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चोट से लौटे नीतीश रेड्डी को मिला बड़ा बूस्ट, बोले- अब आत्मविश्वास बनाए रखना है

चोट से लौटे नीतीश रेड्डी को मिला बड़ा बूस्ट, बोले- अब आत्मविश्वास बनाए रखना है

नई दिल्ली। अफगानिस्तान के खिलाफ पहले टी20 में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाने के बाद नीतीश कुमार रेड्डी ने दूसरे मुकाबले में गेंद से प्रभाव छोड़ा। उन्होंने 24 रन देकर तीन विकेट हासिल किए और अफगानिस्तान को 159/8 के स्कोर तक सीमित रखने में भारत की मदद की। इसके बाद भारतीय टीम ने सात विकेट शेष रहते लक्ष्य हासिल कर लिया।

मैच के बाद नीतीश ने बीसीसीआई के एक वीडियो में कहा कि चोट से वापसी करने वाले खिलाड़ी के लिए आत्मविश्वास बेहद महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने माना कि पहला मुकाबला उनके लिए उतना अच्छा नहीं रहा था, लेकिन दूसरे मैच में अपने प्रदर्शन से वह काफी खुश हैं। उनका कहना है कि अब वह इस आत्मविश्वास को आगे भी बनाए रखना चाहते हैं।

22 वर्षीय नीतीश के लिए यह प्रदर्शन इसलिए भी खास रहा क्योंकि वह चोट के बाद वापसी कर रहे हैं। फिटनेस हासिल करने के लिए उन्होंने बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में काफी समय बिताया और ट्रेनिंग पर मेहनत की। वापसी के बाद मिले इस मौके को उन्होंने प्रदर्शन में बदलने की कोशिश की, जिसका नतीजा दूसरे टी20 में देखने को मिला।

नीतीश ने भारतीय टीम मैनेजमेंट से मिले भरोसे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि टीम में शामिल होने के बाद उन्हें लगातार मौके और समर्थन मिला है। इस भरोसे की वजह से वह अपनी जगह को लेकर ज्यादा चिंता किए बिना अपने खेल पर ध्यान केंद्रित कर सके।

ऑलराउंडर ने कहा कि भारतीय टीम का हिस्सा होना उनके लिए हमेशा सम्मान की बात रही है। उनके मुताबिक, मैनेजमेंट ने उन पर भरोसा जताया है और एक खिलाड़ी के लिए यही समर्थन काफी मायने रखता है। उन्होंने कहा कि वह टीम मैनेजमेंट से मिले इस भरोसे से खुश हैं।

हालांकि, चोट से वापसी का दौर सिर्फ शारीरिक मेहनत तक सीमित नहीं रहता। नीतीश ने बताया कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में लंबे समय तक रहना मानसिक रूप से भी थकाने वाला हो सकता है। वहां बेहतर ट्रेनिंग और फिटनेस के लिए तमाम सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन लगातार एक ही रूटीन में रहने से मानसिक थकान महसूस होना स्वाभाविक है।

ऐसे समय में नीतीश के लिए परिवार और दोस्तों से बातचीत काफी मददगार रही। उन्होंने बताया कि वह अपने करीबी दोस्तों से नियमित रूप से बात करते हैं। कभी-कभी एक-दो दिन के लिए घर जाकर वापस लौटना भी उन्हें मानसिक रूप से राहत देता है। उन्होंने कहा कि खेल के साथ मानसिक सेहत का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।

एक ऑलराउंडर के तौर पर नीतीश के लिए शरीर को फिट रखना और वर्कलोड को संभालना भी चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने माना कि ऑलराउंडर होने की वजह से उन पर काम का बोझ अधिक रहता है। इसलिए रिकवरी और शरीर पर लगातार नजर रखना जरूरी हो जाता है।

नीतीश ने यह भी कहा कि चोट लगना किसी खिलाड़ी के लिए आसान अनुभव नहीं होता। वह अपनी तरफ से फिटनेस और रिकवरी को लेकर पूरी कोशिश करते हैं, लेकिन चोट कभी-कभी खिलाड़ी के नियंत्रण से बाहर होती है। ऐसे समय में वह सोच को सकारात्मक रखने को सबसे महत्वपूर्ण मानते हैं।

उनके मुताबिक, मुश्किल दौर में नकारात्मक बातों और नकारात्मक लोगों को खुद पर हावी नहीं होने देना चाहिए। खिलाड़ी को मानसिक रूप से मजबूत रहकर अपने काम पर ध्यान देना चाहिए। नीतीश का मानना है कि अगर मेहनत और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ते रहें तो सही समय पर उसका परिणाम जरूर मिलता है।

अफगानिस्तान के खिलाफ दूसरे टी20 में मिली सफलता नीतीश के लिए इसी वापसी के सफर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव रही। तीन विकेट के प्रदर्शन ने उन्हें न सिर्फ टीम की जीत में योगदान देने का मौका दिया, बल्कि लंबे समय बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने आत्मविश्वास को भी मजबूत करने का अवसर दिया।

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