दी।

टी20 विश्व कप विजेता कप्तान को टीम से बाहर करने का फैसला निश्चित तौर पर चयन समिति के लिए बड़ा निर्णय था। अगरकर की अगुआई वाली समिति ने टीम संयोजन और प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया।

शुभमन गिल को लेकर भी लिया बड़ा फैसला

अगरकर के कार्यकाल में शुभमन गिल को लेकर भी चयन समिति ने कई अहम फैसले किए। रोहित शर्मा के बाद गिल को टेस्ट और वनडे टीम की कप्तानी सौंपी गई। हालांकि टीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहने के बाद उनकी कप्तानी पर सवाल उठे।

टी20 टीम में भी गिल को जगह दी गई, लेकिन वह उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सके। इसके बाद चयन समिति ने उन्हें टी20 विश्व कप 2026 की टीम से बाहर कर दिया। घरेलू क्रिकेट में अच्छे प्रदर्शन के बाद ईशान किशन की टीम में वापसी हुई।

तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को लेकर भी अगरकर ने फिटनेस से जुड़ी स्थिति पर अपना पक्ष स्पष्ट किया था। उन्होंने माना था कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की जरूरतों के लिहाज से शमी की फिटनेस एक अहम मुद्दा है।

घरेलू क्रिकेट को लेकर बड़े सितारों पर भी लागू हुआ नियम

अगरकर की चयन समिति के कार्यकाल में घरेलू क्रिकेट को लेकर भी सख्त रुख देखने को मिला। फैसला किया गया कि जब कोई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में व्यस्त नहीं होगा, तो उसे घरेलू क्रिकेट में हिस्सा लेना होगा।

यह नियम बड़े खिलाड़ियों पर भी लागू हुआ। रोहित शर्मा और विराट कोहली ने भी घरेलू क्रिकेट में हिस्सा लिया। चयन समिति का मानना था कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर रहने के दौरान खिलाड़ियों को घरेलू स्तर पर अपनी लय और मैच फिटनेस बनाए रखनी चाहिए।

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 2023-24 की टेस्ट सीरीज में भारत की हार के बाद भी टीम संयोजन और खिलाड़ियों के प्रदर्शन को लेकर कई चर्चाएं हुईं। इसी दौर में चयनकर्ताओं के सामने वरिष्ठ खिलाड़ियों के भविष्य और टीम में बदलाव को लेकर कठिन फैसले लेने की स्थिति बनी।

अगरकर की साफगोई भी रही चर्चा में

मुख्य चयनकर्ता के तौर पर अजीत अगरकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में चयन से जुड़े सवालों पर अपना पक्ष रखते रहे। टीम चयन, खिलाड़ियों की फिटनेस और घरेलू क्रिकेट को लेकर उन्होंने कई बार चयन समिति की सोच स्पष्ट की।

उनके कार्यकाल में एक ओर भारत ने आईसीसी ट्रॉफियों का इंतजार खत्म किया, वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ खिलाड़ियों से जुड़े फैसले भी सुर्खियों में रहे। अब उनके कार्यकाल की समाप्ति के करीब पहुंचने के साथ यह देखना अहम होगा कि चयन समिति की अगली दिशा क्या रहती है और अगरकर आगे इस भूमिका में बने रहते हैं या नहीं।

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